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मिडिल ईस्ट संकट से रुपये में गिरावट

मिडिल ईस्ट संकट के कारण रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

नई दिल्ली: मध्य पूर्व संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले 33 पैसे गिरकर ऐतिहासिक स्तर 94.29 पर पहुंच गया।

मिडिल ईस्ट संकट के कारण रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

Financial Experts |

नई दिल्ली। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बरकरार तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट के साथ 33 पैसे टूटकर अपने सबसे निचले स्तर 94.29 के करीब पर पहुंच गया है। बुधवार को पिछले सेशन में घरेलू करेंसी डॉलर के मुकाबले 93.96 पर बंद हुई थी।

शेयर बाजार में भी गिरावट

इस बीच शेयर मार्केट में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। निफ्टी में करीब साढ़े तीन सौ अंक और सेंसेक्स में करीब 1200 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के माहौल के बीच विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार भारी बिकवाली और डॉलर के मजबूत होने के कारण रुपये में आज और कमजोरी आई है।

लगातार तीसरे दिन गिरा रुपया

भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। लगातार तीसरे सत्र में रुपये में गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार और बुधवार को भी रुपये में तेज गिरावट देखने को मिली थी। बुधवार को पिछले सत्र में रुपया 29 पैसे फिसलकर 94 के स्तर को पार कर 94.05 पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को रुपया 23 पैसे कमजोर होकर 93.76 पर बंद हुआ था। बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.94 पर खुला और 93.86 से 94.08 के बीच कारोबार करने के बाद अपने अब तक के सबसे निचले बंद स्तर पर पहुंचा था।

ऊर्जा संकट की बढ़ती चिंता

बाजार में अब यह चिंता गहराने लगी है कि पश्चिम एशिया युद्ध से पैदा हुआ एनर्जी सप्लाई संकट लंबा खिंचेगा, जिससे एनर्जी इंपोर्ट करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव और बढ़ेगा। इन चिंताओं ने रुपये की कमजोरी को और बढ़ा दिया है। पिछले महीने के आखिर में युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें लगभग 3.5% की गिरावट आई है।

महंगाई और GDP पर असर

मुद्रा बाजार विशेषज्ञों ने मिडिल ईस्ट संकट के बाद बढ़ती महंगाई और फैक्ट्रियों में बंदी को देखते हुए भारत के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान कम कर दिए हैं। कुछ को यह भी उम्मीद है कि संकट के असर से महंगाई बढ़ सकती है, इसलिए अगले 12 महीनों में भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

आगे क्या रहेगा अनुमान

अगर लंबे टकराव से बचा भी जाता है, तो भी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल रुपये के 98 प्रति डॉलर के स्तर को पार करने की संभावना है। इसका दबाव मुख्य रूप से भारत के करंट अकाउंट बैलेंस से आएगा।

एक्सपर्ट की राय

CR फॉरेक्स एडवाइजरी के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबारी ने कहा, “हालांकि लड़ाई का वैश्विक असर बताता है कि तनाव कम करने का दबाव बढ़ रहा है, लेकिन उस नतीजे तक पहुंचने का रास्ता अभी साफ नहीं है। अगर तनाव कम होता है, तो रुपये में 1 से 1.5 रुपये तक की रिकवरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।”

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