प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

सस्ते मोबाइल होंगे महंगे

सस्ते स्मार्टफोन खरीदना होगा मुश्किल! मेमोरी की बढ़ती लागत से 30% तक हो सकते हैं महंगे: जेफरीज

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती मांग से मेमोरी की कीमतें उछलीं। जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, सस्ते स्मार्टफोन 30% तक महंगे हो सकते हैं।

सस्ते स्मार्टफोन खरीदना होगा मुश्किल मेमोरी की बढ़ती लागत से 30 तक हो सकते हैं महंगे जेफरीज

Customers checking the newly launched iPhone at the Apple Store in Delhi |

नई दिल्ली। एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) इंडस्ट्री में बढ़ती मेमोरी की मांग आम मोबाइल खरीदारों की जेब पर भारी पड़ने वाली है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मेमोरी कंपोनेंट्स के महंगे होने से सस्ते यानी लो-एंड स्मार्टफोन की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इस भारी उछाल के कारण आम उपभोक्ता नए फोन की खरीदारी टालने या फिर सेकंड-हैंड डिवाइस अपनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

एआई क्षेत्र में सप्लाई की बड़ी खपत और आसमान छूती कीमतें

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि एआई सेक्टर वैश्विक स्तर पर मेमोरी सप्लाई का बड़ा हिस्सा लगातार सोख रहा है। इससे मेमोरी चिप्स के दाम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अनुमान है कि कैलेंडर वर्ष 2027 (CY27) तक कुल ग्लोबल मेमोरी डिमांड का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले एआई सेक्टर की ओर से आएगा। इसके अलावा, इसी वर्ष एआई कंपनियों द्वारा लगभग 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्षित पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) किया जाना तय है। यह भारी-भरकम निवेश आने वाली कई तिमाहियों तक मेमोरी की कीमतों को उच्च स्तर पर बनाए रखेगा।

जेफरीज का मानना है कि मेमोरी की कीमतें CY27 के मध्य तक अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तर (Peak) पर पहुंच सकती हैं। हालांकि, कंपोनेंट्स के महंगे होने की यह आंच स्मार्टफोन निर्माताओं को अभी से सताने लगी है, जिसका सबसे ज्यादा असर किफायती सेगमेंट पर पड़ रहा है।

तीन गुना तक बढ़ी प्रति यूनिट लागत का गणित

सस्ते फोनों की निर्माण लागत में मेमोरी का बड़ा योगदान होता है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, प्रति यूनिट मेमोरी लागत करीब तीन गुना तक उछल चुकी है। जहां CY25 में इसकी अनुमानित कीमत करीब 20 अमेरिकी डॉलर थी, वहीं अब यह बढ़कर 60 से 65 अमेरिकी डॉलर तक जा पहुंची है।

इसका सीधा और सबसे बड़ा प्रभाव 200 डॉलर (लगभग 16,500 रुपये) से कम कीमत वाले सस्ते एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स पर पड़ रहा है। इन लो-एंड फोन्स की कुल निर्माण लागत (Bill of Materials) में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी अकेले मेमोरी चिप्स की ही होती है।

निर्माताओं की रणनीति में बदलाव और मॉडलों की संख्या में कटौती

रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि "लो-एंड फोन्स की कीमतों में करीब 30% की वृद्धि नई खरीदारी को रोक सकती है या ग्राहकों को सेकंड-हैंड सस्ते फोन खरीदने के लिए प्रेरित कर सकती है।" इससे यह साफ होता है कि कंपोनेंट लागत में बढ़ोतरी सीधे तौर पर ग्राहकों के खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करेगी।

लागत के इस बड़े बोझ को संतुलित करने के लिए स्मार्टफोन कंपनियां अब कम कीमत वाले वेरिएंट्स की संख्या घटाने और अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को सीमित करने जैसे कड़े कदम उठा सकती हैं।

ग्लोबल शिपमेंट में 15 प्रतिशत की भारी गिरावट का अंदेशा

कच्चे माल की बढ़ती लागत का असर वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट पर भी गहरा दिखाई देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, शिपमेंट में सालाना 15 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इससे कुल शिपमेंट CY26 में घटकर 1,067 मिलियन यूनिट और CY27 में महज 911 मिलियन यूनिट रह जाने का अनुमान है। हालांकि CY26 और CY27 के लिए शिपमेंट अनुमानों को क्रमशः 5 फीसदी और 3 फीसदी का मामूली अपग्रेड दिया गया है, लेकिन वैश्विक बाजार का कुल परिदृश्य कमजोर ही बना हुआ है।

प्रीमियम फोनों का दबदबा बढ़ेगा, बजट सेगमेंट में ऐतिहासिक गिरावट

सबसे बड़ा नुकसान किफायती (Affordable) स्मार्टफोन सेगमेंट को उठाना पड़ेगा। ग्लोबल मार्केट में सस्ते फोनों की हिस्सेदारी CY25 के 42 प्रतिशत से गिरकर CY26 में महज 24 प्रतिशत पर सिमटने की आशंका है। इसके ठीक विपरीत, 600 डॉलर (लगभग 50,000 रुपये) से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन्स का बाजार में दबदबा बढ़ेगा और इनकी हिस्सेदारी इसी अवधि में 29 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो सकती है।

सेमीकंडक्टर की कमी और पुराने प्रोसेसर का सहारा

सप्लाई-चेन में लगातार बना तनाव इस संकट को और गहरा कर रहा है, जहां सेमीकंडक्टर चिप्स की किल्लत सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। लागत पर लगाम लगाने के लिए स्मार्टफोन निर्माता अब नवीनतम फ्लैगशिप प्रोसेसर्स के बजाय एक से दो साल पुरानी चिप्स का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं।

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि भले ही CY28 से स्मार्टफोन की मांग में तेजी से रिकवरी आ जाए, लेकिन अगर निर्माताओं ने मौजूदा मंदी के दौरान अपनी उत्पादन क्षमता कम कर दी, तो उद्योग के लिए शिपमेंट के पुराने स्तर को वापस हासिल करना बेहद मुश्किल होगा।
(इनपुट: ANI)

यह भी पढ़ें: NSE Q2 FY27 Results: एनएसई का मुनाफा 23% बढ़कर ₹2,578 करोड़ हुआ, खर्चों में भारी गिरावट से बढ़ा मार्जिन

Related to this topic: