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लड़ाकू बेड़े की चुनौतियों पर रखी बात

वायु सेना प्रमुख एपी सिंह का बयान: 'ड्रोन क्रांतिकारी नहीं, बल्कि विकासवादी हैं'

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि ड्रोन सुरक्षा बल के लिए क्रांतिकारी नहीं बल्कि विकासवादी हैं।

वायु सेना प्रमुख एपी सिंह का बयान ड्रोन क्रांतिकारी नहीं बल्कि विकासवादी हैं

Indian Air Force Chief Air Chief Marshal Amar Preet Singh |

नई दिल्ली (भारत)। भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को ड्रोन और पांचवीं पीढ़ी के विमानों की चुनौती पर अपने विचार रखते हुए, भारतीय वायु सेना के वार्षिक प्रेस सम्मेलन में बल की प्राथमिकताओं और चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ड्रोन बल के लिए "क्रांतिकारी" नहीं बल्कि "विकासवादी" हैं और एक अलग ड्रोन बल के गठन की संभावना को खारिज करते हुए जोर दिया कि मानवरहित प्रणालियां और मंडराने वाले बम अन्य हथियारों और प्लेटफार्मों के साथ एकीकृत होने पर अधिक प्रभावी होंगे।

ड्रोन भारतीय वायु सेना के लिए क्रांतिकारी नहीं, बल्कि विकासवादी

राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय वायु सेना के वार्षिक प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा कि ड्रोन क्षमताएं दशकों से भारतीय वायु सेना के भीतर मौजूद हैं और अब इनकी संख्या, प्रकार और क्षमताओं का विस्तार किया जा रहा है। सिंह ने कहा, "ड्रोन भारतीय वायु सेना के लिए क्रांतिकारी नहीं, बल्कि विकासवादी हैं। हम ड्रोन और मंडराने वाले बमों की संख्या बढ़ा रहे हैं। क्या हमें एक अलग ड्रोन बल की आवश्यकता है, मुझे ऐसा नहीं लगता। वे एक ही व्यवस्था का हिस्सा होने चाहिए, और हमें मिलकर काम करना होगा।" उन्होंने कहा कि विभिन्न हथियार प्रणालियों को अलग-थलग रहकर काम नहीं करना चाहिए और वांछित युद्धक्षेत्र प्रभाव प्राप्त करने के लिए समन्वित अभियानों की आवश्यकता पर जोर दिया।

अलग से ड्रोन बल बनाने के बारे में नहीं सोचा

उन्होंने कहा, “इन्हें अन्य हथियारों के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि वे वांछित प्रभाव ला सकें। हम एक प्रकार के हथियार को कहीं अलग और दूसरे प्रकार के हथियार को कहीं अलग से संचालित नहीं कर सकते। इसलिए हमने अलग से ड्रोन बल बनाने के बारे में नहीं सोचा है।” सिंह ने बताया कि भारतीय वायु सेना के पास पहले से ही ऐसी क्षमताओं से निपटने वाली विशेष इकाइयाँ हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा, “लॉइटर गोला-बारूद ने हमें अराजकता पैदा करने और कुछ रक्षा प्रणालियों को नष्ट करने में मदद की।” उन्होंने दोहराया कि ड्रोन और लॉइटर गोला-बारूद दशकों से भारतीय वायु सेना की क्षमताओं का हिस्सा रहे हैं।

लड़ाकू विमानों की संख्या और चल रहे अधिग्रहण कार्यक्रमों पर बात

सिंह ने कहा, “इसलिए, अगर मैं कहूँ कि ड्रोन भारतीय वायु सेना के लिए क्रांतिकारी नहीं हैं; हाँ, वे क्रमिक विकास हैं। इसलिए, हम ड्रोनों की संख्या, लॉइटर गोला-बारूद की संख्या और ड्रोनों के प्रकार और लॉइटर गोला-बारूद के प्रकार में वृद्धि कर रहे हैं।” भारतीय वायु सेना प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब आधुनिक सैन्य अभियानों में मानवरहित हवाई प्रणालियों और लोइटरिंग मुनिशन्स (एलआईएस) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बल का दृष्टिकोण इन प्रणालियों को एक स्वतंत्र हथियार के रूप में संचालित करने के बजाय अन्य हथियारों के साथ एकीकृत करना है। सिंह ने भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की संख्या और चल रहे अधिग्रहण कार्यक्रमों पर भी बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि बल के विमानों की संख्या घट रही है और कहा कि नियोजित विमानों की भर्ती में देरी से भारतीय वायु सेना प्रभावित हुई है।

रूस ने Su-57 के निर्यात की पेशकश की

उन्होंने कहा, “यह तथ्य सभी को ज्ञात है कि हमारी संख्या घट रही है; जिन विमानों को आना था, जिन पर हम निर्भर थे, वे भी धीरे-धीरे आ रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना मौजूदा और संभावित कमियों को दूर करने के लिए तेजस मार्क-1ए, मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) और भविष्य के मार्क-2 लड़ाकू विमान जैसे प्लेटफार्मों पर विचार कर रही है। सिंह ने यह भी कहा कि यदि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम में और देरी होती है, तो भारतीय वायु सेना को अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है, साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि रूस ने Su-57 की पेशकश की है।

रक्षा कार्यक्रमों में मौजूदा देरी काफी ज्यादा 

उन्होंने आगे कहा कि तेजस लड़ाकू विमान के एमके-1ए संस्करण की डिलीवरी में उम्मीद से ज्यादा देरी हो रही है, और संकेत दिया कि भारतीय वायु सेना मौजूदा क्षमता संबंधी कमियों को दूर करने के लिए विमान के एमके-2 संस्करण पर भी विचार कर रही है। एलसीए एमके-1ए की डिलीवरी में देरी के लिए क्या हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को जुर्माना भरना पड़ेगा, इस सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि रक्षा कार्यक्रमों में देरी हो सकती है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मौजूदा देरी काफी ज्यादा है। भारतीय वायु सेना प्रमुख ने कहा, “ऐसा होता है कि आप कोई योजना बनाते हैं, लेकिन उसमें देरी हो जाती है। लेकिन इस बार देरी बहुत ज्यादा हुई है। हम मार्क 2 पर भी विचार कर रहे हैं। ये सभी मौजूदा कमियों को पूरा करने में सक्षम होंगे।”

भारत में चल रही स्वदेशी परियोजनाओं को गिनाया

उन्होंने विशेष रूप से एमके-1ए और एमके-2 वेरिएंट सहित एलसीए कार्यक्रम और उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम का उल्लेख किया, साथ ही रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता के प्रयासों के तहत चल रही स्वदेशी परियोजनाओं को भी गिनाया। स्वदेशी कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, “हमारी भागीदारी निरंतर है और हम पूरा समर्थन दे रहे हैं।”

(इनपुट: ANI)

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