केन्द्र सरकार देश में जल्द ही 6जी मोबाइल सेवाएं शुरू करने का एलान किया है। इसके लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी की जाएगी।
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार देश में जल्द ही 6जी मोबाइल सेवाएं शुरू करने का एलान किया है। इसके लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी की जाएगी। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का मानना है कि बढ़ती डेटा मांग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विस्तार और बेहतर नेटवर्क के लिए यह कदम भविष्य की डिजिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए समय की मांग है। इसी दिशा में 600MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ा दी गई है।
2030 तक 6G का लक्ष्य
केन्द्रीय संचार मंत्रालय ने देश में 6जी (6G) मोबाइल सेवाएं शुरू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं। इसका लक्ष्य 2030 तक 6G तकनीक को लॉन्च करना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी की तैयारी की जा रही है, और इस दिशा में TRAI ने अपनी सिफारिशें जारी कर दी हैं।
600MHz बैंड की बढ़ी अहमियत
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने बताया कि 600MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ा दी गई है। यह बैंड भविष्य के हाई-स्पीड इंटरनेट और बेहतर नेटवर्क कवरेज के लिए बेहद अहम माना जाता है। केन्द्र सरकार का लक्ष्य 2030 तक 6G तकनीकों के विकास और तैनाती का नेतृत्व करना है, जो 5G की तुलना में 100 गुना तेज गति (1 टेराबिट प्रति सेकंड तक) प्रदान कर सकती है। सरकार ने 6G अनुसंधान और स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए ₹203 करोड़ की संशोधित TDIP योजना को मंजूरी दी है, जो 2026-2031 के दौरान लागू होगी।
स्पेक्ट्रम कीमतों पर विवाद
इस बीच दूरसंचार उद्योग निकाय COAI (Cellular Operators Association of India) ने आगामी स्पेक्ट्रम नीलामी से पहले सरकार से बोली की कीमतों (आधार मूल्य) में कटौती करने का आग्रह किया है। TRAI ने 11,790 MHz स्पेक्ट्रम के लिए लगभग ₹2.1 लाख करोड़ का आधार मूल्य प्रस्तावित किया है। हालांकि यह 2022 की नीलामी की तुलना में लगभग 19% कम है, फिर भी उद्योग का मानना है कि यह 5G निवेश की वर्तमान स्थिति के अनुसार अधिक है।
इंडस्ट्री की चिंता: महंगा स्पेक्ट्रम
दूरसंचार उद्योग निकाय इस आधार मूल्य को अपेक्षा से अधिक बता रहा है। उद्योग ने 5G इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के मुकाबले कम रिटर्न (ROI) का हवाला देते हुए लागत कम करने की मांग की है, क्योंकि उच्च कीमतें नेटवर्क विस्तार को प्रभावित कर सकती हैं। निकाय का कहना है कि सेवा प्रदाता अभी तक 5जी बुनियादी ढांचे में किए गए अपने भारी निवेश की वसूली नहीं कर पाए हैं।
नया मॉडल अपनाने की मांग
COAI ने सुझाव दिया है कि 5G और 6G को ध्यान में रखते हुए स्पेक्ट्रम के लिए एक नया मॉडल अपनाया जाए और कुछ मामलों में इसे शर्तों (Obligations) के साथ मुफ्त देने पर भी विचार किया जाए।
ROI पर सवाल और उम्मीदें
'सीओएआई डिजीकॉम' के हाल में आयोजित शिखर सम्मेलन के मौके पर सीओएआई के महानिदेशक एसपी कोचर ने कहा कि उद्योग को उम्मीद है कि सरकार दूरसंचार परिचालकों द्वारा 5जी में किए गए विशाल निवेश पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि जब तक निवेश पर प्रतिफल (ROI) मिलना शुरू नहीं होता, तब तक महंगे स्पेक्ट्रम में निवेश को व्यवसाय की दृष्टि से लागत प्रभावी मानना मुश्किल होगा।
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