वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि सोने की कीमतें अंतरिम निचले स्तर के करीब पहुंच सकती हैं।
नई दिल्ली: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि सोने की कीमतें अंतरिम निचले स्तर के करीब पहुंच सकती हैं। हालिया गिरावट के बावजूद व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक परिस्थितियां सोने की कीमतों में रिकवरी का समर्थन कर रही हैं। WGC के मुताबिक, सोने की कीमतों में सुधार के लिए जरूरी 3 में से 2 ऐतिहासिक स्थितियां पहले ही बन चुकी हैं। काउंसिल ने कहा कि मौजूदा गिरावट 2011 के बाद देखी गई लंबी गिरावट की शुरुआत के बजाय एक सामान्य करेक्शन होने की अधिक संभावना है, क्योंकि व्यापक आर्थिक और बुनियादी परिस्थितियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, "हमारा सरल विश्लेषण बताता है कि सोना अंतरिम निचले स्तर के करीब पहुंच सकता है। रिकवरी के लिए जरूरी 3 में से 2 स्थितियां मौजूद हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2011 के विपरीत मौजूदा आर्थिक माहौल सोने की रिकवरी का समर्थन कर रहा है।"
अक्टूबर में 6.3 प्रतिशत गिरा सोना
अक्टूबर में सोने की कीमत 3,913 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई, जो महीने के दौरान 6.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। काउंसिल की ओर से ट्रैक की जाने वाली सभी प्रमुख मुद्राओं में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल सोना जनवरी 2026 में बने अपने रिकॉर्ड स्तर 5,405 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से करीब 25 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। आगे के रुझान पर बात करते हुए WGC ने तकनीकी संकेतकों में कमजोरी और डॉलर की मजबूती को इस बात का संकेत बताया कि सोने की हालिया बिकवाली अब समाप्ति के करीब हो सकती है। हालांकि, काउंसिल ने यह भी कहा कि बाजार में सट्टेबाजी से जुड़ी पोजीशन अभी पूरी तरह कम नहीं हुई हैं, जबकि लगातार रिकवरी के लिए ऐसा होना जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया है, "मौजूदा समय में 3 में से 2 स्थितियां लागू होती हैं। सोना अपने 200-दिवसीय औसत से काफी नीचे कारोबार कर रहा है और डॉलर अपने उच्च स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, बाजार में पोजीशन अभी भी ऊंची बनी हुई हैं।"
ऐतिहासिक आंकड़े भी रिकवरी की ओर कर रहे इशारा
2005 के बाद सोने के मंदी वाले दौर के ऐतिहासिक विश्लेषण में काउंसिल ने पाया कि जब 3 में से कम से कम 2 स्थितियां मौजूद थीं, तब अगले 3 महीनों में सोने का औसत रिटर्न 4.2 प्रतिशत रहा। ऐसे 90 प्रतिशत मामलों में रिटर्न सकारात्मक दर्ज किया गया। वहीं, जब तीनों स्थितियां एक साथ मौजूद थीं, तो विश्लेषण किए गए सभी 5 ऐतिहासिक मामलों में सोने ने सकारात्मक रिटर्न दिया था। हालांकि, WGC ने स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक आंकड़ों का नमूना सीमित है। इसके अलावा, सोने में अधिक टिकाऊ रिकवरी आने से पहले वायदा बाजार में सट्टेबाजी से जुड़ी पोजीशन में और कमी आना जरूरी होगा। काउंसिल ने मौजूदा बाजार की तुलना 2011 में सोने की कीमतों के शीर्ष स्तर पर पहुंचने के बाद की परिस्थितियों से भी की। उसने कहा कि फिलहाल वास्तविक ब्याज दरें सीमित दायरे में हैं, अमेरिकी डॉलर महंगा है और भू-राजनीतिक जोखिम भी ऊंचे बने हुए हैं। ऐसे में 2011 के बाद सोने में आई कई वर्षों की गिरावट को मौजूदा बाजार के लिए सही उदाहरण नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा बुनियादी परिस्थितियां इस संभावना को मजबूत करती हैं कि सोने की कीमतों में आई गिरावट एक सामान्य करेक्शन है, न कि लंबे समय तक चलने वाली मंदी की शुरुआत।
200-दिवसीय औसत से 10 प्रतिशत नीचे कारोबार
तकनीकी संकेतकों के मोर्चे पर सोना काफी नीचे आ चुका है। फिलहाल यह अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से करीब 10 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। हालांकि, इसकी कीमत 3,857 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के 38.2 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर से ऊपर बनी हुई है। काउंसिल ने कहा कि गिरावट का दबाव जारी रहने के कारण सोना इस सपोर्ट स्तर को भी टेस्ट कर सकता है। हालांकि, इस स्तर तक गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का आकर्षक अवसर बन सकती है। तत्काल रिकवरी के अलावा WGC ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और शेयर बाजार तथा क्रेडिट मार्केट से जुड़े नीतिगत फैसलों को 2026 के बाकी समय में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल किया है। काउंसिल ने चेतावनी दी कि शेयर बाजार और क्रेडिट मार्केट में कमजोरी बढ़ने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इससे हाल के हफ्तों में सोने की कीमतों और बॉन्ड यील्ड के बीच देखा गया असामान्य सकारात्मक संबंध फिर से उभर सकता है। इसके अलावा, सोने की आगे की चाल इस बात पर भी निर्भर करेगी कि महंगाई का दबाव कम होना शुरू होता है या नहीं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए काउंसिल ने कहा कि सोने की हालिया कमजोरी धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने का अवसर दे सकती है। ऐसे में निवेशकों को किसी एक निश्चित निचले मूल्य का इंतजार करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
(एएनआई)
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