कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह तड़के से ही श्रद्धालु हर की पैड़ी और गंगा के अन्य घाटों पर स्नान, दान और पूजा
घने कोहरे में शुरू हुआ मकर संक्रांति स्नान पर्व
कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच मकर संक्रांति के पावन अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह तड़के से ही श्रद्धालु हर की पैड़ी और गंगा के अन्य घाटों पर स्नान, दान और पूजा के लिए पहुंचने लगे।
ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह
भीषण ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। लोग गंगा में आस्था की डुबकी लगाते नजर आए। घाटों पर मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और गंगा आरती का आयोजन किया गया।
देव डोलियों के साथ गंगा स्नान
इस अवसर पर ढोल और दमाऊं की थाप के बीच देव डोलियों को घाटों तक लाया गया। परंपरा के अनुसार देव डोलियों का भी गंगा में स्नान कराया गया, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
संक्रांति और एकादशी का शुभ संयोग
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का विशेष संयोग बन रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा शुभ संयोग 23 वर्षों बाद बना है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बुधवार दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करेंगे, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है।
उत्तरायण काल का विशेष महत्व
उत्तरायण काल में पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य देना और दान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है।
सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग
इस दिन सुबह 7 बजकर 31 मिनट से रात 3 बजकर 04 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़, अन्न और वस्त्र दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में दान-पुण्य भी किया।
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