अरविंद कुमार। दुनिया की सबसे प्रसिद्ध मूर्तिकार फ्रांस में जन्मी मैरी तुसाद मानी जाती है। यह वह शख्स हैं जिनकी यदि बात नहीं की जाए तो दुनिया अधूरी मानी जाती है।
दुनिया की सबसे प्रसिद्ध मूर्तिकार
अरविंद कुमार। दुनिया की सबसे प्रसिद्ध मूर्तिकार फ्रांस में जन्मी मैरी तुसाद मानी जाती है। यह वह शख्स हैं जिनकी यदि बात नहीं की जाए तो दुनिया अधूरी मानी जाती है। उन्होंने बचपन में ही मोम से चेहरे गढ़ने की कला सीखी और फ्रेंच रॉयल फैमिली तक के प्रोट्रेट बनाए। फ्रांसीसी क्रांति के समय तो उन्होंने कई ऐतिहासिक चेहरों के डेथ मास्क भी बनाए। इसी से उनका नाम दुनिया भर में मशहूर हो गया।
जन्म और शुरुआती जीवन
मैरी तुसाद का जन्म 1 दिसंबर, 1761 को हुआ था और मृत्यु 16 अप्रैल, 1850 को हुआ। उनकी शिक्षा का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है, पर उन्होंने एनाटॉमी के डॉक्टर फिलिप कर्टियस से वैक्स आर्ट सीखा था। इसके बाद 1925 की आग और 1940 में शुरू हुए दूसरे विश्व युद्ध की बमबारी में मैडम तुसाद की कई मूल मूर्तियां नष्ट हो गई।
परिवार और बचपन की परिस्थितियाँ
मैरी तुसाद का जन्म 1 दिसंबर 1761 को स्ट्रासबर्ग में हुआ था। उनके जन्म के दो महीने पहले ही उनके पिता जोसेफ ग्रोशल्ट्रज का निधन हो गया। वे जर्मनी की फौज में थे और युद्ध के दौरान बुरी तरह घायल हो गये थे। उनकी मां मैरी को लेकर स्विट्जरलैंड के बर्न में पहुंची। वहीं उनको एक डॉक्टर फिलिप कर्टियस के घर में काम मिला। कर्टियस एनाटॉमी के डॉक्टर थे। इसके साथ उन्हें वैक्स की मूर्ति बनाने में भी महारत हासिल था।
फ्रांसीसी क्रांति में कठिन समय
इसके बाद के कुछ साल मैरी के लिए कठिनाइयों से भरा रहा। 1769 में फ्रांसीसी क्रांति का आगाज हुआ। इससे पेरिस का माहौल बदल गया। शाही परिवार से संबंध के कारण मैरी को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें फांसी पर चढ़ाए गये लोगों के मुखौटे (डेथ मास्क) बनाने की शर्त पर छोड़ा गया। उन्हें शवगृह ले जाकर कटे हुए सिरों पर मोम और प्लास्टर लगाकर चेहरे सुरक्षित कराए जाते थे। उन्होंने लुई सोलहवें, मेरी अंत्वानेत, रोबेस्पियर और मारा जैसे ऐतिहासिक लोगों के मुखौटे बनाए।
कला सीखना और पहली पहचान
कर्टियस के साथ रहते हुए मैरी ने उनसे मोम आर्ट की बारीकियों को सीखा। 16 की उम्र में उन्होंने वॉल्टेयर का पहला मोम का पुतला बनाया। इससे उन्हें पहचान मिली।
प्रसिद्ध हस्तियों के पुतले
इसके बाद उन्होंने रूसो, बेंजामिन फ्रैंकलिन और कई अन्य प्रसिद्ध चेहरों की प्रतिकृति बनाई। बाद में कर्टियस फ्रांस के पेरिस चले गये। मैरी और उनकी मां भी साथ गई। तभी 1780 के दशक में उन्हें लुईस-16 की बहन मैडम एलिजाबेथ का आर्ट शिक्षक नियुक्त किया गया।
विरासत और वैवाहिक जीवन
मैरी के गुरु कर्टियस की 1794 में मौत हो गई। उनका मोम म्यूजियम कलेक्शन मैरी को विरासत में मिला। 1795 में मैरी की शादी इंजीनियर फ्रांस्वा तुसाद से हुई। उनके दो बच्चे हुए, पर शादी सफल नहीं रही। 1802 में मैरी अपने दोनों बेटे के साथ इंग्लैंड आ गई। तब वह वहीं रहने के लिए मजबूर हो गई। युद्ध के कारण वह फिर लौट नहीं सकी। इसके बाद 33 साल तक ब्रिटेन में घूम-घूम कर अपनी प्रदर्शनी लगाती रही।
वैक्स मॉडलिंग को नई पहचान
मैरी तुसाद ने वैक्स मॉडलिंग को एक गंभीर कला के रूप में स्थापित किया। उन्होंने विश्व की पहली स्थायी वैक्स प्रदर्शनी शुरू की। यह आज भी दुनिया का सबसे प्रसिद्ध वैक्स म्यूजियम मैडम तुसाद है जो लंदन में है। मैरी तुसाद का एक वैक्स स्टैच्यू जर्मनी के बर्लिन में मैडम तुसाद वैक्स म्यूजियम में लगाया गया है। यह म्यूजियम का आकर्षण है।
यह भी पढ़े: खलघाट टोल आंदोलन पर 700 लोगों के खिलाफ केस
https://www.primenewsnetwork.in/india/protest-at-khalghat-toll-700-cases-filed/99742