Gold Price Today: कामा ज्वैलरी के एमडी कॉलिन शाह का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर के प्रभाव से सोने की कीमतों में जल्द तेजी लौटेगी। जानिए भारतीय बाजार का पूरा गणित।
मुंबई (महाराष्ट्र)। वैश्विक बाजार में आए उतार-चढ़ाव के बाद हाल के हफ्तों में सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। हालांकि, कामा ज्वैलरी के प्रबंध निदेशक कॉलिन शाह का मानना है कि यह सुस्ती अस्थायी है और जल्द ही सोने के दाम एक बार फिर ऊपर की ओर रुख करेंगे।
न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक exclusive साक्षात्कार में कॉलिन शाह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में आई हालिया गिरावट वैश्विक कारणों से जुड़ी है। इसका भारतीय बाजार के स्थानीय कारकों से कोई सीधा संबंध नहीं है।
फेडरल रिजर्व की नीतियां और अमेरिकी डॉलर तय कर रहे दिशा
कॉलिन शाह के मुताबिक वैश्विक स्तर पर सोने की चाल मुख्य रूप से दो बड़े कारकों पर निर्भर करती है- पहला अमेरिकी डॉलर की स्थिति और दूसरा यूएस फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें।
सोने की कीमतों का अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के साथ हमेशा उल्टा (इनवर्स) संबंध रहता है। जब भी डॉलर या ब्याज दरों में बदलाव होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दाम सीधे प्रभावित होते हैं।
सर्वकालिक उच्च स्तर से 27 फीसदी तक फिसला सोना
सोने की कीमतें अपने उच्चतम स्तर (ऑल-टाइम हाई) से करीब 25 से 27 प्रतिशत तक नीचे गिरने के बाद अब स्थिर हो चुकी हैं। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि कुछ समय के इस ठहराव (कंसोलिडेशन) के बाद बाजार एक बार फिर अपनी पुरानी लय हासिल कर लेगा।
गौरतलब है कि भारत में 24 कैरेट सोने ने 29 जनवरी 2026 को ₹1,75,340 प्रति 10 ग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था।
आने वाले हफ्तों में कैसी रहेगी भारतीय बाजार में सोने की चाल?
भारतीय मुद्रा के संदर्भ में बात करते हुए कामा ज्वैलरी के एमडी ने कहा, "रुपये के आधार पर देखें तो निकट भविष्य में यानी अगले कुछ हफ्तों के दौरान कीमतों में एक तरह का ठहराव और मजबूती देखने को मिलेगी। इसके बाद अगले एक साल की अवधि में सोना अपनी ऊपर की यात्रा फिर से शुरू कर देगा।"
शाह का अनुमान है कि अगले दो सालों तक दुनिया भर में आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना रह सकता है। यही अनिश्चितता सोने की कीमतों को लगातार सहारा देती रहेगी।
रिपोर्ट तैयार किए जाने तक भारतीय बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1,44,903 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद भारत में क्यों नहीं घटे दाम?
भारतीय उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि जब ग्लोबल मार्केट में सोना सस्ता हुआ, तो घरेलू बाजार में उतनी बड़ी राहत क्यों नहीं मिली।
इसका गणित समझाते हुए कॉलिन शाह ने बताया कि 15 प्रतिशत आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) और डॉलर के मुकाबले रुपये में आई 3 से 5 फीसदी की गिरावट ने अंतरराष्ट्रीय गिरावट के असर को सोख लिया। इसी वजह से घरेलू बाजार में कीमतें मुख्य रूप से ₹1.3 लाख से ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में ही टिकी रहीं।
त्योहारों से लेकर शादियों तक आभूषणों की मांग जबरदस्त
महंगाई और ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय ग्राहकों का भरोसा सोने पर कम नहीं हुआ है। चालू त्योहारी सीजन में आभूषणों की बिक्री में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है।
शाह ने बताया, "रक्षाबंधन से शुरू हुआ यह सिलसिला नवरात्रि से होते हुए धनतेरस की तैयारी तक बेहद मजबूत बना हुआ है।" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले वेडिंग सीजन में भी आभूषणों की मांग काफी तेज रहने की उम्मीद है, क्योंकि हर साल इस दौरान बड़े पैमाने पर शादियां होती हैं।
5 से 10 साल के नजरिए से हर गिरावट खरीदारी का बेहतरीन मौका
भारतीय खरीदारों की मानसिकता का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि देश में सोने को अल्पकालिक ट्रेडिंग के बजाय एक सुरक्षित और लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखा जाता है।
लोग शादी-ब्याह, भावनात्मक अवसरों और भविष्य की बचत के लिए सोना खरीदते हैं। इसके अलावा, पुराने गहनों को कैश कराने के बजाय उन्हें नए आभूषणों से बदलना ज्यादा पसंद करते हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सलाह देते हुए कॉलिन शाह ने कहा, "5 से 10 साल के नजरिए से देखने वाले निवेशकों के लिए कीमतों में आई गिरावट खरीदारी करने और अपनी कुल लागत को औसतन (एवरेज) कम करने का शानदार मौका देती है। बाजार में जब भी हर गिरावट आए, वह खरीदारी का एक बेहतरीन अवसर है।"
(इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: शेयर बाजार में रिकॉर्डतोड़ तेजी, सेंसेक्स 2000 अंक उछला और निफ्टी 24500 के पार बंद