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UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा हमला

UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा हमला, आतंकवाद और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर आईना दिखायाUN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के झूठे आरोपों का करारा जवाब दिया। भारत ने अल्पसंख्यकों के दमन और प्रेस की आजादी पर इस्लामाबाद को आड़े हाथों लिया।

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Counsellor in India's Permanent Mission to the UN Mythili R |

न्यूयॉर्क (अमेरिका)। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति की बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए थे। भारत ने दो टूक कहा कि यह पाकिस्तान का अपनी जमीन पर मानवाधिकारों के हनन और प्रेस की स्वतंत्रता दबाने के रिकॉर्ड से ध्यान भटकाने की सोची-समझी 'रणनीतिक चाल' है।

UN में कानून के शासन पर दोहरे मानदंडों की पोल

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर मैथिली आर. ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जो देश खुद अपने यहां कानून के शासन की धज्जियां उड़ाता है, उसे दूसरों को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान की आंतरिक व्यवस्था पर कड़ा कटाक्ष करते हुए कहा कि वहां "सेना ही नियम है और सेना ही कानून है।"

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा शेयर किए गए बयान के मुताबिक, मैथिली आर. ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र में, पाकिस्तान दूसरों को कानून के शासन पर लेक्चर देता है। फिर भी घर पर, सेना ही नियम है और सेना ही कानून है। न्यायपालिका की आज़ादी को कमजोर किया जाता है, नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाया जाता है, और राजनीतिक विपक्ष का गला घोंटा जाता है।"

अल्पसंख्यकों की घटती आबादी और मीडिया पर शिकंजा

भारत ने पाकिस्तान के भीतर धार्मिक अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब से वह देश अस्तित्व में आया है, तब से वहां अल्पसंख्यकों की आबादी का प्रतिशत लगातार घटता जा रहा है।

इसके साथ ही, भारतीय काउंसलर ने पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी 'विदेशी मीडिया सुविधा दिशानिर्देशों' (Foreign Media Facilitation Guidelines) का भी जिक्र किया। नए नियमों के तहत विदेशी मीडिया को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने के लिए अनिवार्य रूप से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) लेना होता है, जिस पर भारत ने गहरी चिंता जताई है।

भारत पर जुनूनी रवैये का आरोप

मैथिली आर. ने कहा कि पाकिस्तान की आदत बन चुकी है कि वह कानून के शासन के अपने ही वादों को बार-बार तोड़ता है। उन्होंने पड़ोसी देश पर भारत के प्रति 'जुनूनी' रवैया रखने का आरोप लगाया।

उन्होंने स्पष्ट किया, "कानून का शासन सत्ता में बैठे लोगों पर यह ज़िम्मेदारी डालता है कि वे उन लोगों का भला करें जिन पर वे शासन करते हैं। हालांकि, पाकिस्तान के मामले में, दुर्भाग्य से, यह वादा बार-बार तोड़ा जाता है। भारत को पाकिस्तान से कोई जुनून नहीं है, बल्कि मामला इसके ठीक उलट है।"

'ऑपरेशन सिंदूर' और आतंकवाद पर खरी-खरी

पहलगाम आतंकी हमले की याद दिलाते हुए भारतीय राजनयिक ने कहा कि पिछले साल हुए उस कायराना हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जिसके जवाब में भारत का 'ऑपरेशन सिंदूर' बेहद नपा-तुला और उचित था। भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह झूठे आरोपों की घिसी-पपिर्टी सूची को दोहराना बंद करे।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "मेरे देश के खिलाफ झूठे आरोपों की उसी लिस्ट को बार-बार दोहराने से पाकिस्तानी प्रतिनिधि उन वादों से मुक्त नहीं हो पाएंगे जो उन्होंने अपनी जनता से किए हैं और जिन्हें पूरा करने का उनका कोई इरादा नहीं है।"

यह भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर करारा प्रहार, कहा- 'जम्मू-कश्मीर हमेशा हमारा अभिन्न हिस्सा रहेगा'

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