मतदाता सूची में फर्जी या थोक आपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने के आवेदनों पर नई और सख्त सीमाएं तय कर दी हैं।
नई दिल्ली (भारत)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को एक आधिकारिक निर्देश जारी किया है कि वे मतदाता सूची में शामिल या शामिल किए जाने के लिए प्रस्तावित नामों पर आपत्ति दर्ज करने के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-7 आवेदनों को व्यक्तिगत रूप से दाखिल करने पर सख्त सीमाएं लगाएं, ताकि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग रोका जा सके।
बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आपत्तियां दर्ज
यह निर्णय उन बार-बार सामने आए मामलों के कारण लिया गया है, जिनमें व्यक्तिगत मतदाताओं ने निराधार आधारों पर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आपत्तियां दर्ज कराईं। इस प्रथा के कारण उन वास्तविक मतदाताओं को गंभीर असुविधा हुई जिनके नामों पर आपत्ति जताई गई थी, साथ ही जमीनी स्तर के चुनाव कर्मचारियों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ भी पड़ा। मतदाता पंजीकरण नियम (आरईआर), 1960 के नियम 13(2) के तहत, फॉर्म 7 के माध्यम से आपत्ति या नाम हटाने का अनुरोध केवल वही व्यक्ति प्रस्तुत कर सकता है जो उस विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत हो। ऐसे प्रत्येक आवेदन की निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा अनिवार्य रूप से जांच की जानी आवश्यक है।
नियमों में पहले स्पष्ट ऑफ़लाइन संख्यात्मक सीमाएं
जबकि राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के लिए विशिष्ट थोक फाइलिंग सीमाएं निर्धारित हैं, एसआईआर अवधि के दौरान मसौदा प्रकाशन से पहले प्रति दिन 50 फॉर्म और उसके बाद प्रति दिन 10 फॉर्म तक, व्यक्तिगत मतदाताओं के लिए नियमों में पहले स्पष्ट ऑफ़लाइन संख्यात्मक सीमाएं नहीं थीं। मतदाता सूची नियमावली, 2023 के तहत मौजूदा दिशानिर्देशों में सामूहिक नामांकन पर रोक लगाई गई थी और यदि कोई व्यक्ति 5 से अधिक मामलों में आपत्ति जताता था तो मतदाता सूची अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत सत्यापन अनिवार्य था। हालांकि, ऑफ़लाइन सामूहिक नामांकन जमा करने की सीमा मतदाता सूची अधिकारी के विवेक पर छोड़ दी गई थी, जिससे प्रशासनिक भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए व्यक्तिगत आवेदनों को विनियमित करने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
व्यक्तिगत आवेदन की नई सीमाएँ (ऑनलाइन और ऑफलाइन):
दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान, प्रत्येक मतदाता द्वारा पूरी अवधि में अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जा सकेंगे। सतत अद्यतन अवधि के दौरान, प्रत्येक मतदाता द्वारा प्रति माह अधिकतम 5 फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जा सकेंगे। सत्यापन और हस्ताक्षर संबंधी आवश्यकताएँ (नियम 17, आरईआर 1960): निर्धारित अवधि, प्रपत्र या तरीके से दाखिल न किए गए आवेदनों को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा। प्रपत्र में पूर्ण विवरण होना चाहिए और उस पर आपत्तिकर्ता के मूल हस्ताक्षर होने चाहिए। हस्ताक्षर मुहर का उपयोग करना सख्त वर्जित है। ईआरओ को आवेदक की पहचान की प्रामाणिकता सत्यापित करने के लिए मतदाता सूची से मिलान करना होगा।
सुनवाई एवं विवाद निपटान प्रक्रिया (नियम 19 एवं 20, आरईआर 1960):
किसी आपत्ति का निपटारा करने से पहले, ईआरओ को आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी करना होगा, उनसे व्यक्तिगत रूप से बात करनी होगी और प्रस्तुत किए गए प्रत्येक फॉर्म-7 के लिए अलग-अलग बयान दर्ज करने होंगे। यदि ईआरओ वैधता से संतुष्ट है, तो अंतिम आदेश पारित करने से पहले आपत्तिकर्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा। यदि किसी सूचना अधिकारी (ईआरओ) को शिकायत झूठी या मनगढ़ंत लगती है, तो आवेदक के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत जानबूझकर झूठे बयान या घोषणाएं करने के लिए कार्रवाई शुरू की जाएगी।
भारत निर्वाचन आयोग के अवर सचिव संदीप कुमार द्वारा जारी निर्देश
ये निर्देश भारत निर्वाचन आयोग के अवर सचिव संदीप कुमार द्वारा जारी किए गए हैं। पत्र सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को संबोधित है। कार्यान्वयन संबंधी विवरण के अनुसार, सीईओ को सभी ईआरओ, सहायक ईआरओ (एईआरओ) और फील्ड अधिकारियों को तत्काल अनुपालन के लिए सूचित करने और व्यापक जन जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। पत्र की प्रतियां डीजी (IIIDEM), सीनियर डीईसी (MG), सीनियर डीईसी (PKS), डीईसी (YB), डीजी (मीडिया), डीजी (IT), डीडीजी (कानून), निदेशक (SS), और सभी निदेशकों, प्रधान सचिवों और सचिवों को भेजी गई हैं।
(इनपुटः ANI)
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