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कस्टम की सुस्ती पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

सामान जब्त कर डिमेरेज चार्ज वसूलना सजा जैसा, दिल्ली हाईकोर्ट की कस्टम विभाग को कड़ी फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि कस्टम विभाग द्वारा जब्त सामान के मामलों में जानबूझकर या लापरवाही से की जाने वाली देरी को यात्रियों के लिए सजा का जरिया नहीं बनाया जा सकता है।

सामान जब्त कर डिमेरेज चार्ज वसूलना सजा जैसा दिल्ली हाईकोर्ट की कस्टम विभाग को कड़ी फटकार

Delhi High Court (File Photo) |

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम अधिकारियों द्वारा जब्त सामान से जुड़े मामलों के निपटारे में हो रही लंबी देरी पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने साफ किया है कि इस तरह की कार्यशैली से यात्रियों को ऐसी सजा भुगतनी पड़ती है जिसका कोई औचित्य नहीं होता, जबकि गोदामों में सामान सड़ता रहता है और उन पर डिमेरेज चार्ज यानी भारी भरकम विलंब शुल्क लगातार बढ़ता जाता है।

मामले की पृष्ठभूमि और कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

यह पूरा मामला नियामत खान द्वारा कमिश्नर ऑफ कस्टम्स (IGI एयरपोर्ट) और अन्य के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा है। जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि कस्टम द्वारा जब्त किया गया सामान बिना किसी फैसले के महीनों या सालों तक गोदामों में धूल फांकता रहता है। कोर्ट ने कहा कि कई बार यात्री भारत के स्थायी निवासी भी नहीं होते, ऐसे में विभाग की ओर से मामलों के निपटारे में भारी सुस्ती और तत्परता की साफ कमी दिखाई देती है।

डिमेरेज चार्ज की दोहरी मार और कानूनी पेच

अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यात्रियों की मुश्किलें तब और अधिक बढ़ जाती हैं जब उन पर डिमेरेज शुल्क लगातार लगते रहते हैं। ये शुल्क न केवल मूल आदेश पारित होने तक लागू रहते हैं, बल्कि अगर विभाग मामले को आगे की अपीलीय या पुनरीक्षण (रिविजनल) स्टेज तक ले जाता है, तो यह बोझ और भी ज्यादा बढ़ जाता है। 

सुनवाई के दौरान कस्टम विभाग की तरफ से यह दलील दी गई कि जनवरी 2025 में जब्त सामान के संबंध में अगस्त 2025 में नोटिस जारी कर सितंबर के लिए व्यक्तिगत सुनवाई तय की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता के पेश न होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नवंबर 2025 में याचिका तैयार होने और फरवरी 2026 में नोटिस जारी होने के बाद भी विभाग इस बात से वाकिफ था कि कार्यवाही लंबित है।

एकसमान प्रक्रिया और कड़े निर्देशों की तैयारी

अदालत ने इस व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया है। पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों के त्वरित और निष्पक्ष निपटारे के लिए एकसमान निर्देश और सुसंगत प्रक्रिया बनाई जानी चाहिए। शुरुआत में कोर्ट मुख्य सीमा शुल्क आयुक्त को अदालत में तलब करने पर विचार कर रहा था, लेकिन विभाग के अनुरोध पर उन्हें तीन सप्ताह के भीतर हलफनामे के जरिए विस्तृत निर्देश दाखिल करने की मोहलत दी गई है। 

साथ ही, मुख्य आयुक्त को यह छूट दी गई है कि वे विभिन्न हवाई अड्डों और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन से लंबित मामलों और जब्ती की तारीखों का डेटा जुटाकर एक सैंपल के रूप में अदालत के सामने पेश करें। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 27 नवंबर 2026 को होगी।
(इनपुट: ANI)

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