गृह मंत्रालय ने कहा कि गृह सचिव की बिना शर्त माफी अवमानना नोटिस के जवाब में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है। मंत्रालय के मुताबिक, सरकार और पुलिस की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी।
नई दिल्ली (भारत)। गृह मंत्रालय (MHA) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की बिना शर्त माफी को लेकर मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि सरकार और पुलिस की सभी कार्रवाइयां कानून के अनुरूप हैं और उनके खिलाफ अवमानना का कोई मामला नहीं बनता है। MHA के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस मिलने पर जवाब दाखिल करने वाले पक्ष के हलफनामे की शुरुआत बिना शर्त माफी के साथ करना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसे अपने आप में गलती स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अवमानना नोटिस के जवाब में माफी प्रक्रिया का हिस्सा: MHA
PIB के गृह मंत्रालय के आधिकारिक X हैंडल पर जारी पोस्ट में कहा गया कि कुछ मीडिया संगठनों ने केंद्रीय गृह सचिव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने की खबरें प्रकाशित की हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जब भी सुप्रीम कोर्ट अवमानना नोटिस जारी करता है, तो उसका जवाब देने वाले पक्ष को अपने हलफनामे की शुरुआत बिना शर्त माफी के साथ करनी होती है। इसके बाद ही अन्य तथ्य और कानूनी तर्क पेश किए जाते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, अवमानना से जुड़ी हर याचिका में इस प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
गृह सचिव और पुलिस अधिकारियों के हलफनामों का दिया हवाला
गृह मंत्रालय ने बताया कि इसी प्रक्रिया के तहत गृह सचिव, पुलिस आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामों के पहले पैराग्राफ में बिना शर्त माफी का उल्लेख किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, हलफनामों में विस्तार से तथ्य और तर्क दिए गए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि सरकार और पुलिस की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी। इसी आधार पर MHA ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला नहीं बनता है।
9 अक्टूबर के आदेश के उल्लंघन से गृह सचिव का इनकार
गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा कि दिल्ली में पाबंदियां लगाने के मामले में अदालत के 9 अक्टूबर के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने ये पाबंदियां शांति बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था में संभावित गड़बड़ी रोकने के उद्देश्य से लगाई थीं। उनके जवाब में एक प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का उल्लेख किया गया, जो कथित तौर पर आवश्यक अनुमति के बिना आयोजित किया जा रहा था। उन्होंने NEET से जुड़े 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस को मिले अनुभवों का भी हवाला दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदियां सीमित करने का दिया था निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश में केंद्र सरकार से कुछ सेवाओं पर लगाई गई पूर्ण पाबंदी हटाने और उन्हें केवल आवश्यक सीमा तक नियंत्रित करने को कहा गया था। आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दिल्ली के आम नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी मामले में केंद्र सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों और अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर अवमानना संबंधी कार्यवाही का मुद्दा उठा।
रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में बंद किया गया था मोबाइल इंटरनेट
मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के मामले में गृह सचिव गोविंद मोहन ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार, इस अनुरोध पर कानून के तहत कार्रवाई की गई और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे उचित माना गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाबंदी 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक रायसीना हिल के चार किलोमीटर के दायरे में लागू रही। यह प्रतिबंध केवल मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर था, जबकि वाई-फाई और ब्रॉडबैंड कनेक्शन इससे बाहर रखे गए थे।
गृह सचिव ने अवमानना नोटिस रद्द करने की मांग की
गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस रद्द करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने अदालत के 11 अक्टूबर के आदेश में बदलाव की मांग की है। उनका अनुरोध है कि कानूनी सुरक्षा उपायों के दायरे में रहते हुए आवश्यकता पड़ने पर इंटरनेट सेवाएं बंद करने की अनुमति दी जाए। गृह मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में दोहराया कि संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई कानून के अनुरूप थी और उनके खिलाफ अवमानना का मामला नहीं बनता है। (Source: ANI)
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