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विरोध-प्रदर्शनों से ₹400 करोड़ व्यापार घाटा

दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से 10 दिनों में ₹4,000 करोड़ का व्यापार खतरे में पड़ सकता है: CAIT

CAIT महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से रोजाना ₹400 करोड़ से अधिक का कारोबार खतरे में पड़ सकता है। 10 दिनों में यह आंकड़ा ₹4,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से 10 दिनों में ₹4000 करोड़ का व्यापार खतरे में पड़ सकता है cait

Delhi Protests May Put ₹4,000 Crore Trade at Risk in 10 Days: CAIT |

नई दिल्ली (भारत)। नई दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के बढ़ते असर पर चिंता जताते हुए चांदनी चौक से भाजपा सांसद और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अगर ये रुकावटें लंबे समय तक जारी रहती हैं, तो दिल्ली में रोजाना ₹400 करोड़ से अधिक का कारोबार खतरे में पड़ सकता है। उनके अनुमान के मुताबिक, 10 दिनों में इसका कुल असर ₹4,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा संभावित कारोबारी जोखिम को दर्शाता है, न कि वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आकलन।

दिल्ली में रोजाना ₹2,200 करोड़ का होता है कारोबार

प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि दिल्ली में प्रतिदिन औसतन लगभग ₹2,200 करोड़ का कारोबार होता है। ऐसे में व्यावसायिक गतिविधियों में मामूली गिरावट भी बड़े पैमाने पर कारोबार को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुमान के अनुसार, कारोबार में 10 प्रतिशत की गिरावट आने पर रोजाना ₹220 करोड़, 15 प्रतिशत की गिरावट पर ₹330 करोड़ और 20 प्रतिशत की गिरावट पर ₹440 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने आशंका जताई कि यदि रुकावटें लगातार बनी रहती हैं, तो 10 दिनों में संभावित कारोबारी असर ₹4,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

कारोबार पर असर के आंकड़े अनुमान पर आधारित

खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि कारोबार से जुड़े ये आंकड़े संभावित जोखिम का अनुमान हैं। इन्हें वास्तविक आर्थिक नुकसान का निश्चित हिसाब-किताब नहीं माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि विरोध-प्रदर्शनों के लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में कारोबारी गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसलिए इन आंकड़ों को संभावित प्रभावित कारोबार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि वास्तविक नुकसान के अंतिम आंकड़े के रूप में।

मौलिक अधिकारों के साथ व्यापार के अधिकार का भी ध्यान जरूरी

खंडेलवाल ने संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। वहीं, अनुच्छेद 19(1)(g) किसी भी पेशे को अपनाने या व्यापार और कारोबार करने का अधिकार देता है, जिस पर संविधान के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के इस्तेमाल के दौरान दूसरे नागरिकों के अधिकारों और उनके वैध हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

विरोध-प्रदर्शनों से बाजारों और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है असर

खंडेलवाल के मुताबिक, विरोध-प्रदर्शनों का आर्थिक प्रभाव केवल उन स्थानों तक सीमित नहीं रहता, जहां प्रदर्शन हो रहे होते हैं। ट्रैफिक जाम, ग्राहकों की संख्या में कमी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स में रुकावट तथा बाजारों तक पहुंचने में कठिनाई से व्यापार प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, कारोबारी घंटों में कटौती और सामान की आवाजाही में देरी भी व्यावसायिक गतिविधियों पर असर डालती है। उन्होंने कहा कि ये सभी परिस्थितियां मिलकर दिल्ली के आपस में जुड़े कारोबारी नेटवर्क को प्रभावित कर सकती हैं।

अक्टूबर से जनवरी तक का कारोबारी सीजन महत्वपूर्ण

मौजूदा कारोबारी सीजन का उल्लेख करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि अक्टूबर से जनवरी तक का समय भारत के व्यापारी समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान प्रमुख त्योहारों, शादियों की खरीदारी और उपभोक्ताओं के अधिक खर्च के कारण कारोबारी गतिविधियां अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इस अवधि में आने वाली रुकावटों का असर केवल कुछ बाजारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मौसमी कमाई, रोजगार, व्यापार के प्रति भरोसे और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

दिल्ली के बाजारों का देशभर के व्यापार से जुड़ाव

खंडेलवाल ने कहा, "दिल्ली सिर्फ़ देश की राजधानी ही नहीं है, बल्कि यह थोक वितरण, खुदरा व्यापार और व्यावसायिक गतिविधियों के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है। यहाँ के बाज़ार पूरे भारत के निर्माताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को आपस में जोड़ते हैं। इसलिए, दिल्ली में किसी भी तरह की लंबी रुकावट का असर सप्लाई चेन, व्यावसायिक लेन-देन और आजीविका पर पड़ता है, जो शहर की सीमाओं से कहीं दूर तक महसूस किया जाता है।"

विरोध-प्रदर्शनों के बीच सामान्य जनजीवन बनाए रखने की अपील

खंडेलवाल ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के दौरान आम जनजीवन और आर्थिक गतिविधियों में अनावश्यक रुकावट न आए। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन के दौरान बाजारों तक पहुंच, सामान की आवाजाही और नागरिकों की आजीविका सुरक्षित रखने पर जोर दिया। उनके अनुसार, ऐसा संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, जिसमें शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान हो और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों।

विरोध और व्यापार के अधिकारों में संतुलन जरूरी: खंडेलवाल

खंडेलवाल ने कहा, "विरोध करने का अधिकार और व्यापार करने का अधिकार, दोनों ही एक स्वस्थ लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। एक अधिकार की रक्षा करने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि दूसरे अधिकार की अनदेखी कर दी जाए। व्यापक जनहित यही मांग करता है कि एक ज़िम्मेदार रवैया अपनाया जाए, जिसमें लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति, कानून के शासन, आर्थिक गतिविधियों और लाखों लोगों की आजीविका - इन सभी का उचित सम्मान हो।" उन्होंने दोहराया कि लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान करते हुए आर्थिक गतिविधियों, नागरिकों की आजीविका और व्यापारिक हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। (Source: ANI)

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