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सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर Meta पर शिकंजा

CSAM और डीपफेक कंटेंट मामले में Meta को चेतावनी, सेफ हार्बर पर उठे सवाल

Meta CEO मार्क जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री, डीपफेक और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई गलतियों को लेकर माफी मांगी है। भारत सरकार ने Meta को जवाबदेही सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है।

csam और डीपफेक कंटेंट मामले में meta को चेतावनी सेफ हार्बर पर उठे सवाल

Mark Zuckerberg Apologizes (File Photo) |

नई दिल्ली: मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बाल यौन शोषण सामग्री, डीपफेक कंटेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई त्रुटियों के लिए सरकार से माफी मांगी है। सूत्रों ने बताया कि मेटा को यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कंपनी "मध्यस्थ" की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आती है, जहां वे यह तय करते हैं कि किसे कंटेंट मिलेगा। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सुरक्षित आश्रय उन पर लागू नहीं होता है। 

मीत्यावर सचिव एस कृष्णन से की मुलाकात

एक सूत्र ने बताया, "मार्क जुकरबर्ग ने सीएसएएम (बाल यौन शोषण सामग्री), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई त्रुटियों के लिए माफी मांगी है। उन्हें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वे मध्यस्थ की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते हैं। वे तय करते हैं कि किसे कंटेंट मिलेगा। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सुरक्षित आश्रय उन पर लागू नहीं होता है। मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कपलान के नेतृत्व में मेटा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मीत्यावर सचिव एस कृष्णन से भी मुलाकात की। 

लगभग 45 मिनट तक चली इस बैठक में क्या हुआ

लगभग 45 मिनट तक चली इस बैठक में मेटा के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को गलती से हटाए जाने के कारणों को समझाया। संचार संबंधी संसदीय स्थायी समिति के प्रमुख भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी मध्यस्थ की नहीं, बल्कि प्रकाशक की जिम्मेदारी है। 

मार्क जुकरबर्ग को दी गई चेतावनी

उन्होंने कहा, इसलिए मार्क जुकरबर्ग को तीन दिनो के भीतर माफी मांगनी होगी। अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को दी गई 'सेफ हार्बर' सुरक्षा रद्द कर देंगे, जिसका वे दुरुपयोग कर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर दिखाई देने वाली अभद्र भाषा, हिंसा और आपत्तिजनक सामग्री पर विचार करें। अगर ऐसी सामग्री से प्रभावित सभी लोग मेटा प्रमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हैं, तो देशभर में एफआईआर की बाढ़ आ सकती है और दोषियों को कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

वापस ले लेनी चाहिए सेफ हार्बर सुरक्षा

गोड्डा से भाजपा सांसद दुबे ने कहा कि पिछले महीने फेसबुक से प्रधानमंत्री मोदी के परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कार्रवाई वाले वीडियो को हटाए जाने को गंभीरता से लिया है। मेटा के संस्थापक और सीईओ मार्क ज़करबर्ग को माफी मांगनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो धारा 79 के तहत दी गई सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए। दुबे ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के व्यूअरशिप एल्गोरिदम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी नीति नए उपयोगकर्ताओं को प्राथमिकता देने की है।

पांच घंटे तक गायब रहा पीएम मोदी का वीडियो

गोड्डा से भाजपा सांसद दुबे ने कहा कि मेटा ने स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री के वीडियो की सामग्री चार घंटे से अधिक समय तक गायब थी।
मेटा इंडिया ने प्रधानमंत्री का वीडियो हटा दिया है। यह पहली बार नहीं है जब मेटा इंडिया ने ऐसा किया है। आपको याद हो जनवरी में 2024 के चुनावों के संबंध में खुद जुकरबर्ग ने एक बयान दिया था और बाद में माफी मांगी थी। इससे पता चलता है कि उनका इरादा देश को अस्थिर करना है। जब भारत के प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जा सकता है और उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक पांच घंटे तक गायब रहा, तो यह बहुत गंभीर मामला है।

उन्होंने कहा, हमारी समिति ने दो बातें कही हैं और स्पष्ट रूप से कहा है कि माफी जुकरबर्ग को मांगनी चाहिए। अगर जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो उनसे धारा 79 के तहत मिली सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा, मेटा के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने पिछले महीने पीएम मोदी के वीडियो तक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया था, बाद में इसे बहाल कर दिया गया। 23 जुलाई को जारी किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने NEET-UG 2026 परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के दौरान Gen Z को पहली बार सीधे संबोधित किया।

भारत सरकार के दोनों नियम बहुत सख्त 

वीडियो में प्रधानमंत्री ने छात्रों को आश्वासन दिया कि सरकार परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी और कहा कि इस संबंध में सख्त कानूनी प्रावधान केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष लाए जाएंगे। दुबे ने यह भी कहा कि CSAM (बाल यौन शोषण सामग्री) एक और मुद्दा है। उन्होंने कहा, "YouTube पर भी ऐसी सामग्री है। Meta पर भी ऐसी सामग्री है। वे बाल शोषण से संबंधित सामग्री नहीं हटाते। वे महिलाओं से संबंधित सामग्री नहीं हटाते। भारत सरकार के ये दोनों नियम बहुत सख्त हैं। इसके अलावा वे गृह मंत्रालय की बात नहीं सुनते। वे सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की भी बात नहीं सुनते। 

Meta India के खिलाफ FIR दर्ज 

उन्होंने आगे कहा, इसलिए हमने कहा है कि इन सभी मामलों में और कई अन्य मामलों में भी जैसा कि आप जानते हैं कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री ने Meta India के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। हमने कहा है कि इन सभी मामलों में सेफ हार्बर को हटाया जाना चाहिए। मेटा ने 28 जुलाई को कहा था कि परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कार्रवाई पर प्रधानमंत्री मोदी का फेसबुक वीडियो तकनीकी खराबी के कारण हटा दिया गया था और बाद में बहाल कर दिया गया। 

मेटा के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा था, "सामग्री गलती से हटा दी गई थी और बाद में बहाल कर दी गई है। पिछले महीने मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दी थी। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। 

(इनपुट: ANI)

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