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2028 तक eVTOL एयर टैक्सी का लक्ष्य

2028 तक भारत में उड़ेंगी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियां, बेंगलुरु-मुंबई-दिल्ली को मिलेगा नया विकल्प

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि भारत का लक्ष्य 2028 तक देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी शुरू करना है, जिससे बड़े शहरों में सफर का समय कम हो सकता है।

2028 तक भारत में उड़ेंगी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियां बेंगलुरु-मुंबई-दिल्ली को मिलेगा नया विकल्प

Union Civil Aviation Minister Ram Mohan Naidu and Sarla Aviation co-founder and CEO Adrian Schmidt |

बेंगलुरु (कर्नाटक)। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने शनिवार को कहा कि भारत का लक्ष्य 2028 तक देश में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को उड़ाना है और इस नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग अगले साल तेज़ होने की उम्मीद है। बेंगलुरु में सरला एविएशन के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के मौके पर बोलते हुए, नायडू ने कहा कि इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे भीड़-भाड़ वाले महानगरों के लिए आवागमन का एक नया विकल्प बन सकते हैं।

2028 तक ये मशीनें भारत में उड़ान भरें: नायडू

नायडू ने कहा, "हम चाहते हैं कि 2028 तक ये मशीनें भारत में उड़ान भरें। इनकी बहुत ज़रूरत है, न सिर्फ़ बेंगलुरु में, बल्कि मुंबई और दिल्ली में भी।" मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरला एविएशन अगले साल पूरी तरह से टेस्टिंग के चरण में आ जाएगी, जबकि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एविएशन रेगुलेटर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) टेस्टिंग, सुरक्षा और नियमों पर इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। नायडू ने यह भी कहा कि DGCA ने सरला एविएशन को 'डिज़ाइन ऑर्गनाइज़ेशन अप्रूवल' दिया है, जो कंपनी के eVTOL एयरक्राफ्ट के विकास में एक रेगुलेटरी कदम है।

सरला एविएशन के को-फ़ाउंडर और CEO एड्रियन श्मिट ने दी जानकारी

उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि अगले साल हम पूरी तरह से टेस्टिंग के चरण में होंगे।" उन्होंने आगे कहा, "हमारी योजना है कि 2028 तक इसे हकीकत में बदल दें।" सरला एविएशन के को-फ़ाउंडर और CEO एड्रियन श्मिट ने कहा कि कंपनी का एयरक्राफ्ट ड्रोन, हेलीकॉप्टर और पारंपरिक एयरक्राफ्ट की खूबियों को मिलाता है और यह एयरक्राफ्ट की एक नई कैटेगरी में आता है जिसे रेगुलेटर 'पावर्ड-लिफ़्ट' कहते हैं। इस एयरक्राफ्ट को पायलट के साथ छह यात्रियों को ले जाने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है और इसमें सात इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल होगा - छह वर्टिकल लिफ़्ट के लिए और एक पीछे की तरफ़ आगे बढ़ाने के लिए।

छह इलेक्ट्रिक मोटर से चलेंगी इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी

श्मिट ने बताया, "यह छह इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है जो इसे ऊपर उठाती हैं और एक पीछे की मोटर इसे आगे धकेलती है। तो हम कुल सात इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल कर रहे हैं और अभी इसे पायलट उड़ाता है और इसमें छह यात्री बैठ सकते हैं।" उन्होंने कहा कि एयरक्राफ्ट का प्रोपल्शन सिस्टम इलेक्ट्रिक ही रहेगा, जबकि इसके डिज़ाइन में इतनी जगह है कि कंपनी भविष्य में टर्बो-जेनरेटर जोड़ने पर विचार कर सकती है, जो उड़ान के दौरान इसकी बैटरी को रिचार्ज कर सके। श्मिट ने कहा, "हमारे पास इतनी जगह है कि हम उड़ान के दौरान बैटरी चार्ज करने के लिए टर्बो जेनरेटर लगाने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन बैटरी से मोटर तक एनर्जी का ट्रांसफ़र हमेशा पूरी तरह से इलेक्ट्रिक ही होगा।"

 सरला एविएशन भारत में इस टेक्नोलॉजी को विकसित करना चाहती है

श्मिट ने कहा कि दुनिया भर में कई कंपनियाँ, जिनमें अमेरिका और यूरोप की कंपनियाँ भी शामिल हैं, ऐसे ही एयरक्राफ्ट पर काम कर रही हैं, जबकि सरला एविएशन भारत में इस टेक्नोलॉजी को विकसित करना चाहती है। वहीं, नायडू ने कहा कि भारत में एयर टैक्सी के कमर्शियली सफल होने के लिए सुरक्षा के साथ-साथ किफायती होना भी उतना ही ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि लोकलाइज़ेशन से लागत कम करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि एवियोनिक्स को छोड़कर एयरक्राफ्ट के बाकी पार्ट्स देश में ही बनाए जा सकते हैं। मंत्री ने कहा कि eVTOL एयरक्राफ्ट भीड़-भाड़ वाले मेट्रो शहरों में एयरपोर्ट से शहर तक के सफ़र के समय को मौजूदा दो घंटे से घटाकर लगभग 20-30 मिनट कर सकते हैं, साथ ही इनका इस्तेमाल मेडिकल इमरजेंसी में लोगों को निकालने, एयर एम्बुलेंस और कार्गो ट्रांसपोर्टेशन में भी किया जा सकता है।

eVTOL एयरक्राफ्ट के लिए एक्सपोर्ट मार्केट विकसित

उन्होंने बताया कि बेंगलुरु एयरपोर्ट का सरला एविएशन के साथ एयरपोर्ट और शहर के बीच 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' के लिए समझौता हुआ है, जबकि मणिपाल हॉस्पिटल्स ने भी संभावित एयर एम्बुलेंस सेवाओं के लिए कंपनी के साथ समझौता किया है। नायडू ने कहा कि यह टेक्नोलॉजी शहरी और 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' को बेहतर बनाने के साथ-साथ, भविष्य में भारत को देश में बने eVTOL एयरक्राफ्ट के लिए एक्सपोर्ट मार्केट विकसित करने में भी मदद कर सकती है। (इनपुट: ANI)

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