प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

रिजर्व बैंक का इंडस्ट्रियल आउटलुक सर्वे जारी

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत मांग की उम्मीद, इनपुट लागत की चिंता बरकरार: RBI

RBI के सर्वे के अनुसार, लागत का दबाव रहने के बावजूद Q3FY27 में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत मांग और बेहतर व्यावसायिक गतिविधियों की उम्मीद है।

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत मांग की उम्मीद इनपुट लागत की चिंता बरकरार rbi

Representative image |

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने तिमाही 'इंडस्ट्रियल आउटलुक सर्वे' (IOS) के 115वें दौर के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस ताजा सर्वे के मुताबिक, कच्चे माल की लागत का दबाव उच्च बने रहने के बावजूद चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3FY27) में देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग और उत्पादन की स्थिति मजबूत रहने की उम्मीद है। यह सर्वे जुलाई से सितंबर 2026 के बीच देश भर की 1,224 विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) कंपनियों के फीडबैक पर आधारित है।

Q2FY27 में मांग और व्यावसायिक गतिविधियों में सुधार

बीती तिमाही (Q2FY27) के दौरान, बेहतर उत्पादन, मजबूत ऑर्डर बुक और क्षमता उपयोग (कैपेसिटी यूटिलाइजेशन) में बढ़ोतरी के सहारे देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग की स्थिति में पिछली तिमाही के मुकाबले साफ सुधार दर्ज किया गया। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि कच्चे माल की लागत का दबाव अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, जबकि बिक्री मूल्य को लेकर कारोबारी धारणा में थोड़ी नरमी देखने को मिली है।

सर्वे के निष्कर्षों में कहा गया, "कच्चे माल की लागत का दबाव ज़्यादा बना रहा, जबकि बिक्री की कीमतों को लेकर धारणा में नरमी देखी गई।" इस सकारात्मक रुख के बीच, व्यावसायिक आकलन सूचकांक (BAI - Business Assessment Index) पहली तिमाही (Q1FY27) के 100.4 अंक से सुधरकर दूसरी तिमाही (Q2FY27) में 104.4 अंक पर पहुंच गया, जो समग्र व्यावसायिक माहौल में सुधार का पुख्ता संकेत देता है।

Q3FY27 के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का अनुमान

आगामी तीसरी तिमाही (Q3FY27) को लेकर विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियां काफी आशावादी नजर आ रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस दौरान उत्पादन, ऑर्डर बुक, क्षमता उपयोग और निर्यात (एक्सपोर्ट) के मोर्चे पर और बेहतरी आएगी। हालांकि, इनपुट कॉस्ट का दबाव आगे भी बरकरार रहने की पूरी संभावना है, जिसका असर बिक्री की कीमतों और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भी पड़ सकता है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार, "लागत का दबाव ज़्यादा बने रहने की उम्मीद है और बिक्री की कीमतों तथा प्रॉफ़िट मार्जिन को लेकर भी धारणा ऐसी ही है।" इसी के साथ, केंद्रीय बैंक के इस तिमाही कंपोजिट इंडिकेटर यानी बिजनेस एक्सपेक्टेशन्स इंडेक्स (BEI) में भी सुधार दर्ज किया गया है, जो उद्योग जगत के मजबूत कारोबारी भरोसे को रेखांकित करता है।

लंबी अवधि का सकारात्मक दृष्टिकोण

कंपनियों को यह उम्मीद भी है कि चौथी तिमाही (Q4FY27) और आगामी वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY28) में भी मांग की यह स्वस्थ स्थिति लगातार बनी रहेगी। इस दौरान कुल कारोबारी माहौल, उत्पादन, ऑर्डर बुक और क्षमता उपयोग का दृष्टिकोण सकारात्मक रहने के आसार हैं। हालांकि, लागत का दबाव बने रहने के कारण कंपनियों को मजबूरन बढ़ी हुई लागत का बोझ उत्पाद के दाम बढ़ाकर ग्राहकों तक पहुंचाना (पास-थ्रू) पड़ सकता है।

सर्वे की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया, "इनपुट कॉस्ट का दबाव बने रहने की संभावना है, साथ ही बिक्री की कीमतों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।" उल्लेखनीय है कि आरबीआई द्वारा किया गया यह 115वां सर्वे जुलाई से सितंबर 2026 के बीच संचालित किया गया था, जिसमें देश की कुल 1,224 मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने अपने व्यावसायिक अनुभवों और भविष्य की उम्मीदों को साझा किया है।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

यह भी पढ़ें: RBI Rural Survey: महंगाई की चिंता के बीच ग्रामीण भारत को बेहतर भविष्य की उम्मीद, जानें RBI सर्वे के मायने

Related to this topic: