एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ₹1-3 करोड़ वाले मध्यम आय वर्ग के घरों की बिक्री सालाना 16% बढ़ी है, जबकि किफायती घरों की बिक्री में 21% की गिरावट आई है।
नई दिल्ली: भारतीय रियल एस्टेट बाजार में इस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां मध्यम आय और लक्जरी घरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। जबकि, किफायती आवास बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। वित्तीय सेवा फर्म 'एलारा कैपिटल' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में देश के टियर-I शहरों में घरों की बिक्री को मध्यम आय और लक्जरी सेगमेंट से जबरदस्त समर्थन मिला है।
मध्यम आय और लक्जरी सेगमेंट में जबरदस्त वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मध्यम आय वर्ग (1 करोड़ से 3 करोड़ रुपये के औसत मूल्य वाले घर) की बिक्री में तिमाही-दर-तिमाही 8 प्रतिशत और सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह, लक्जरी सेगमेंट (3 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाले घर) की बिक्री में भी तिमाही आधार पर 12 प्रतिशत और सालाना आधार पर 9 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।
किफायती आवासों की बिक्री में भारी गिरावट
वहीं, किफायती आवास सेगमेंट (1 करोड़ रुपये से कम मूल्य वाले घर) को इस तिमाही में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस बजट श्रेणी के घरों की बिक्री में तिमाही-दर-तिमाही 7 प्रतिशत और सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है।
बेंगलुरु और कोलकाता सबसे आगे
देश के प्रमुख शहरों में रियल एस्टेट का प्रदर्शन काफी अलग रहा है। बेंगलुरु और कोलकाता, अग्रणी रियल एस्टेट बाजार के रूप में उभरे हैं। दोनों शहरों ने तिमाही और सालाना आधार पर 11 से 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। बेंगलुरु में नए लॉन्च हुए घरों की बिक्री दर सबसे तेज रही। यहां लक्जरी घरों की बिक्री सालाना आधार पर 55 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
गुरुग्राम में बिक्री दर 20 फीसदी तक गिरी
NCR में सट्टेबाजी की गतिविधियों में कमी आने के कारण कुल बिक्री दर में गिरावट आई है। गुरुग्राम में व्यक्तिगत बिक्री दर लगभग 20 प्रतिशत अंक गिर गई। गुरुग्राम के लक्जरी मार्केट में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। यहां केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स की मांग है, जिनमें कोई विशेष आकर्षण है।
ब्रैंडेड और लिस्टेड डेवलपर्स का बढ़ा दबदबा
पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान बड़े और संगठित डेवलपर्स की बाजार हिस्सेदारी में सालाना आधार पर 200 आधार अंकों तक की वृद्धि हुई है। शेयर बाजार में लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनियों ने आम डेवलपर्स को पीछे छोड़ दिया है। लिस्टेड कंपनियों की प्री-सेल्स में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो कि इस सेक्टर की औसत 8 प्रतिशत की वृद्धि से कहीं अधिक है। मजबूत काम के चलते इन कंपनियों के कलेक्शन में भी 18 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है।
कमर्शियल और रिटेल सेक्टर का हाल
कमर्शियल (कार्यालय) और खुदरा (रिटेल) रियल एस्टेट क्षेत्र में मिले-जुले रुझान देखे गए हैं। ऑफिस सेक्टर में ग्रॉस लीजिंग 20 मिलियन वर्ग फीट के तिमाही स्तर पर बनी हुई है। हालांकि, शुद्ध अवशोषण में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की गिरावट आई है। अधिकतर प्रमुख बाजारों में रिटेल स्पेस खाली रहने की दर में सुधार हुआ है। लेकिन, चेन्नई (0.5% अंक) और एनसीआर (1% अंक) में खाली पड़े कमर्शियल स्पेस की संख्या में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है।