ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा है कि भारत चालू वित्त वर्ष में 6.5-7 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि दर्ज करने की राह पर है।
नई दिल्ली: ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा है कि भारत चालू वित्त वर्ष में 6.5-7 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि दर्ज करने की राह पर है। वहीं, नाममात्र GDP वृद्धि करीब 11-12 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉरपोरेट आय वृद्धि अगले वित्त वर्ष में 14 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
आर्थिक विकास में मजबूती बनी रहने की उम्मीद
जेफरीज ने कहा कि भू-राजनीतिक चुनौतियों और ऊर्जा से जुड़े बढ़ते जोखिमों के बावजूद भारत की संरचनात्मक विकास गाथा बरकरार है। आर्थिक संकेतक भी उम्मीद से अधिक लचीलापन दिखा रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, नाममात्र GDP वृद्धि में सुधार से आय वृद्धि में भी तेजी आने की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में आय वृद्धि 14 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
बैंक ऋण वृद्धि बनी अहम संकेतक
जेफरीज ने अर्थव्यवस्था की गति के प्रमुख संकेतक के रूप में मजबूत बैंक ऋण वृद्धि को रेखांकित किया है। अगस्त के अंत में बैंक ऋण में साल-दर-साल 19.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि जुलाई में कॉरपोरेट ऋण 21.6 प्रतिशत बढ़ा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को दिए गए ऋण में अगस्त में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, जमा में 17.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
निजी क्षेत्र के कैपेक्स में तेजी के संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि MSME ऋण में तेजी इस बात का संकेत हो सकती है कि हालिया GST और श्रम सुधारों के साथ-साथ कारोबार को आसान बनाने के प्रयासों का लाभ मिलना शुरू हो गया है। कॉरपोरेट ऋण में वृद्धि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय चक्र में संभावित सुधार की ओर भी इशारा करती है।
घरेलू मांग में भी मजबूती
जेफरीज के अनुसार, घरेलू मांग भी स्थिर बनी हुई है। अगस्त में GST प्राप्तियों में साल-दर-साल 14.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि 9.4 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी-मार्च में यह 1.8 प्रतिशत थी। देश के शीर्ष सात शहरों में आवासीय रियल एस्टेट की बिक्री 2026 के पहले सात महीनों में साल-दर-साल 7 प्रतिशत बढ़ी। इसके मुकाबले 2025 में बिक्री में 1 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
ऊर्जा कीमतों को लेकर जोखिम
जेफरीज ने कहा कि भारत का आर्थिक दृष्टिकोण मध्य पूर्व में होने वाले घटनाक्रमों, खासकर ऊर्जा कीमतों के लिहाज से, संवेदनशील बना हुआ है। रिपोर्ट तैयार किए जाने के समय ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 106 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी। प्रमुख तेल मार्गों पर व्यवधान से ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ रहा था।
रूस से सस्ता क्रूड खरीदने का जारी है सिलसिला
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारत ने रियायती दरों पर रूसी क्रूड की खरीद जारी रखकर और अमेरिकी ऊर्जा की खरीद बढ़ाकर अब तक ऊर्जा आपूर्ति में बड़े व्यवधानों से बचाव किया है। जेफरीज को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 2026 के अंत तक रेपो दर में 50 आधार अंकों की बढ़ोतरी करेगा। मौजूदा रेपो दर 5.25 प्रतिशत है।
(एएनआई)
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