भारत सरकार ने 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांस को औपचारिक 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' (LoR) भेज दिया है। यह गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील करीब ₹3.25 लाख करोड़ की है।
नई दिल्ली। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक डील की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। भारत सरकार ने 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांस को औपचारिक 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' (LoR) भेज दिया है। यह गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट डील करीब ₹3.25 लाख करोड़ की है। इसे भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने पिछले हफ्ते भेजा पत्र
रक्षा मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने ANI को बताया कि यह लेटर ऑफ रिक्वेस्ट पिछले हफ्ते मंत्रालय के अधिग्रहण विभाग (Acquisition Wing) की ओर से फ्रांसीसी सरकार के अधिकारियों को भेजा गया। इस डील के तहत 94 राफेल विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी में इनका निर्माण करेगी।
दो-तीन महीने में आएगा फ्रांस का जवाब, एक साल में पूरी होगी डील
सूत्रों के मुताबिक, फ्रांसीसी पक्ष अगले दो से तीन महीनों में इस लेटर ऑफ रिक्वेस्ट का जवाब दे सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देश अगले एक साल के भीतर सभी बातचीत पूरी कर इस डील पर आखिरी मुहर लगा देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून के मध्य में फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। इस यात्रा के दौरान फ्रांसीसी नेतृत्व के साथ होने वाली बैठकों में राफेल डील पर भी चर्चा होने की पूरी संभावना है।
वायुसेना में लड़ाकू विमानों की भारी कमी
भारतीय वायुसेना इस समय लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की गंभीर कमी से जूझ रही है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार 4.5-जेनरेशन-प्लस श्रेणी के राफेल विमानों को बड़ी संख्या में शामिल करने की कोशिश में लगी है। भारतीय वायुसेना और नौसेना पहले ही 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। नए 114 विमानों के जुड़ने के बाद यह संख्या 176 हो जाएगी। इसके अलावा, नौसेना ने समुद्री खतरों से निपटने के लिए 31 और राफेल विमान लेने की मंशा भी जाहिर कर दी है। ऐसे में भारत के पास राफेल विमानों की कुल तादाद 200 से ऊपर जा सकती है।
रक्षा सचिव की अगुवाई में हुई थी अहम समीक्षा
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 2024 में पदभार संभालने के तुरंत बाद वायुसेना की क्षमता बढ़ाने पर एक बड़ी समीक्षा की थी। तब से रक्षा मंत्रालय इस दिशा में केंद्रित और ठोस तरीके से काम कर रहा है। रक्षामंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) 114 राफेल विमान खरीदने के वायुसेना के प्रस्ताव को चार महीने पहले ही मंजूरी दे चुकी थी। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह इस समय फ्रांस में हैं। वे Dassault Aviation की उस फैक्ट्री का दौरा कर सकते हैं जहां राफेल विमानों का निर्माण होता है।
पहली बार फ्रांस से बाहर बनेगा राफेल — 50% होगा 'मेड इन इंडिया'
यह डील इस मायने में ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार राफेल विमान फ्रांस की सीमाओं से बाहर बनाया जाएगा। इसमें करीब 50 फीसदी स्थानीयकरण (localisation) होगा यानी आधे से ज्यादा हिस्से भारत में तैयार किए जाएंगे। रक्षा सचिव ने DAC की फरवरी में दी गई मंजूरी के बाद ANI से बातचीत में कहा था कि, "पहली बार 'मेक इन इंडिया' के तहत राफेल फ्रांस से बाहर बनेगा। यह G2G समझौता है — कोई बिचौलिया नहीं, पूरी पारदर्शिता है। भारतीय हथियार और सिस्टम जोड़ने का पूरा अधिकार हमें मिलेगा। पहला राफेल मरीन 2028 तक आना शुरू होगा और उसके करीब साढ़े तीन साल बाद वायुसेना के राफेल भी आने लगेंगे।"
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