दिल्ली हाई कोर्ट ने यासीन मलिक की वर्चुअल पेशी न होने पर तिहाड़ जेल सुपरिटेंडेंट से रिपोर्ट मांगी है। NIA ने टेरर फंडिंग केस में उम्रकैद को मौत की सजा में बदलने की अपील की है।
नई दिल्ली (भारत)। दिल्ली हाई कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराए गए कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश नहीं होने पर तिहाड़ जेल के सुपरिटेंडेंट से रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की उस अपील पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया गया, जिसमें मलिक की उम्रकैद की सजा को मौत की सजा में बदलने की मांग की गई है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की पीठ ने जेल अधिकारियों से मलिक की गैर-मौजूदगी का कारण बताने को कहा है।
अगली सुनवाई पर वर्चुअली पेश करने का निर्देश
हाई कोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित जेल सुपरिटेंडेंट इस मामले में रिपोर्ट पेश करें। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख पर यासीन मलिक को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल कराया जाए। पीठ ने कहा, "इस मामले में संबंधित जेल सुपरिटेंडेंट से रिपोर्ट मांगी जाए। अगली तारीख पर, प्रतिवादी (यासीन मलिक) को कार्यवाही में वर्चुअली शामिल कराया जाएगा।"
NIA ने कहा- मलिक खुद करना चाहता था बहस
NIA की ओर से पेश हुए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अक्षय मलिक ने अदालत को बताया कि यासीन मलिक ने इस मामले में खुद बहस करने की इच्छा जताई थी। हाई कोर्ट फिलहाल एजेंसी की उस याचिका पर विचार कर रहा है, जिसमें टेरर फंडिंग मामले में मलिक को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को मौत की सजा में बदलने की मांग की गई है। मलिक इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहा है।
राजनीतिक नेताओं से संपर्क के दावे पर NIA की आपत्ति
हाई कोर्ट में दाखिल विस्तृत जवाबी हलफनामे में NIA ने कहा है कि भारत के कई प्रधानमंत्रियों के साथ कामकाजी संबंध होने और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं से बातचीत करने के मलिक के दावे आपराधिक कार्यवाही के लिए अप्रासंगिक हैं। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे दावे सजा में नरमी बरतने का आधार नहीं बन सकते। NIA ने यह भी आरोप लगाया है कि मलिक पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं, जिनमें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति शामिल हैं, के संपर्क में था और उसने इन संपर्कों का इस्तेमाल भारत से जम्मू-कश्मीर को अलग करने के प्रचार के लिए किया।
NIA ने दावों को बताया सहानुभूति हासिल करने की कोशिश
जांच एजेंसी का कहना है कि राजनीतिक नेताओं, नौकरशाहों और अन्य सार्वजनिक हस्तियों का उल्लेख करके मलिक जनता की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रहा है। NIA के अनुसार, इन दावों का उन अपराधों पर कोई असर नहीं पड़ता, जिनमें मलिक को दोषी ठहराया गया है। एजेंसी ने तर्क दिया है कि राजनीतिक संपर्कों का हवाला देने से आपराधिक जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती और न ही साबित हुए अपराधों की गंभीरता कम होती है।
छह सरकारों के साथ कामकाजी संबंध होने का दावा
यासीन मलिक ने दावा किया था कि 1990 के बाद से छह सरकारों के साथ उसके कामकाजी संबंध रहे हैं। उसने पूर्व प्रधानमंत्रियों वीपी सिंह, चंद्रशेखर, पीवी नरसिम्हा राव, एचडी देवेगौड़ा, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकारों का उल्लेख किया था। मलिक के अनुसार, तत्कालीन सरकारों ने उसे कश्मीर, क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा, तरक्की और शांति से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए कई बार बुलाया था। उसने यह भी दावा किया था कि उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया था।
अलगाववादी संगठनों और आतंकी फंडिंग की साजिश का आरोप
NIA के मुताबिक, उसकी जांच में अलगाववादी नेताओं और हिज्बुल मुजाहिदीन तथा लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जुड़ी एक बड़ी साजिश का पता चला है। एजेंसी का आरोप है कि इस साजिश का उद्देश्य भारत सरकार के खिलाफ जंग छेड़ना और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हवाला जैसे गैरकानूनी तरीकों से धन जुटाना था। NIA ने यह भी आरोप लगाया है कि जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के एक गुट के प्रमुख के तौर पर मलिक ने अलगाववादी विचारधारा फैलाने और उग्रवादी समूहों के साथ संबंध बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
अप्रैल 2019 में गिरफ्तार हुआ था यासीन मलिक
यासीन मलिक को अप्रैल 2019 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया। मलिक ने ट्रायल कोर्ट के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिसके बाद उसे सभी आरोपों में दोषी ठहराया गया। अब NIA हाई कोर्ट में उसकी उम्रकैद की सजा को मौत की सजा में बदलने की मांग कर रही है। (Source: ANI)
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