सीबीआई का दावा है कि NEET-UG 2026 परीक्षा के प्रश्न पत्रों को लीक करने वाले नेटवर्क ने परीक्षा से पहले प्रश्न पत्रों को प्रसारित करने के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम और डिजिटल फाइलों का इस्तेमाल किया।
नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरोप लगाया है कि NEET-UG 2026 परीक्षा का पेपर लीक एक व्यापक डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से किया गया था। परीक्षा से कुछ दिन पहले ही गोपनीय प्रश्नपत्र व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इलेक्ट्रॉनिक फाइलों के जरिए साजिश में शामिल लोगों के बीच कर दिया गया था।
CBI ने आरोप पत्र में दावा करते हुए कहा...
राउज़ एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई न्यायालय में दायर आरोप पत्र में सीबीआई ने दावा किया है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच में चैट, पीडीएफ दस्तावेज, प्रश्नपत्रों की तस्वीरें और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनकी मदद से जांचकर्ताओं ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के विषय विशेषज्ञों से लेकर मध्यस्थों और अंततः उम्मीदवारों तक लीक हुई परीक्षा सामग्री के कथित प्रवाह का पुनर्निर्माण किया।
टेलीग्राम पर हुई बातचीत मिली
सीबीआई के अनुसार, आरोपी यश यादव के मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण से लीक हुए NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र वाली पीडीएफ फाइलें और एपी ब्रोकर के रूप में सहेजे गए एक संपर्क के साथ टेलीग्राम पर हुई बातचीत मिली, जिसकी पहचान बाद में जांच के दौरान सह-आरोपी शुभम मधुकर खैरनार के रूप में हुई। सीबीआई का आरोप है कि इन डिजिटल रिकॉर्ड से परीक्षा आयोजित होने से पहले ही गोपनीय परीक्षा सामग्री के हस्तांतरण की पुष्टि होती है।
कई बिचौलियों के माध्यम से पहुंचे लीक हुए प्रश्न पत्र
चार्जशीट में आगे कहा गया है कि जांचकर्ताओं ने अन्य आरोपियों के उपकरणों से भी व्हाट्सएप बातचीत और डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। तलाशी के दौरान आरोपी मनीषा संजय वाघमारे से जब्त किए गए मोबाइल फोन में कथित तौर पर 'NEET 2026' शीर्षक वाला एक व्हाट्सएप ग्रुप मिला, जिसे सीबीआई साजिशकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किए गए संचार नेटवर्क का हिस्सा मानती है। एजेंसी का आरोप है कि डिजिटल सबूतों से पता चला है कि लीक हुए प्रश्न पत्र एनटीए विशेषज्ञों से सीधे उम्मीदवारों तक नहीं पहुंचे, बल्कि कई बिचौलियों के माध्यम से पहुंचे।
बड़ी रकम चुकाने पर जताई गई सहमति
जांच के अनुसार, गोपनीय सामग्री कथित तौर पर विषय विशेषज्ञों से निजी ऑपरेटरों और दलालों तक पहुंची और फिर उन उम्मीदवारों तक पहुंची जिन्होंने बड़ी रकम चुकाने पर सहमति जताई थी। सीबीआई ने गवाहों के बयानों की पुष्टि करने और आरोपियों के बीच संचार स्थापित करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन की एक्सट्रैक्शन रिपोर्ट और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच पर भी भरोसा किया है। जांचकर्ताओं का दावा है कि ये इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जांच के दौरान कई गवाहों द्वारा वर्णित बैठकों और आदान-प्रदान के समय से मेल खाते हैं।
अन्य दस्तावेजों का भी किया गया था आदान-प्रदान
चार्जशीट के अनुसार, जांच में यह भी पता चला कि लीक हुए प्रश्न पत्रों की डिलीवरी के बाद किए गए भुगतान की सुरक्षा के रूप में नेटवर्क के सदस्यों के बीच मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, खाली हस्ताक्षरित चेक और अन्य दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया था। एजेंसी ने इन बरामदगी को रिसाव के पीछे कथित वाणिज्यिक समझौते के पुख्ता सबूत के रूप में माना है।
13 आरोपियों पर लगे गंभीर आरोप
डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयानों और बरामदगी के आधार पर सीबीआई ने तीन एनटीए द्वारा नियुक्त विषय विशेषज्ञों सहित 13 आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों से निवारण) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ उसके मामले का एक महत्वपूर्ण आधार है।
(इनपुट: ANI)
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