मुंबई। देश में बैंक कर्ज देते समय ग्राहको पर अब साथ में बीमा पालिसी या म्यूचुअल फंड खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे।
मुंबई। देश में बैंक कर्ज देते समय ग्राहको पर अब साथ में बीमा पालिसी या म्यूचुअल फंड खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 'लोन के साथ बीमा' जैसी बंडलिंग मार्केटिंग पालिसी पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ी पहल की है। बैंक ग्राहकों की सबसे बड़ी शिकायतों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने "मिस-सेलिंग" रोकने के लिए कड़े ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इसमें रिफंड, बंडलिंग और इंसेंटिव को लेकर नये दिशानिर्देश जारी किये गये हैं। इनका उल्लंघन करने पर आरबीआई बैंकों पर हर्जाना और जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
मिस-सेलिंग पर RBI का ड्राफ्ट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों में 'मिस-सेलिंग' (गलत तरीके से उत्पाद बेचना) की संस्कृति को खत्म करने के लिए बुधवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आरबीआई ने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री के लिए नए मसौदा निर्देश जारी किए हैं। इसमें साफ प्रस्ताव दिया गया है कि बैंकों को ऐसी किसी भी प्रोत्साहन संरचना से बचना चाहिए, जो कर्मचारियों को ग्राहकों को गलत उत्पाद बेचने के लिए प्रेरित करती हो। आरबीआई ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा फाइनेंशियल प्रोडक्ट और सर्विसेज के एड, मार्केटिंग और सेल्स के लिए अपने ड्राफ्ट संशोधन निर्देशों में यह भी प्रस्ताव दिया कि बैंक ग्राहकों से उनकी सहमति प्राप्त करने के बाद ही संपर्क करें। मालूम हो कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कुछ दिनों पूर्व इस तरह के विनियमों को लाने की मंशा जाहिर की थी। इसके बाद यह ड्राफ्ट जारी किया गया है। आम जनता और हितधारकों को इस मसौदे पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए 4 मार्च तक का समय दिया गया है।
टार्गेट सेलिंग पर लगेगी रोक
नए ड्राफ्ट में आरबीआई ने बैंकों के लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कहा है कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी नीतियां और प्रथाएं न तो मिस-सेलिंग के लिए प्रोत्साहन पैदा करें और न ही कर्मचारियों या डायरेक्ट सेल्स एजेंटों (डीएसए) को उत्पादों की बिक्री को 'पुश' करने के लिए प्रोत्साहित करें। बैंक कर्मचारियों के बीच अक्सर ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट बेचने की होड़ लगी रहती है। इसके तहत ग्राहकों को बीमा पॉलिसी और अन्य उत्पादरलेने को मजबूर किया जाता है। आरबीआई ने इस पर नकेल कसते हुए कहा है कि बिजनेस यूनिट्स के बीच बिक्री के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित करना या 'टार्गेटेड सेलिंग' के लिए विशिष्ट दिन तय करना जैसी प्रथाएं बंद होनी चाहिए। इसके अलावा, ड्राफ्ट में यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स (जैसे म्यूचुअल फंड या बीमा) बेचने वाले कर्मचारियों को उस तीसरी पार्टी से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई इंसेंटिव नहीं मिलना चाहिए।
लोन के साथ बंडलिंग पर रोक
ग्राहकों की सबसे बड़ी शिकायत 'बंडलिंग' को लेकर होती है, जहां बैंक लोन के साथ जबरदस्ती कोई अन्य प्रोडक्ट बेच देते हैं। आरबीआई के प्रस्ताव के मुताबिक, बैंकों को किसी भी थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट या सर्विस को अपने खुद के प्रोडक्ट के साथ बंडल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। केंद्रीय बैंक ने जोर देकर कहा है कि ग्राहक को विभिन्न कंपनियों के विकल्पों में से अपनी पसंद का प्रोडक्ट चुनने का अधिकार दिया जाना चाहिए। इस ड्राफ्ट का सबसे कड़ा पहलू जवाबदेही तय करना है। आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि जिन मामलों में मिस-सेलिंग साबित हो जाएगी, वहां बैंकों को उत्पाद या सेवा की खरीद के लिए ग्राहक द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि वापस करनी होगी। इतना ही नहीं, बैंक को एक स्वीकृत पॉलिसी के तहत मिस-सेलिंग के कारण हुए किसी भी नुकसान के लिए ग्राहक को हर्जाना भी देना होगा।
डार्क पैटर्न पर RBI सख्त
डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों को भ्रमित करने वाली तकनीकों पर भी आरबीआई ने दिशानिर्देश जारी किये हैं। इसके तहत बैंक ग्राहकों को कॉल तभी कर सकेंगे जब उन्होंने इसकी सहमति दी हो। ऐसी प्रमोशनल कॉल्स केवल ऑफिस के कामकाज के घंटों के दौरान ही किए जा सकेंगे। आरबीआई ने बैंकों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके यूजर इंटरफेस (ऐप या वेबसाइट) में किसी भी तरह के 'डार्क पैटर्न' का इस्तेमाल न हो। ड्राफ्ट में ऐसे लगभग एक दर्जन मामलों को सूचीबद्ध किया गया है जिनसे बैंकों को बचना चाहिए। आरबीआई का यह कदम बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो ग्राहकों को न केवल अनचाहे उत्पादों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बैंकों की जवाबदेही भी तय होगी। अब गेंद बैंकों के पाले में है कि वे अपनी कार्यप्रणाली को कैसे सुधारते हैं।
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