दिल्ली हाईकोर्ट ने श्रमिकों की कम आय और शारीरिक श्रम को सम्मान न मिलने पर चिंता जताई। अदालत ने वीर पाल की सजा तीन साल कर दी।
नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि देश में श्रमिकों को सबसे कम पारिश्रमिक मिलता है और उनके शारीरिक श्रम को महत्व एवं सम्मान देने में समाज नाकाम रहा है। अदालत की यह टिप्पणी एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई के दौरान आई, जिसने एक श्रमिक पर हमला करने के मामले में अपनी सजा को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने दोषी वीर पाल की सजा को हत्या की कोशिश के अपराध से बदलकर खतरनाक हथियारों से जान-बूझकर चोट पहुंचाने के अपराध में बदल दिया। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों से हत्या की कोशिश का अपराध साबित करने के लिए जरूरी इरादा सामने नहीं आया।
पांच साल की सजा घटाकर तीन साल की
उच्च न्यायालय ने वीर पाल की पांच साल की जेल की सजा को घटाकर तीन साल कर दिया। यह मामला उस समय का है जब पीड़ित व्यक्ति सोने की कोशिश कर रहा था और उसने दोषी एवं अन्य लोगों द्वारा किए जा रहे शोर-शराबे पर आपत्ति जताई थी। न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने 18 सितंबर को पारित अपने निर्णय में श्रमिकों की परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद शरीर को फिर से ऊर्जावान करने के लिए रात में अच्छी और सुकून भरी नींद की जरूरत होती है।
शारीरिक श्रम को सम्मान देने में समाज नाकाम
अदालत ने कहा, यह देश में श्रमिकों की एक आम और कभी न खत्म होने वाली स्थिति बन गई है और जले पर नमक छिड़कने वाली बात यह है कि इस वर्ग को सबसे कम वेतन मिलता है, उनकी सबसे कम सुध ली जाती है और सबसे कम परवाह की जाती है। उच्च न्यायालय ने कहा कि यह बहुत ही दुखद स्थिति है कि हमारा समाज शारीरिक श्रम को सम्मान और महत्व देने में नाकाम रहा है, जबकि पश्चिमी देशों में शारीरिक श्रम के लिए उचित पारिश्रमिक मिलता है और महत्व दिया जाता है।
2002 में लाजपत राय बाजार में हुआ था हमला
यह घटना 17 मार्च 2002 की रात हुई थी। पीड़ित राजिंदर कुमार चांदनी चौक के लाजपत राय बाजार में उस दुकान के बरामदे में सोने ही वाले थे या सो रहे थे, जहां वह काम करते थे। अदालत के मुताबिक, पाल और अन्य लोगों के शोर-शराबे से राजिंदर कुमार परेशान हो गए और उन्होंने उनसे ऐसा व्यवहार न करने का आग्रह किया। इससे वीर पाल भड़क गया और उसने पीड़ित को धक्का देकर एक धारदार हथियार से हमला कर दिया।
रापी से किया गया था हमला
अदालत ने पाया कि वीर पाल ने राजिंदर कुमार को घायल करने के लिए ‘रापी’ का इस्तेमाल किया था। ‘रापी’ मोची द्वारा चमड़ा काटने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला औजार है। अधीनस्थ अदालत ने वीर पाल को दोषी करार देते हुए पांच साल कैद की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय ने अब अपराध की प्रकृति और मामले के तथ्यों को देखते हुए सजा को तीन साल कर दिया।
यह भी पढ़ें: बरेली में दरवाजा खोलने के विवाद में पड़ोसन ने महिला पर किया हमला, दांत से काटी उंगली