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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 5वें महीने घटा

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में लगातार पांचवें महीने गिरावट

मुंबई। प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) की तरह ही भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी हाल के महीनों में गिरावट आयी है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में लगातार पांचवें महीने गिरावट

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मुंबई। प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) की तरह ही भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में भी हाल के महीनों में गिरावट आयी है। इसका मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती, और निवेशकों द्वारा पूंजी की तेजी से निकासी (Repatriation) को माना जा रहा है।

शुद्ध FDI प्रवाह में कमी

भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में शुद्ध FDI प्रवाह में भारी कमी आई है। जनवरी 2026 में लगातार पांचवें महीने भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में कमी आई है। इस दौरान बहिर्वाह अंतर्वाह से लगभग 1.4 अरब डॉलर अधिक रहा, जो तीन महीनों में सबसे अधिक है। आंकड़ों से पता चलता है कि इसका कारण यह था कि भारत में अंतर्वाह लगभग 7% कम हो गया जबकि देश से बाहर भेजी गई राशि लगभग दोगुनी हो गई।

जनवरी के आंकड़े क्या कहते हैं

जनवरी में शुद्ध एफडीआई (-) 1.39 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर में (-) 49.2 करोड़ डॉलर था। जनवरी में सकल एफडीआई की आवक 5.67 अरब डॉलर पर स्थिर रही, जबकि विदेशी निवेशकों द्वारा धन निकासी और विनिवेश बढ़े स्तर पर बना रहा और यह 4.92 अरब डॉलर रहा है। इससे शुद्ध आवक सीमित रही है। इस माह के दौरान भारत में प्रत्यक्ष निवेश 75 करोड़ डॉलर रहा है, जो दिसंबर के 2.54 अरब डॉलर से कम है।

भारतीय कंपनियों का विदेश निवेश बढ़ा

इस दौरान भारत की कंपनियों द्वारा विदेश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जनवरी में बढ़कर 2.14 अरब डॉलर रहा, जिससे शुद्ध आवक पर विपरीत असर पड़ा। वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल से जनवरी के दौरान शुद्ध एफडीआई 1.65 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 2.16 अरब डॉलर से कम है। इससे कुल मिलाकर शुद्ध आवक में कमी के संकेत मिलते हैं, जबकि सकल निवेश में बेहतर वृद्धि हुई है। इस अवधि के दौरान विदेश में करीब 75 प्रतिशत निवेश अमेरिका, सिंगापुर, ब्रिटेन और यूएई में हुआ है।

पोर्टफोलियो निवेश में भी निकासी

बहरहाल पोर्टफोलियो प्रवाह लगातार दबाव में बना हुआ है। जनवरी में शुद्ध पोर्टफोलियो निवेश में 1.92 अरब डॉलर की निकासी हुई है, जबकि दिसंबर में यह 4.22 अरब डॉलर थी।

फरवरी में और गिरावट

फरवरी 2026 में, भारत का कुल बाहरी FDI घटकर $2.76 बिलियन रह गया, जो पिछले वर्ष के इसी महीने में $4.30 बिलियन था। इसका बड़ा कारण विदेशी कंपनियों द्वारा अपना निवेश वापस ले जाना और भारतीय कंपनियों का बाहर निवेश (ODI) को माना जा रहा है।

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