देशभर में दुर्गा पूजा के उत्सव के साथ कई रचनात्मक पंडाल देखने को मिल रहे हैं। आयोजकों ने मंदिरों, हिंदू पौराणिक कथाओं और पारंपरिक कला से प्रेरणा लेकर आकर्षक पंडाल तैयार किए हैं।
नई दिल्ली: देशभर में दुर्गा पूजा के उत्सव के साथ कई रचनात्मक पंडाल देखने को मिल रहे हैं। आयोजकों ने मंदिरों, हिंदू पौराणिक कथाओं और पारंपरिक कला से प्रेरणा लेकर आकर्षक पंडाल तैयार किए हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति से लेकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भगवान नरसिम्हा पर आधारित पंडाल तक, इस वर्ष अलग-अलग शहरों में अनूठी थीम देखने को मिल रही हैं।
सिलीगुड़ी में राम मंदिर की प्रतिकृति बनी आकर्षण
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में शक्तिगढ़ उज्ज्वल संघ द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा पंडाल ने अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति से भक्तों और आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया है। लगभग 60 फीट ऊंची केसरिया रंग की यह संरचना त्योहार के दौरान लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। इस पंडाल का डिजाइन अयोध्या स्थित राम मंदिर से प्रेरित है, जो देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
वाराणसी में भगवान नरसिम्हा की थीम पर बना पंडाल
उत्तर प्रदेश के वाराणसी के सिगरा क्षेत्र में एक पंडाल भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिम्हा से प्रेरित है। इस कलाकृति में भगवान नरसिम्हा और राक्षस राजा हिरण्यकशिपु पर उनकी विजय की कहानी को दर्शाया गया है। हिंदू पौराणिक कथाओं में यह प्रसंग बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसी धार्मिक कथा को पंडाल की थीम के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं, ओडिशा में प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने पुरी बीच पर एक अनूठी कलाकृति बनाकर दुर्गा पूजा को खास बनाया है। मां दुर्गा को समर्पित इस कलाकृति में 22 सब्जियों और 10 फलों सहित कुल 32 प्रकार के फलों और सब्जियों का इस्तेमाल किया गया है। पटनायक ने प्राकृतिक उत्पादों के जरिए ऐसी कलाकृति तैयार की है, जो भक्ति के साथ प्रकृति की सुंदरता का संदेश भी देती है। इसके माध्यम से उन्होंने लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के रचनात्मक इस्तेमाल के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया है। इस तरह यह कलाकृति देवी को समर्पित श्रद्धांजलि के साथ पर्यावरण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश भी देती है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दुर्गा पूजा
दुर्गा पूजा सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है। इसे पश्चिम बंगाल और भारत के कई अन्य हिस्सों में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार देवी दुर्गा की राक्षस महिषासुर पर विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह उत्सव भव्य पंडालों, कलात्मक मूर्तियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पारंपरिक अनुष्ठानों और भक्ति संगीत के माध्यम से लोगों को एक साथ लाता है। महा सप्तमी, महा अष्टमी, महा नवमी और विजयदशमी इस उत्सव के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में शामिल हैं। धार्मिक अनुष्ठान दुर्गा पूजा का केंद्र बने हुए हैं, वहीं पंडालों की थीम भी उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। आयोजक वास्तुकला, पौराणिक कथाओं और विभिन्न कला रूपों से प्रेरणा लेकर ऐसे पंडाल तैयार करते हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राम मंदिर की प्रतिकृति, भगवान नरसिम्हा की कथा और फलों-सब्जियों से बनी मां दुर्गा की कलाकृति इस बात का उदाहरण हैं कि किस तरह रचनात्मकता, परंपरा और भक्ति मिलकर दुर्गा पूजा को और खास बना रहे हैं।
(एएनआई)
ये भी पढ़ें: अमेरिका में सांसद राजा कृष्णमूर्ति के कार्यालय में मिला संदिग्ध पैकेट, संघीय जांच शुरू