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5 साल बाद दोबारा शुरू हुई है कैलाश मानसरोवर यात्रा

काठमांडू में फंसे कैलाश मानसरोवर के 52 तीर्थयात्री, सुप्रिया सुले की अपील- 'सुरक्षित यात्रा के लिए हस्तक्षेप करे सरकार'

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 52 भारतीय तीर्थयात्री नेपाल के काठमांडू में फंस गए हैं। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से उनकी सुरक्षा और सहायता के लिए गुहार लगाई है।

काठमांडू में फंसे कैलाश मानसरोवर के 52 तीर्थयात्री सुप्रिया सुले की अपील- सुरक्षित यात्रा के लिए हस्तक्षेप करे सरकार

सुप्रिया सुले, सांसद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) | ANI

नई दिल्ली: कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर निकले करीब 52 भारतीय तीर्थयात्री इस समय नेपाल के काठमांडू में फंसे हुए हैं। अपनी सुरक्षित यात्रा और आगे बढ़ने के लिए ये तीर्थयात्री तत्काल सहायता की गुहार लगा रहे हैं। इस मामले को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विदेश मंत्रालय और संबंधित भारतीय दूतावासों से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और फंसे भारतीय नागरिकों को जरूरी सहायता प्रदान करने का आग्रह किया है।

सुप्रिया सुले ने अधिकारियों से कार्रवाई की अपील की

सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर हालात को उजागर करते हुए लिखा, "कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले लगभग 52 भारतीय नागरिक इस समय नेपाल के काठमांडू में फंसे हुए हैं और उन्हें तत्काल सहायता की जरूरत है। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय से अनुरोध है कि वे कृपया इस मामले पर ध्यान दें और उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सहायता प्रदान करें।"

5 साल बाद दोबारा शुरू हुई है कैलाश मानसरोवर यात्रा

कोरोना महामारी और अन्य कारणों से कैलाश मानसरोवर यात्रा पांच सालों तक स्थगित रही। इसके बाद इसे दोबारा बहाल किया गया है। 2026 में यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 20 जून को सिक्किम के नाथू ला दर्रे से होते हुए चीन (तिब्बत) में प्रवेश कर चुका है।

सिक्किम के राज्यपाल ने जत्थे को किया था रवाना

सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने पर्यटन मंत्री शेरिंग थेनडुप भूटिया और सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के अधिकारियों की उपस्थिति में इस जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। अधिकारियों के मुताबिक, इस साल कम-से-कम 10 जत्थों के कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने की उम्मीद है। इससे सिक्किम के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

दो मुख्य मार्गों से होती है कैलाश मानसरोवर यात्रा 

विदेश मंत्रालय द्वारा हर साल जून से अगस्त-सितंबर के बीच आयोजित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा अपने अत्यंत धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जानी जाती है। भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में यह हिंदुओं के लिए जितनी पूजनीय है, उतनी ही जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी पवित्र है। यह यात्रा दो मुख्य मार्गों- उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा और सिक्किम के नाथू ला दर्रा से आयोजित की जाती है। 

वैध पासपोर्ट और मेडिकल टेस्ट में फिट भारतीय ही कर सकते हैं यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा में केवल वही भारतीय नागरिक भाग ले सकते हैं, जिनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट होता है और जो मेडिकल टेस्ट में फिट पाए जाते हैं। फिलहाल काठमांडू में फंसे यात्रियों की सुरक्षित वापसी या यात्रा बहाली को लेकर विदेश मंत्रालय के अगले कदम का इंतजार है।

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