दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और दिल्ली सरकार से एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा है।
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और दिल्ली सरकार से एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गैर-डेयरी उत्पादों को पनीर बताकर बेचा और परोसा जा रहा है, जबकि उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक संरचना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया। इसमें राष्ट्रीय राजधानी में गैर-डेयरी उत्पादों को असली पनीर बताकर बेचे जाने से रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।
ग्राहकों को असली पनीर की जानकारी नहीं मिलने का दावा
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि होटल और रेस्तरां में पनीर का व्यंजन ऑर्डर करने वाले ग्राहक स्वाभाविक रूप से दूध से बने उत्पाद की उम्मीद करते हैं। हालांकि, उनके पास यह जानने का कोई प्रभावी तरीका नहीं होता कि व्यंजन में असली पनीर इस्तेमाल किया गया है या गैर-डेयरी सामग्री से बना कोई विकल्प। वकील ने तर्क दिया, “यह नकली हो सकता है। यह पनीर जैसा दिखता और स्वाद देता है। इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती है और न ही इसे जानने या पता लगाने का कोई तरीका है।”
खाद्य सुरक्षा नियमों का दिया हवाला
जब पीठ ने पूछा कि किन वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो याचिकाकर्ताओं के वकील ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 का हवाला दिया। ये विनियम खाद्य उत्पादों और उनमें इस्तेमाल होने वाले अवयवों के मानक निर्धारित करते हैं। वकील ने तर्क दिया कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि पनीर के नाम पर बेचा या परोसा जा रहा उत्पाद दूध के बजाय अन्य अवयवों से बनाया गया है। याचिका में असली पनीर और कुछ गैर-डेयरी विकल्पों के पोषण संबंधी अंतर को लेकर भी चिंता जताई गई है।
नवरात्रि और दशहरा के दौरान जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं ने नवरात्रि और दशहरा के त्योहारों के दौरान खाद्य उत्पादों के नमूने लेने और निरीक्षण करने के लिए अंतरिम निर्देश देने की मांग की है। इन त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की खपत और उनकी गुणवत्ता को लेकर विशेष सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। जनहित याचिका में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और इसके तहत दिल्ली में लागू नियमों व विनियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें उपभोक्ताओं को पनीर के रूप में बेचे या परोसे जाने वाले उत्पादों की वास्तविक प्रकृति के बारे में गुमराह होने से बचाने के लिए सख्त निरीक्षण, परीक्षण और कार्रवाई की मांग की गई है।
होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले विकल्पों पर चिंता
याचिकाकर्ताओं ने होटल, रेस्तरां, भोजनालयों और अन्य खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों में डेयरी विकल्पों के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले अवयवों की पर्याप्त जानकारी ग्राहकों को नहीं दी जाती है। याचिका में सभी डेयरी एनालॉग उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं की गई है। इसके बजाय, गैर-डेयरी उत्पादों को पारंपरिक दूध से बने पनीर के रूप में कथित तौर पर भ्रामक तरीके से पेश करने के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
(एएनआई)
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