सोने-चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों का असर अब स्वास्थ्य क्षेत्र, विशेषकर आयुर्वेद पर पड़ रहा है। सोना, चांदी और मोती महंगे होने के कारण आयुर्वेदिक दवाओं के दाम में भी अब बढ़ोतरी होने लगी है।
भस्म युक्त दवाओं पर बढ़ती महंगाई का असर
सोने-चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों का असर अब स्वास्थ्य क्षेत्र, विशेषकर आयुर्वेद पर पड़ रहा है। सोना, चांदी और मोती महंगे होने के कारण आयुर्वेदिक दवाओं के दाम में भी अब बढ़ोतरी होने लगी है। देश की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में कई दवाओं के उत्पादन में स्वर्ण भस्म और रजत भस्म का उपयोग होता है। हाल के महीनों में सोना, चांदी और मोती की कीमतें बढ़ने से भस्म युक्त दवाएं काफी महंगी हो गई हैं। आयुर्वेदिक में कई दवाओं के उत्पादन में स्वर्ण भस्म और रजत भस्म का उपयोग होता है। खासकर कमजोरी दूर करने और शरीर को सशक्त बनाने वाली कई आयुर्वेदिक औषधियों में इनका प्रयोग जरूरी माना जाता है।
गंभीर बीमारियों के इलाज में होती हैं इस्तेमाल
हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र की समस्याओं, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में भी भस्म युक्त आयुर्वेदिक दवाएं प्रयोग में लाई जाती हैं। कीमती धातुओं के महंगे होने के कारण स्वर्ण और रजत भस्म से निर्मित लगभग 50 से अधिक आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री में 65 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में मरीजों को परेशानी हो रही है।
डॉक्टरों को बदलनी पड़ रही दवा
आयुर्वेदिक चिकित्सक अब महंगी भस्म वाली दवाओं के स्थान पर मजबूरी में बिना धातु और रत्न की भस्म वाली सामान्य आयुर्वेदिक दवाएं लिख रहे हैं स्वर्ण भस्म की कीमतों में बीते एक साल में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले इसकी कीमत 15 से 19 हजार रुपये प्रति ग्राम थी, जो अब बढ़कर 29 हजार रुपये तक पहुंच गई है वाराणसी बना स्वर्ण-रजत भस्म का बड़ा केंद्र उत्तर प्रदेश में वाराणसी में स्वर्ण और रजत भस्म का अच्छा-खासा कारोबार होता है। लहुराबीर, गुरुबाग, लंका और कबीरचौरा क्षेत्र के दवा बाजारों में इसके कई ब्रांड उपलब्ध हैं।
ब्रांड के अनुसार कीमतों में बड़ा अंतर
अलग-अलग दुकानों में स्वर्ण भस्म की कीमतों में काफी अंतर है। पतंजलि की एक ग्राम स्वर्ण भस्म करीब 19,450 रुपये में मिलती है, जबकि वैद्यनाथ की एक ग्राम स्वर्ण भस्म की कीमत लगभग 29,300 रुपये है। वहीं धूतपापेश्वर ब्रांड की स्वर्ण भस्म करीब 27 हजार रुपये में उपलब्ध है।
कम मात्रा, फिर भी बढ़ा आर्थिक दबाव
आयुर्वेद चिकित्सकों का कहना है कि स्वर्ण भस्म बहुत कम मात्रा में ली जाती है, आमतौर पर रोजाना 15 से 30 मिलीग्राम। कुल खर्च ज्यादा नहीं लगता, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी से मरीजों पर आर्थिक दबाव जरूर बढ़ा है। यही स्थिति चांदी से बनने वाली रजत भस्म की भी है।
सोने की कीमतों का सीधा असर लागत पर
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के एक चिकित्सक के अनुसार, स्वर्ण भस्म शुद्ध सोने से तैयार की जाती है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हैं, तो इसका सीधा असर दवा की लागत पर पड़ता है। स्वर्ण भस्म बनाने की प्रक्रिया बेहद जटिल और समय लेने वाली होती है।
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