IIT-BHU वाराणसी के 90 वैज्ञानिकों ने स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर रैंकिंग में जगह बनाकर इतिहास रचा। साथ ही संस्थान ने जर्मनी की BUW यूनिवर्सिटी के साथ वैश्विक अनुसंधान समझौता किया।
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-BHU) वाराणसी ने वैश्विक स्तर पर दोहरी सफलता हासिल की है। स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की प्रतिष्ठित 'विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों' की सूची-2026 में संस्थान के 90 शोधकर्ताओं ने जगह बनाई है। इसके साथ ही IIT-BHU ने जर्मन शैक्षणिक संस्थान के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग का विस्तार करते हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
स्टैनफोर्ड सूची में IIT-BHU का दबदबा
एल्सेवियर द्वारा 7 अक्टूबर 2026 को जारी डेटाबेस के अनुसार, IIT-BHU के 33 वैज्ञानिकों को 'करियर-लॉन्ग इम्पैक्ट' (जीवनपर्यंत शोध प्रभाव) श्रेणी में शामिल किया गया है, जबकि 57 शोधकर्ताओं को 'सिंगल-ईयर इम्पैक्ट' (एकल वर्ष 2025 प्रभाव) सूची में स्थान मिला है।
यह रैंकिंग स्कोपस (Scopus) साइटेशन आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें शोध पत्रों के उद्धरण, h-इंडेक्स और सह-लेखन जैसे मानकों का मूल्यांकन किया जाता है।
IIT (BHU) के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा, "यह उपलब्धि हमारी फैकल्टी के उच्चस्तरीय शोध और नवाचार के प्रति समर्पण का प्रमाण है। संस्थान की वैश्विक साख और अनुसंधान उत्कृष्टता को मजबूत करने के लिए मैं सभी चयनित शोधकर्ताओं को बधाई देता हूं।"
जर्मनी की BUW यूनिवर्सिटी के साथ बड़ा करार
वैश्विक रैंकिंग में सफलता के साथ ही, IIT-BHU ने जर्मनी की 'बर्गिशे यूनिवर्सिटैट वुपरताल' (BUW) के साथ अपने शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत किया है। 1 अक्टूबर को दोनों संस्थानों के बीच संस्थान-स्तरीय MoU का आदान-प्रदान हुआ।
पहले यह सहयोग केवल सिविल इंजीनियरिंग विभाग तक सीमित था, लेकिन अब 'स्पार्क' (SPARC) योजना के तहत इसे पूरे संस्थान के स्तर पर विस्तारित कर दिया गया है।
छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज को बढ़ावा
MoU का आदान-प्रदान IIT-BHU में आयोजित "पेवमेंट स्कैनिंग टेक्नोलॉजीज" पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान किया गया। इस कार्यशाला में BUW के प्रोफेसर पहिरंगन शिवपथम और 11 जर्मन छात्रों का प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है।
इस साझेदारी के तहत टिकाऊ बुनियादी ढांचे (Sustainable Infrastructure), सड़क इंजीनियरिंग, पर्यावरण चुनौतियों और उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों पर संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा। इससे स्नातकोत्तर छात्रों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी को एक-दूसरे के संस्थान में अध्ययन और शोध का अवसर मिलेगा।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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