भारत सरकार ने सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक और बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 आतंकियों को व्यक्तिगत तौर पर 'आतंकवादी' घोषित कर दिया है।
नई दिल्ली। भारत सरकार ने सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक और बड़ा और कड़ा प्रहार किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 आतंकियों को व्यक्तिगत तौर पर 'आतंकवादी' घोषित कर दिया है। ये सभी आतंकवादी जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जमात-उद-दावा (JuD), हरकत-उल-मुजाहिद्दीन (HuM), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं।
समझिए यूएएपीए (UAPA) की इस कार्रवाई की क्रोनोलॉजी
केंद्र सरकार की इस ताजा कार्रवाई के बाद देश के सबसे कड़े आतंकवाद विरोधी कानून UAPA के तहत व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित किए गए लोगों की कुल संख्या अब 80 तक पहुंच गई है। इन सभी 23 नए आतंकियों को यूएएपीए, 1967 की धारा 35 के तहत प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है और इनके नाम कानून की चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) में दर्ज किए गए हैं।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार के इरादे साफ कर दिए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि "मोदी सरकार भारत और उसके नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर एक आतंकी मॉड्यूल को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।"
पाकिस्तान और पीओके से भारत के खिलाफ साजिश
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, प्रतिबंधित किए गए इन 23 आतंकियों में से 17 पाकिस्तानी नागरिक हैं, जबकि 6 भारतीय मूल के हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा समय में ये सभी 23 आतंकी पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की धरती से बैठकर भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
यह सभी आतंकी भारत के खिलाफ विभिन्न मोर्चों पर सक्रिय रहे हैं। खुफिया इनपुट्स के अनुसार, ये लोग देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने, आतंकी हमलों को अंजाम देने, युवाओं को आतंक के लिए उकसाने, हथियारों की तस्करी, सीमा पार से घुसपैठ कराने, आतंकी संगठनों की मदद करने, फंड जुटाने और आतंकियों की नई भर्ती करने जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं।
ब्लैकलिस्ट किए गए आतंकियों की पूरी सूची
सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर आए जिन 23 आतंकियों को इस सूची में शामिल किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
मसूद इलियास कश्मीरी (जैश), मोहम्मद मुसादिक (जैश), मुफ्ती मोहम्मद असगर खान (जैश), हाफिज अब्दुल शकूर (जैश), अब्दुल्ला जिहादी (जैश), फिरदौस अहमद भट (लश्कर), गुलाम फरीद (जैश), आबिद कयूम लोन (लश्कर), हारून राशिद गनई (लश्कर), बिलाल अहमद मीर (लश्कर और टीआरएफ), नजीर अहमद गुर्जर (लश्कर), अब्दुल रऊफ (लश्कर, जेयूडी और एफआईएफ)।
इसके साथ ही सूची में अशफाक अहमद (जैश), हाफिज खालिद वलीद (लश्कर और जेयूडी), मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की (जैश), मौलाना सैफुल्लाह खालिद (लश्कर), मोहम्मद याकूब (लश्कर), मौलाना यूसुफ तैबी (लश्कर और जेयूडी), ओवैस फरूज (लश्कर), कारी याकूब शेख (जेयूडी), राणा इफ्तिखार (लश्कर और जेयूडी), वसीम नूर जट (जैश) और मोहम्मद शाहिद फैसल (लश्कर, अल-कायदा और आईएसआईएस) के नाम शामिल हैं।
प्रभाव विश्लेषण: इस फैसले का देश और आम जनता पर क्या असर होगा?
- देश की सुरक्षा पर असर: इस फैसले से सीमा पार बैठे आतंकियों की पहचान कानूनी स्तर पर पुख्ता होगी। इससे देश के भीतर उनके स्लीपर सेल्स को ध्वस्त करने और आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
- फंडिंग पर चोट: चौथी अनुसूची में नाम शामिल होने से इन आतंकियों की फंडिंग और हथियारों के नेटवर्क पर सीधी चोट पड़ेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन पर कानूनी शिकंजा कसेगा।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)
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