अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि हम सब एक पवित्र भूमि पर एकत्रित हुए हैं. स्वतंत्रता से पहले कोई भी यहां अपनी मर्जी से नहीं आता था.
अमित शाह बोले - सबसे पहले अंडमान-निकोबार को ही आजाद कराया गया था, यह तपोभूमि |
Amit Shah : अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि हम सब एक पवित्र भूमि पर एकत्रित हुए हैं. स्वतंत्रता से पहले कोई भी यहां अपनी मर्जी से नहीं आता था, जिन्हें भी यहां लाया जाता था, उनका परिवार उन्हें भूल जाता था. उस दौर में कोई यह नहीं सोचता था कि 'काला पानी' में सजा काटने के बाद कोई वापस लौट भी सकता है. विनायक दामोदर सावरकर की कविता 'सागर प्राण तलमलाला' के 115 साल पूरे होने पर गृह मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम को संबोधित किया. अंडमान में वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया.

अमित शाह ने कहा कि जब तक वे लौटते, उनका शरीर, मन और आत्मा इतनी कमजोर हो जाती थी कि वे कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते थे, लेकिन आज, यह सभी भारतीयों के लिए एक तीर्थस्थल है, क्योंकि वीर सावरकर ने अपने जीवन के सबसे कठिन वर्ष यहीं बिताए. यहां कई लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया. मैंने सेलुलर जेल के रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया है, केवल दो ही ऐसे प्रांत हैं, जिनके स्वतंत्रता सेनानियों को यहां फांसी नहीं दी गई.
'आजाद हिंद फौज ने सबसे पहले अंडमान-निकोबार को ही आजाद कराया..'
उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ा अवसर है. इस 'तपोभूमि' पर वीर सावरकर की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण मोहन भागवत ने किया, जो उस संगठन के सरसंघचालक हैं, जो सही मायने में सावरकर की विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है. यह एक पवित्र भूमि है, वीर सावरकर की प्रतिमा भी पवित्र है और मोहन भागवत के हाथों से इसका अनावरण और भी श्रेष्ठ है.
अमित शाह ने कहा कि जब आजाद हिंद फौज ने भारत को आजाद कराने का प्रयास किया तो सबसे पहले अंडमान-निकोबार को ही आजाद कराया. यहां सुभाष चंद्र बोस दो दिन तक रुके थे. बोस ने ही इन दोनों द्वीपों को शहीद और स्वराज नाम देने का सुझाव दिया था। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमीन पर उतारा.
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