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देश का प्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ा, लक्ष्य से कम

देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 5.12% बढ़ा, पर लक्ष्य से कम रहा

भारत के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में वित्त वर्ष 2025-26 में 5.12% का उछाल देखने को मिला है। हालांकि, शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह यह आंकड़ा सरकार के संशोधित बजट लक्ष्य ₹24.21 लाख करोड़ से कम रहा।

देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 512 बढ़ा पर लक्ष्य से कम रहा

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नई दिल्ली। भारत के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में वित्त वर्ष 2025-26 में 5.12% का उछाल देखने को मिला है। हालांकि, शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह यह आंकड़ा सरकार के संशोधित बजट लक्ष्य (Revised Target) ₹24.21 लाख करोड़ से कम रहा। कर संग्रह में कमी का प्रमुख कारण व्यक्तिगत आयकर में वृद्धि की सुस्त रफ्तार को माना जा रहा है। हालांकि केन्द्र सरकार ने 5.12% की शानदार बढ़ोतरी पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है।

पिछले वर्ष से बेहतर प्रदर्शन

देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 2025-26 में 5.12% बढ़कर ₹23.40 लाख करोड़ से अधिक हो गया। यह पिछले वर्ष के ₹22.26 लाख करोड़ के कर संग्रह से ज्यादा है। लेकिन यह आंकड़ा सरकार के संशोधित बजट लक्ष्य (Revised Target) ₹24.21 लाख करोड़ से कम रहा।

संशोधित अनुमान से कम आंकड़े

केन्द्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में प्रत्यक्ष कर संग्रह 24.21 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। इसमें कंपनी कर 11.09 लाख करोड़ रुपये और व्यक्तिगत आयकर (प्रतिभूति लेनदेन कर सहित) 13.12 लाख करोड़ रुपये शामिल थे। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2025-26 में देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (कंपनी और गैर-कंपनी कर सहित) 23.40 लाख करोड़ रुपये रहा, जो लक्ष्य से कम रहा। हालांकि यह वित्त वर्ष 2024-25 में संग्रहित 22.26 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 5.12 प्रतिशत अधिक है।

कॉर्पोरेट टैक्स में अच्छी बढ़त

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध कंपनी कर संग्रह 10.99 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि व्यक्तिगत आयकर (प्रतिभूति लेनदेन कर सहित) करीब 12.41 लाख करोड़ रुपये रहा। इस दौरान कॉर्पोरेट कर में 11.4% की अच्छी वृद्धि देखी गई, जबकि व्यक्तिगत आयकर में वृद्धि धीमी रही।

ग्रॉस और नेट कलेक्शन में बढ़ोतरी

सीबीडीटी के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रॉस कलेक्शन (Gross Collection) और नेट कलेक्शन (Net Collection) दोनों में साल-दर-साल (YoY) आधार पर सकारात्मक वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से शेयर बाजार में भारी निवेश के चलते सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से होने वाली आय में बड़ी उछाल आई है, जो निवेशकों के अटूट भरोसे को प्रमाणित करती है।

रिफंड में आई गिरावट

वित्त मंत्रालय के मुताबिक इस दौरान टैक्स रिफंड के आंकड़ों में गिरावट देखने को मिली है। FY26 में टैक्स रिफंड 1.09 प्रतिशत घटकर 4.71 लाख करोड़ रुपये रह गया। कर वापसी (रिफंड) जारी करने में सालाना आधार पर 1.09 प्रतिशत की कमी आई और यह 2025-26 में 4.71 लाख करोड़ रुपये रहा। रिफंड में गिरावट का मतलब यह भी हो सकता है कि सरकार ने रेवेन्यू को ज्यादा होल्ड किया या प्रोसेसिंग पैटर्न में बदलाव हुआ है।

अर्थशास्त्रियों की चिंता

अर्थशास्त्रियों के अनुसार डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का टारगेट से नीचे रहना यह दिखाता है कि इकोनॉमी में ग्रोथ तो है, लेकिन उतनी मजबूत नहीं जितनी अनुमानित थी। कॉर्पोरेट और पर्सनल दोनों टैक्स में कमी यह भी बताती है कि कंपनियों की कमाई और लोगों की इनकम ग्रोथ में बड़ा अंतर आ रहा है। यह नीति निर्धारकों के लिए चिंता का सबब हो सकता है।

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