वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और विभिन्न देशों के विदेशों में सुरक्षित भंडार फ्रीज किये जाने की घटनाओं को देखते हुए भारत सरकार ने अपना सोना विदेशों से स्वदेश लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और विभिन्न देशों के विदेशों में सुरक्षित भंडार फ्रीज किये जाने की घटनाओं को देखते हुए भारत सरकार ने अपना सोना विदेशों से स्वदेश लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिली जानकारी के अनुसार भारत अब तक लगभग 680 टन सोना स्वदेश ला चुका है, जबकि विदेशी बैंकों में अब सिर्फ 197.67 टन सोना रह गया है।
भू-राजनीतिक तनाव के बीच बड़ा कदम
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार और RBI ने विदेशों में जमा गोल्ड रिजर्व को वापस लाने की रफ्तार बढ़ा दी है।
880 टन में से 77% सोना भारत पहुंचा
RBI की अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, विदेशों में रखे 880.52 टन सोने में से करीब 77% यानी लगभग 680 टन अब भारत में सुरक्षित कर लिया गया है।
विदेशों में अब सीमित मात्रा में सोना
आरबीआई के मुताबिक अब केवल 197.67 टन सोना ही विदेशों में बचा है, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास रखा गया है। पिछले छह महीनों में ही भारत ने 104.23 टन सोना स्वदेश मंगाया है, जो इस प्रक्रिया की तेजी को दर्शाता है।
रूस-यूक्रेन और वैश्विक तनाव का असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फैसला रूस-यूक्रेन युद्ध और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसी घटनाओं के बाद बढ़ते जोखिमों से जुड़ा है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस के विदेशी भंडार को फ्रीज करने की कार्रवाई ने कई देशों को सतर्क किया है। अमेरिका-ईरान तनाव और मिडिल ईस्ट की परिस्थितियों के बीच कई देश अब अपना सोना लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वित्तीय केंद्रों से वापस अपने देश ला रहे हैं। भारत भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
सोना अब ‘सुरक्षा बीमा’ के रूप में
अब केंद्रीय बैंक सोने को सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, संकट के समय सोना तभी उपयोगी होता है जब वह देश के भीतर मौजूद हो। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 16.7% हो गई है, जो पहले 13.9% थी। हालांकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 691.1 अरब डॉलर रह गया है।
भारत अकेला नहीं, कई देश अपना रहे यही नीति
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अकेला ऐसा देश नहीं है, बल्कि कई देश अपने सोने को विदेशों से वापस मंगा रहे हैं ताकि आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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