वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से वस्त्र और जूते जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात तथा रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
नई दिल्ली (भारत)। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह समझौता जूते, वस्त्र, खिलौने और प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा दे सकता है, जिनमें से कई सूक्ष्म और लघु उद्यमों से जुड़े हैं। म्यूनिख नेताओं की बैठक में बोलते हुए सीतारमण ने कहा, "ये सभी सूक्ष्म और लघु-मध्यम उद्योग क्षेत्र में आते हैं, जो श्रम-प्रधान हैं।" उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय बाजार तक अधिक पहुंच से "अधिक निर्यात और अधिक रोजगार" पैदा हो सकते हैं।
यूरोपीय संघ के बड़े बाजार में भारत को प्रवेश
सीतारमण ने कहा, "इसलिए जब निर्यात कई देशों के समूह को होता है और इसमें ये वस्तुएं शामिल होती हैं, चाहे वह जूते हों, वस्त्र हों, खिलौने हों, कुछ प्रसंस्कृत सामग्री हो, पुर्जे हों, ये सभी सूक्ष्म और लघु-मध्यम उद्योग क्षेत्र में आते हैं, जो श्रम-प्रधान हैं।" मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वस्त्र, विशेष रूप से, बड़े क्षेत्र में आ सकता है, लेकिन फिर भी इसमें बड़ी संख्या में कार्यबल, विशेष रूप से महिलाएं शामिल होती हैं। “इसलिए जब इन वस्तुओं को यूरोपीय संघ जैसे बड़े बाज़ार में प्रवेश मिलता है, तो ये ऐसे क्षेत्र हैं जो अधिक रोज़गार, अधिक निर्यात और अधिक रोज़गार पैदा करेंगे, और इसलिए यह व्यापार समझौता वास्तव में रोज़गार के पक्ष में काम कर रहा है,” उन्होंने कहा।
भारत ने अपनी 97 प्रतिशत टैरिफ़ मूल्य खोली
सीतारमण ने बताया कि भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ़ लाइनें और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ़ मूल्य खोल दिए हैं, जबकि यूरोपीय संघ ने मूल्य के हिसाब से 99 प्रतिशत और संभवतः 97 प्रतिशत टैरिफ़ लाइनें खोली हैं। दूसरी ओर, वित्त मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गई है जहाँ दोनों पक्षों की ओर से और रियायतें देना मुश्किल हो सकता है, जिससे संकेत मिलता है कि शेष बातचीत सीमित समझौते की गुंजाइश खोजने पर निर्भर हो सकती है।
समझौते पर बातचीत अभी भी जारी
“समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है, हालाँकि हम यह मानना चाहेंगे कि दोनों पक्ष एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गए हैं जहाँ से आगे देना या लेना बहुत मुश्किल हो सकता है। लेकिन अगर बातचीत के लिए गुंजाइश है, तो दोनों पक्ष ऐसा करेंगे,” सीतारमण ने बैठक में कहा। उन्होंने कहा कि समझौते पर अभी भी "कठिन और बेहद गहन बातचीत" चल रही है, साथ ही उन्होंने भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की एक प्रमुख विशेषता के रूप में व्यापार असंतुलन पर प्रकाश डाला।
(इनपुटः ANI)
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