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2026 का दूसरा सबसे गर्म जुलाई, बढ़ा समुद्री तापमान

2026 का दूसरा सबसे गर्म जुलाई, समुद्र का बढ़ता तापमान बना चिंता का कारण

जुलाई 2026 जलवायु इतिहास का दूसरा सबसे गर्म जुलाई रहा, जबकि यूरोप में भीषण गर्मी-सूखे और कई देशों में बाढ़ ने तबाही मचाई।

2026 का दूसरा सबसे गर्म जुलाई समुद्र का बढ़ता तापमान बना चिंता का कारण

2026 Sees Second-Hottest July, Rising Sea Temperatures Alarm Experts |

नई दिल्ली: धरती का बढ़ता तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस की लक्ष्मण रेखा के करीब पहुंच गया है। यूरोप में भीषण गर्मी और सूखे ने हालात बिगाड़ दिए हैं, जबकि भारत सहित कई देशों में बाढ़ ने आम लोगों की जिंदगी और उनकी महीनों की मेहनत को तबाह कर दिया है। जलवायु इतिहास में जुलाई 2026 दूसरा सबसे गर्म जुलाई दर्ज किया गया है। हालांकि, इससे पहले जलवायु इतिहास का सबसे गर्म जुलाई 2023 में दर्ज किया गया था।

तपने लगी धरती, जुलाई ने बनाया गर्मी का नया रिकॉर्ड

आंकड़ों को देखें तो ऐसा नहीं है कि केवल वातावरण में हवा का ही तापमान बढ़ रहा है, बल्कि इसके साथ ही समंदर के सीने में भी आग धधक रही है। ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़ दें तो दुनिया भर के महासागरों में सतह का औसत तापमान (SST) जुलाई 2026 में 20.96 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जुलाई के महीने के लिए इतिहास का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके साथ ही समुद्र के बढ़ते तापमान ने 2023 में दर्ज 20.89 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है।

अल नीनो ने बढ़ाई वैश्विक तपन की चिंता

वैज्ञानिकों के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में दस्तक दे चुके अल नीनो ने इस वैश्विक तपन को और भड़का दिया है, जिसके आने वाले महीनों में स्थिति और खतरनाक हो सकती है। इस दौरान अटलांटिक तट और पश्चिमी भूमध्य सागर में रिकॉर्ड तोड़ तपन देखी गई। इसके चलते कई इलाकों में समुद्री लू की गंभीर स्थिति बन गई, जिसका सीधा असर तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय समुदायों पर पड़ रहा है। सच कहें तो यह संकेत है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब पृथ्वी के हर कोने में और अधिक स्पष्ट तथा गंभीर होता जा रहा है।

यूरोप में बढ़ती गर्मी ने मचाई तबाही

रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि पश्चिमी यूरोप के लिए जून और जुलाई 2026 अब तक के सबसे गर्म दो महीने साबित हुए हैं। इस दौरान क्षेत्र में मई के बाद तीसरी और चौथी लू दर्ज की गई। हालांकि जून के मुकाबले जुलाई में गर्मी कुछ कम रही, लेकिन लगातार कई महीनों तक लू का बने रहना अपने आप में असाधारण घटना है। जून-जुलाई में पश्चिमी यूरोप का औसत तापमान 21.62 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.79 डिग्री सेल्सियस अधिक है। यह इस अवधि के लिए तापमान का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है और इसने 2022 के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

फ्रांस से ब्रिटेन तक सामान्य से ऊपर रहा तापमान

फ्रांस, स्पेन, इंग्लैंड और आयरलैंड समेत पश्चिमी यूरोप के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा। इसके उलट पूर्वी यूरोप और स्कैंडिनेविया के बड़े हिस्से में तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। पूरे यूरोप में औसत जमीनी तापमान की बात करें तो जुलाई में यह 20.49 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.66 डिग्री अधिक है और जुलाई के इतिहास में 11वां सबसे गर्म रहा।

कहीं सूखा, कहीं बाढ़—दुनिया में दिखा मौसम का रौद्र रूप

यूरोप में समस्या सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं रही। मई और जून से जारी सूखा जुलाई में और गंभीर हो गया। फ्रांस, स्पेन, जर्मनी के कुछ हिस्सों और ब्रिटेन में बारिश और मिट्टी में मौजूद नमी में असाधारण कमी दर्ज की गई। बता दें कि जब मिट्टी सूखती है तो वह प्राकृतिक रूप से वातावरण को ठंडा करने की अपनी क्षमता खो देती है। ऐसे में गर्मी जमीन में ज्यादा देर तक बनी रहती है और तापमान तेजी से बढ़ सकता है। यही गर्मी और सूखे का खतरनाक चक्र जंगलों की आग के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करता है।

जंगलों की आग ने बढ़ाया प्रदूषण का खतरा

पश्चिमी यूरोप में जुलाई के दौरान जंगलों में लगी आग का असर जले क्षेत्र और उत्सर्जन, दोनों के लिहाज से असाधारण रहा। जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्म और शुष्क मौसम अब दक्षिणी यूरोप में बड़ी और ज्यादा तीव्र जंगलों की आग के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर रहा है। जंगलों में बड़े पैमाने पर लगी आग सिर्फ वन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती। आग जितनी बड़ी होती है, उससे उतना ज्यादा धुआं पैदा होता है और धुआं वातावरण में ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसके बाद तेज हवाएं इसे सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर तक ले जा सकती हैं। इसका मतलब है कि जिन देशों में जंगल में आग की घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं, वहां भी दूर-दराज के देशों से आया धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

लंबा हो रहा आग का मौसम

कॉपरनिकस एटमॉस्फियर मॉनिटरिंग सर्विस के निदेशक लॉरेंस रुइल के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन अब ऐसे गर्म और शुष्क हालात को बढ़ा रहा है, जो जंगलों में बड़ी और भीषण आग के लिए जिम्मेदार हैं। आग का मौसम लंबा होने के साथ उसका असर भी व्यापक क्षेत्र में फैल रहा है। रिपोर्ट से पता चला है कि यूरोप के सूखे इलाकों में सिर्फ जंगल ही प्रभावित नहीं हुए। सीन, राइन और डेन्यूब समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर सामान्य से बहुत नीचे चला गया। इससे कई देशों में पीने के पानी की आपूर्ति, सिंचाई, नदी परिवहन, जलीय पारिस्थितिकी और बिजली उत्पादन पर भी दबाव बढ़ा है।

गर्मी और सूखा एक-दूसरे को बना रहे हैं और खतरनाक

पश्चिमी और मध्य यूरोप के बड़े हिस्सों में जुलाई में मिट्टी की नमी 2022 की तुलना में भी काफी कम रही। बता दें कि 2022 में पश्चिमी यूरोप ने गंभीर सूखे का सामना किया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, मिट्टी में नमी की कमी और बढ़ता तापमान एक-दूसरे को और गंभीर बनाते हैं। सूखी मिट्टी गर्मी को कम करने की अपनी प्राकृतिक क्षमता खो देती है, जिससे तापमान बढ़ता है और बढ़ी हुई गर्मी मिट्टी को और तेजी से सुखाती है। यह चक्र आने वाले समय में यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों के लिए बड़ी जलवायु चुनौती बन सकता है।

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