मिडिल ईस्ट में बरकरार भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का असर रसोई के बजट पर भी पड़ सकता है।
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बरकरार भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का असर रसोई के बजट पर भी पड़ सकता है। कमर्शियल कुकिंग गैस के दामों में भारी बढ़ोतरी के बाद अब खाद्य तेल (एडिबल ऑयल) की कीमतों में भी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी
इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के दाम में आई तेजी को माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण सनफ्लावर और पाम ऑयल की कीमतों में उछाल देखा गया है।
तेल के दाम में बढ़ोतरी
सनफ्लावर ऑयल की कीमतें 150-155 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 170-175 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। हालांकि भारतीय खुदरा बाजार में अभी तक उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है और कंपनियां फिलहाल बढ़ी लागत का बोझ खुद उठा रही हैं।
आयात पर निर्भर भारत
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% खाद्य तेल और 80% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। देश में पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कुल खपत करीब 2.5-2.6 करोड़ टन है।
लागत में तेज इजाफा
एक साल में पाम ऑयल की लैंडेड लागत 14 फीसदी, सोयाबीन तेल की 20% और सूरजमुखी तेल की 17% तक बढ़ चुकी है। इससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है।
कंपनियों पर बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 17 फीसदी से ज्यादा बढ़ी हैं, जबकि घरेलू बाजार में सूरजमुखी तेल की कीमतों में केवल 7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में कंपनियों पर दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है। इस बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के पार पहुंच गया है। इससे आयात लागत, ढुलाई खर्च और कंपनियों की मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।
दाम बढ़ने के संकेत
सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में खाद्य तेलों की कीमतों में 5-6 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। मार्च में अमेरिका-ईरान तनाव के बाद कंपनियों ने थोक कीमतों में 3-5 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद खुदरा बाजार में भी दाम बढ़े थे। पश्चिम एशिया और लाल सागर में तनाव के कारण जहाज भाड़ा बढ़ा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है और कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
बायोडीजल की बढ़ती मांग
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से कई देश पाम ऑयल का इस्तेमाल बायोडीजल बनाने में बढ़ा देते हैं, जिससे इसकी उपलब्धता घटती है और कीमतें और बढ़ जाती हैं।
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