वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में मार्च के महीने में लगभग नौ प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में मार्च के महीने में लगभग नौ प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यह तीसरा सबसे अधिक मासिक जीएसटी संग्रह है।
आयात से मिला बड़ा सहारा
जीएसटी संग्रह में वृद्धि का प्रमुख कारण आयात से जुड़े करों का मजबूत प्रदर्शन रहा है। मार्च में आयात से मिलने वाला सकल जीएसटी राजस्व सालाना आधार पर 17.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पूरे वर्ष में आयात आधारित कर संग्रह 14.1 प्रतिशत बढ़ा।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा संग्रह
केन्द्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में जीएसटी संग्रह में वार्षिक आधार पर 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करते हुए 2,00,064 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले 10 महीनों का उच्चतम स्तर है।
शुद्ध राजस्व में भी बढ़त
मार्च 2026 के लिए शुद्ध जीएसटी राजस्व 1,77,990 करोड़ रुपये रहा, जिसमें रिफंड को ध्यान में रखते हुए 8.2% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। तुलना करें तो मार्च 2025 में कुल जीएसटी संग्रह 1,83,845 करोड़ रुपये और फरवरी 2026 में 1,83,609 करोड़ रुपये रहा था।
वित्त वर्ष का प्रदर्शन
मार्च का जीएसटी संग्रह लगभग नौ प्रतिशत की वृद्धि के साथ दो लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यह तीसरा सबसे अधिक मासिक संग्रह है। पूरे वित्त वर्ष में जीएसटी संग्रह 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
घरेलू बिक्री और आयात का असर
टैक्स कलेक्शन में यह वृद्धि घरेलू बिक्री और आयात से कर संग्रह बढ़ने के कारण हुई। अप्रैल 2025 में अब तक का सबसे अधिक जीएसटी राजस्व 2.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया था, जबकि मई में यह 2.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।
रिफंड में भी बढ़ोतरी
मार्च में रिफंड जारी करने की प्रक्रिया में 13.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 22,074 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रिफंड को समायोजित करने के बाद, मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.2 प्रतिशत अधिक है।
राज्यों का प्रदर्शन अलग-अलग
महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों में कलेक्शन में मजबूत वृद्धि देखने को मिली है, जबकि हरियाणा, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में वृद्धि की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही।
विशेषज्ञों की राय
डेलाइट इंडिया के पार्टनर एमएस मणि के अनुसार, कर संग्रह के ये आंकड़े संकेत देते हैं कि देश में खपत का माहौल अभी भी मजबूत बना हुआ है।
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