ISRO के 9 कर्मचारी संगठनों ने निजीकरण नीति पर सरकार से लिखित स्पष्टीकरण मांगा। PSLV, LVM3, भर्ती, नौकरियों और रणनीतिक क्षमता पर उठाए सवाल। पढ़ें पूरी खबर।
बेंगलुरु (कर्नाटक)। GSLV F17-EOS 05 मिशन की सफल लॉन्चिंग के कुछ दिनों बाद ISRO के विभिन्न केंद्रों के कर्मचारी संगठनों ने सरकार से संस्थान के निर्माण और संचालन कार्यों को निजी कंपनियों या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) को सौंपने की नीति पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। बीते 4 सितंबर 2026 को भेजे गए संयुक्त पत्र में 9 कर्मचारी संगठनों ने कहा कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान तो आए हैं, लेकिन कर्मचारियों के लिए कोई आधिकारिक नीति स्पष्ट नहीं की गई है।
Key Highlights
- 9 कर्मचारी संगठनों ने Department of Space के सचिव और ISRO Chairman V Narayanan को संयुक्त प्रतिनिधित्व भेजा। पत्र की तारीख 4 सितंबर 2026 है।
- IN-SPACe Chairman Pawan Kumar Goenka के 21 अगस्त 2026 के Summit में दिए बयान का हवाला दिया गया।
- कर्मचारियों के मुताबिक, SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) की टेक्नोलॉजी और प्रोडक्शन राइट्स HAL को दिए जाने के बाद इसे PSLV और LVM3 तक बढ़ाने की बात सामने आई है।
- करीब 120 ISRO technologies पहले ही निजी क्षेत्र को ट्रांसफर की जा चुकी हैं।
- नियमित satellite manufacturing को भी ISRO से बाहर ले जाने की बात कही गई है।
- Kulasekarapattinam Space Launch Complex जैसी नई लॉन्च सुविधाओं के संचालन के लिए निजी संस्थाओं को अवसर दिए जाने की बात पत्र में उठाई गई है।
- कर्मचारी संगठनों ने अगले 5-10 वर्षों की sanctioned strength, vacancies और recruitment calendar पर स्पष्ट नीति मांगी है।
क्या है पूरा विवाद?
कर्मचारी संगठनों की चिंता उस नीति को लेकर है, जिसके तहत ISRO की कुछ manufacturing और operational activities को private companies या PSUs को ट्रांसफर किए जाने की खबरें सामने आई हैं। संयुक्त प्रतिनिधित्व में IN-SPACe Chairman Pawan Kumar Goenka के 21 अगस्त 2026 के Summit में दिए गए कथित बयान का उल्लेख है। पत्र के मुताबिक उन्होंने कहा था कि अंततः ISRO launch vehicles का निर्माण नहीं करेगा और ये काम private sector या PSU द्वारा किया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस तरह के बयान को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रचार मिला, लेकिन Department of Space की ओर से कर्मचारियों को अब तक यह नहीं बताया गया कि यह सरकार की मंजूर नीति है या नहीं। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि सरकार स्पष्ट करे कि इस बदलाव का कानूनी आधार क्या है, इसे कितने चरणों में लागू किया जाएगा और मौजूदा कर्मचारियों तथा भविष्य की भर्ती पर इसका क्या असर पड़ेगा।
SSLV से PSLV और LVM3 तक ट्रांसफर की आशंका
प्रतिनिधित्व में कई संभावित बदलावों का जिक्र किया गया है। इनमें SSLV technology और production rights का HAL को ट्रांसफर होना और भविष्य में PSLV तथा LVM3 तक इसी व्यवस्था को बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। कर्मचारी संगठनों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या आगामी technology-transfer प्रक्रिया में PSUs को बाहर रखा जा सकता है और अगर ऐसा है, तो इसकी वजह क्या है।
इसके अलावा, routine satellite manufacturing को ISRO से बाहर ले जाने और नई launch infrastructure, जिसमें Kulasekarapattinam का Space Launch Complex भी शामिल है, के संचालन को private entities के लिए खोलने की बात भी पत्र में उठाई गई है। संगठनों के मुताबिक, ISRO से private sector को करीब 120 technologies पहले ही ट्रांसफर की जा चुकी हैं।
कर्मचारियों को सबसे ज्यादा चिंता किस बात की है?
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि launch vehicle का काम केवल किसी कंपनी को दिया गया सामान्य manufacturing contract नहीं है। उनके मुताबिक vehicle design, realisation (वास्तविक निर्माण/तैयारी), integration (सभी प्रणालियों को जोड़ना), testing और launch operations ISRO की core competence यानी उसकी मूल तकनीकी क्षमता और strategic capability हैं।
उनका कहना है कि अगर launch vehicle और satellite realisation में ISRO की भूमिका लगातार कम होती गई, तो इसके सीधे असर workforce पर पड़ सकते हैं। ISRO के भीतर काम का दायरा घट सकता है और sanctioned posts (स्वीकृत पदों) की संख्या freeze हो सकती है। Development facilities में काम कर रहे मौजूदा कर्मचारियों के पास कम meaningful work रह सकता है या कुछ कर्मचारी surplus हो सकते हैं।
वही काम private contractors के जरिए होने पर ISRO में नियमित भर्ती की जरूरत घट सकती है। Group A, B और C पदों पर recruitment, जो पहले से vacancies और attrition (कर्मचारियों के संगठन छोड़ने/सेवानिवृत्त होने) से प्रभावित है, और कम हो सकती है। Promotion avenues (पदोन्नति के अवसर) सीमित हो सकते हैं। ISRO की नौकरी की स्थिरता को ध्यान में रखकर जीवन की योजना बनाने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
रणनीतिक क्षमता पर भी सवाल
प्रतिनिधित्व में केवल रोजगार का मुद्दा नहीं उठाया गया है। संगठनों ने strategic autonomy (रणनीतिक आत्मनिर्भरता), quality assurance (गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था) और safety culture (सुरक्षा-केंद्रित कार्य संस्कृति) पर भी चिंता जताई है। उनका तर्क है कि यदि core operations सार्वजनिक नियंत्रण से बाहर जाते हैं, तो इन क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। हालांकि पत्र में इस बदलाव को भारतीय उद्योग के खिलाफ बताया नहीं गया है।
कर्मचारी संगठनों ने साफ किया है कि वे Indian industry की भागीदारी या NSIL के जरिए वैध commercialisation (व्यावसायीकरण) के विरोध में नहीं हैं। उनका मुख्य सवाल यह है कि private participation को बढ़ावा देने और ISRO की अपनी संस्थागत क्षमता को खत्म करने के बीच सीमा कहां तय की गई है।
सरकार से क्या-क्या जवाब मांगा गया?
9 संगठनों ने समयबद्ध और लिखित स्पष्टीकरण की मांग की है। इसमें खास तौर पर पूछा गया है:
- क्या IN-SPACe Chairman का बयान भारत सरकार का approved decision है या सिर्फ IN-SPACe का promotional outlook?
- भविष्य में ISRO की अनिवार्य भूमिका क्या होगी?
- क्या PSLV, LVM3, SSLV और इनके successor vehicles ISRO के कार्यक्षेत्र में बने रहेंगे?
- क्या PSLV/LVM3 transfer में PSUs को बाहर रखा गया है? अगर हां, तो क्यों?
- अगले 5-10 वर्षों में sanctioned strength, vacancies, recruitment calendar और नई नियुक्तियों पर क्या असर पड़ेगा?
- मौजूदा कर्मचारियों को adverse cadre review और promotion avenues में कमी से बचाने के लिए क्या safeguards होंगे?
- सार्वजनिक धन से बनाई गई technology, facilities और launch complexes को private operation में देने की institutional व्यवस्था क्या होगी?
- इस व्यवस्था में NSIL और IN-SPACe की अलग-अलग भूमिका क्या होगी?
- किसी irreversible decision से पहले क्या Service Associations से सलाह ली जाएगी?
Chairman से कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगें
कर्मचारी संगठनों ने ISRO Chairman से आधिकारिक लिखित स्पष्टीकरण जारी करने, core realisation और launch functions के किसी irreversible transfer पर स्थिति स्पष्ट करने और Service Associations को इसकी जानकारी देने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने recognised associations के साथ structured interaction करने और कर्मचारियों को आधिकारिक तौर पर यह भरोसा दिलाने की मांग की है कि उनकी service conditions और public employment status सुरक्षित रहेंगे।
कर्मचारियों ने कहा- विरोध नहीं, नीति की स्पष्टता चाहिए
9 General Secretaries और Presidents के हस्ताक्षर वाले पत्र में कर्मचारी संगठनों ने कहा कि उनका प्रतिनिधित्व रचनात्मक और लोकतांत्रिक भावना से किया गया है। पत्र पर M. प्रसाद (SEA-SDSC), शशिकुमार बी. (ISAC EA), सरथकुमार वी.एस. (ISRO SA), शिरीष बालू घरडे (SEWA-SAC) समेत 9 महासचिवों और अध्यक्षों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ISRO और राष्ट्रीय space programme के प्रति उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं है। उनका कहना है कि इसी निष्ठा के कारण वे चाहते हैं कि किसी अनिश्चितता के स्थायी नीति में बदलने से पहले सरकार स्थिति स्पष्ट करे।
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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