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दिल्ली में होगी 1 से 4 जून के बीच फाइनल वार्ता

भारत-अमरीका ट्रेड डील पर बातचीत अंतिम दौर में

पिछले दिनों भारत दौरे पर आये अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ट्रेड डील जल्‍द फाइनल होने के संकेत दिये थे।

भारत-अमरीका ट्रेड डील पर बातचीत अंतिम दौर में

नई दिल्ली। भारत-अमेरिका जल्द ही ट्रेड डील का एलान कर सकते हैं। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से चल रही उच्च स्तरीय बातचीत अब अंतिम दौर में पहुंच गयी है। दिल्ली और वाशिंगटन में हुई बैठकों के बाद अब इस समझौते के महत्वपूर्ण मुद्दों और और विवरणों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पिछले दिनों भारत दौरे पर आये अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ट्रेड डील जल्‍द फाइनल होने के संकेत दिये थे। 

बातचीत अपने अंतिम चरण में

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत अपने अंतिम चरण में है। दोनों देश इस पर जल्द ही ऐतिहासिक एलान कर सकते हैं। इस डील का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना, टैरिफ कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर लगाए गए कुल टैरिफ को 50 % से घटाकर 18 % तक करने पर सहमति जताई है। भारत ने बातचीत में स्पष्ट रूप से अपने कृषि, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा है और इनमें किसी प्रकार की रियायत देने के पक्ष में नहीं है।

रेसिप्रोकल टैरिफ 90 दिनों के लिए सस्पेंड था

भारत-अमरीका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी अधिकारियों की एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति जल्द ही भारत का दौरा कर सकती है। दोनों देशों के बीच भारत में 1 से 4 जून के बीच दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। दोनो पक्ष डील के पहले चरण को जुलाई से पहले अंतिम रूप देने के पक्ष में हैं। अमेरिका ने गत 2 अप्रैल को भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। लेकिन इसे 90 दिनों के लिए सस्पेंड किया गया है। यह सस्पेंशन 9 जुलाई को खत्म हो रहा है। दोनों देश इस अवधि के खत्म होने से पहले अंतरिम समझौते पर सहमति बनाना चाह रहे हैं। भारत की मांग है कि 26% रेसिप्रोकल टैरिफ को पूरी तरह हटाया जाए, जबकि अमेरिका 10% बेसलाइन टैरिफ पहले से ही लागू कर रहा है।

टैरिफ हटाने का लाभा लेना चाहता है भारत

भारत के वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में वॉशिंगटन के 4 दिवसीय दौरे पर अमेरिकी अधिकारियों से इस मुद्दे पर वार्ता की थी। अमेरिका भारत के स्टील, टेक्सटाइल और सोलर उत्पादों के क्षेत्र में व्यापार को इच्छुक है। मोस्ट फेवर्ड नेशन (Most Favoured Nation) रेट से नीचे लाने के लिए अमेरिकी प्रशासन को कांग्रेस की मंजूरी चाहिए। लेकिन रेसिप्रोकल टैरिफ हटाने का अधिकार ट्रंप प्रशासन के पास है। भारत इसका लाभ लेना चाहता है।

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $500 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य

भारत और अमेरिका दोनों का इरादा है किा 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $500 बिलियन तक पहुंचाया जाए। इस दिशा में इंटरिम ट्रेड डील पहला ठोस कदम बन सकता है। लेकिन अमेरिका भारत के साथ बढ़ते ट्रेड डेफिसिट को लेकर चिंता जता रहा है। भारत और अमेरिका कुछ मतभेदों के बावजूद अब अंतरिम व्यापार समझौते के लिए अंतिम दौर की बातचीत की ओर बढ़ रहे हैं। रेसिप्रोकल टैरिफ हटाने और व्यापार प्रक्रिया आसान करने को लेकर 9 जुलाई से पहले किसी ठोस घोषणा की उम्मीद है।

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