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महंगी LNG के बावजूद भारत में गैस की मांग मजबूत

LNG की महंगाई से भारत में बढ़ सकता है गैस का खर्च, क्या सितंबर से बढ़ेंगी मुश्किलें?

भारत में LNG की महंगी स्पॉट कीमतों के बावजूद मांग मजबूत बनी हुई है। मध्य-पूर्व में लंबे आपूर्ति व्यवधान से कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे डाउनस्ट्रीम कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा।

lng की महंगाई से भारत में बढ़ सकता है गैस का खर्च क्या सितंबर से बढ़ेंगी मुश्किलें

Visuals from CNG station in Delhi (File Photo) |

नई दिल्ली। भारत में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की स्पॉट कीमतें अधिक होने के बावजूद मांग में मजबूती बनी हुई है। हालांकि, गैस की बढ़ती लागत से गैस कारोबार से जुड़ी डाउनस्ट्रीम कंपनियों (Downstream Players यानी गैस खरीदकर आगे बेचने या इस्तेमाल करने वाली कंपनियां) के मुनाफे का मार्जिन दबाव में आ सकता है। Equirus की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर से भारत में LNG की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

जुलाई में गैस खपत में LNG की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत

भारत के कुल गैस उपभोग में LNG आयात की हिस्सेदारी जुलाई 2026 में बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई। यह जुलाई 2021 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है, जब यह हिस्सेदारी 65 प्रतिशत थी। अप्रैल 2026 में LNG की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी। यानी अप्रैल से जुलाई के बीच इसमें 15 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। यह वह समय था जब युद्ध के कारण बाजार में गैस कीमतों का दबाव सबसे निचले स्तर पर था। देश में घरेलू गैस उत्पादन लगभग स्थिर रहने के कारण भारत महंगे अंतरराष्ट्रीय LNG बाजार पर काफी निर्भर है। Equirus ने कहा, "भारत स्पॉट LNG की ऊंची कीमतों के प्रति अब भी काफी अधिक जोखिम में है।"

दुनिया में LNG सप्लाई बढ़ेगी, लेकिन मध्य-पूर्व की बाधा भारी पड़ सकती है

वैश्विक स्तर पर मध्य-पूर्व के बाहर LNG निर्यात 2026 में साल-दर-साल करीब 40MT (मिलियन टन) बढ़ने की उम्मीद थी। इस बढ़ोतरी में खासतौर पर अमेरिका में शुरू हो रही और उत्पादन बढ़ा रही नई LNG परियोजनाओं की बड़ी भूमिका है। लेकिन Equirus के मुताबिक, अगर Shell के शुरुआती तीसरी तिमाही के समाधान वाले परिदृश्य को आधार माना जाए, तो मध्य-पूर्व से LNG निर्यात में करीब 45MT की गिरावट बाकी दुनिया से होने वाली अतिरिक्त सप्लाई की भरपाई से भी ज्यादा होगी। इसका नतीजा वैश्विक LNG निर्यात में करीब 5MT की शुद्ध कमी के रूप में सामने आ सकता है।

मध्य-पूर्व से LNG की आपूर्ति अभी सामान्य स्तर पर नहीं लौटी है। इसलिए जल्दी समाधान की संभावना वाली अवधि प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी है। इससे बाजार का अनुमान अब करीब एक साल तक व्यवधान बने रहने की ओर झुक गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, "एक साल तक चलने वाला व्यवधान LNG की नई सप्लाई की लहर पर भारी पड़ेगा।" ऐसी स्थिति में मध्य-पूर्व का LNG निर्यात 65MT से अधिक घट सकता है, जबकि दुनिया के बाकी हिस्सों से अतिरिक्त सप्लाई केवल करीब 40MT रहने का अनुमान है।

ग्लोबल LNG ट्रेड में 27MT तक की कमी संभव

Equirus ने कहा, "अगर यह लंबा व्यवधान जारी रहता है, तो वैश्विक LNG व्यापार करीब 27MT घट सकता है। यह शुरुआती समाधान वाले परिदृश्य की तुलना में करीब 22MT की अतिरिक्त गिरावट होगी। इसका मतलब है कि LNG सप्लाई की स्थिति में जिस राहत की उम्मीद की जा रही थी, वह 2027 तक टल सकती है। ऐसा तब भी हो सकता है जब उत्तरी अमेरिका में LNG की अतिरिक्त क्षमता उत्पादन शुरू कर दे।"

लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में यूरोप और एशिया के बीच अमेरिका से उपलब्ध लचीली LNG सप्लाई (Flexible US LNG यानी ऐसी गैस जिसे अलग-अलग बाजारों में भेजा जा सकता है) के लिए प्रतिस्पर्धा भी तेज हो सकती है। इससे सर्दियों के दौरान LNG की हाजिर कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।

भारत पर सीधा असर: मांग से ज्यादा लागत का दबाव?

भारत के लिए हालिया गैस खपत और आयात के आंकड़े बताते हैं कि LNG की मांग ऊंची बनी हुई है। Equirus ने कहा, "हालिया गैस खपत और आयात के आंकड़े बताते हैं कि 20 डॉलर प्रति mmbtu से अधिक की हाजिर कीमतों के बावजूद LNG की मांग मजबूत बनी हुई है।" रिपोर्ट के मुताबिक, निकट अवधि में इसका असर LNG की मात्रा में तुरंत तेज गिरावट के बजाय गैस की ऊंची लागत और डाउनस्ट्रीम कंपनियों के मार्जिन में कमी के रूप में दिखाई देने की संभावना ज्यादा है।

भारत में LNG की मांग और कीमतों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. भारत में LNG की मांग में अचानक बढ़ोतरी क्यों दर्ज की गई है?
जुलाई 2026 में कुल गैस उपभोग में LNG आयात की हिस्सेदारी बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई है, जो अप्रैल में 44 प्रतिशत थी। देश में घरेलू गैस उत्पादन लगभग स्थिर रहने के कारण भारत की निर्भरता महंगे अंतरराष्ट्रीय LNG बाजार पर लगातार बढ़ रही है।

2. ग्लोबल मार्केट में LNG की आपूर्ति प्रभावित होने की मुख्य वजह क्या है?
मध्य-पूर्व से LNG का निर्यात सामान्य स्तर पर नहीं लौट पाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य-पूर्व की बाधाओं के कारण वैश्विक स्तर पर करीब 45MT की गिरावट आ सकती है, जो बाकी दुनिया से मिलने वाली अतिरिक्त सप्लाई (लगभग 40MT) से भी ज्यादा है। इससे वैश्विक स्तर पर करीब 5MT की शुद्ध कमी हो सकती है।

3. स्पॉट कीमतों में तेजी का भारतीय कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
स्पॉट LNG की कीमतें 20 डॉलर प्रति mmbtu से अधिक होने के बावजूद मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि, गैस की बढ़ती लागत का सीधा दबाव डाउनस्ट्रीम कंपनियों (गैस खरीदकर आगे बेचने या इस्तेमाल करने वाली कंपनियों) के मुनाफे के मार्जिन पर पड़ेगा।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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