नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध ठप रहे। वर्तमान में, केवल दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच हॉटलाइन ही चालू है।
विक्टोरिया (सेशेल्स)। भारत ने इस्लामाबाद के साथ किसी भी तरह की राजनयिक सुलह की खबरों का खंडन किया है। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि इस तरह की बातचीत का नई दिल्ली के लिए न तो कोई आधिकारिक महत्व है न ही कोई मान्यता है।
अप्रैल 2025 में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी राज्य प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या के बाद दोनोंं देशों के रिश्ते बेहद ही नाजुक स्थति में पहुंच गए हैं। इसके जवाब में, भारत ने मई 2025 में "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों, ठिकानों और लॉन्चपैडों को निशाना बनाया गया था।
बोले, दोनों देशों के सैन्य महानिदेशकों के बीच हॉटलाइन ही चालू है
इन घटनाओं के बाद, नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध ठप रहे। वर्तमान में, केवल दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच हॉटलाइन ही चालू है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच अनौपचारिक गुप्त रूप से ट्रैक-2 कूटनीति तेज हो गई है, जो विवाद समाधान से हटकर संघर्ष प्रबंधन की ओर बढ़ रही है। इन रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि 2025 के अंत से ट्रैक-2 स्तर के कुछ प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित हुए होंगे। इन्ही चर्चाओं के बीच हाल ही में, ऐसी खबरें और दावे सामने आए हैं कि दोनों देशों के शीर्ष सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारियों और सत्ताधारियों के कुछ करीबी लोगों ने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में एक सुरक्षा सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी। हालांकि, एएनआई से बात करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इन मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है।
इस तरह के कार्यक्रम होते रहते हैं, लेकिन आधिकरिक कुछ भी नहीं
कोलंबो में हुई वार्ता के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव मिसरी ने एएनआई को बताया, "मैंने रिपोर्टें देखी हैं। मुझे इनकी जानकारी है। दुनिया भर में दर्जनों जगहों पर विभिन्न विषयों पर इस तरह के दर्जनों कार्यक्रम होते रहते हैं। इन कार्यक्रमों में कुछ भी नया या खास नहीं है। जहां तक हमारा सवाल है, ये निजी पार्टियों द्वारा आयोजित निजी कार्यक्रम हैं। हमारी नज़र में इनमें कुछ भी आधिकारिक नहीं है।" अनधिकृत गतिविधियों के खिलाफ भारत के स्पष्ट और सैद्धांतिक रुख को दोहराते हुए विदेश सचिव ने आगे कहा, "मैं पाकिस्तान सरकार की ओर से कुछ नहीं कह सकता, लेकिन जहां तक भारत सरकार का सवाल है, इन यात्राओं में हमारी कोई आधिकारिक भागीदारी, समर्थन या संलिप्तता नहीं है। भारत से जो भी इन कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं, चाहे वे सेवानिवृत्त राजनयिक हों, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हों या नागरिक समाज के सदस्य हों, जब वे ऐसी गतिविधियों में भाग लेते हैं, तो वे अपनी बात रखते हैं और अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। वे किसी भी तरह से भारत सरकार के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। हम वास्तव में इन कार्यक्रमों को कोई महत्व नहीं देते हैं। जहां तक हमारा सवाल है, इनका कोई खास महत्व नहीं है।" (एएनआई)