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मिडिल ईस्ट तनाव से महंगाई की आशंका

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ेगी महंगाई? मिडिल ईस्ट संकट ने बढ़ाई भारत की चिंता

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच वित्तीय कंपनियों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत यदि 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है तो देश में महंगाई दर 6% के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाएगी।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ेगी महंगाई मिडिल ईस्ट संकट ने बढ़ाई भारत की चिंता

Middle East Tension Sparks Inflation Concerns, RBI May Hike Rates |

मुंबई। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। नामी गिरामी वित्तीय कंपनियों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत यदि 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है तो देश में महंगाई दर (Inflation) 6% के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाएगी। इससे आम आदमियों का घरेलू बजट बिगड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के समक्ष महंगाई को नियंत्रित करने को लेकर दबाव आ सकता है।

खुदरा मुद्रास्फीति 4% पर रखने का लक्ष्य

केन्द्र सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति की दर चार प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य सौंपा है। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह तनाव बना रहता है, तो चालू वित्त वर्ष में भारत को व्यापक आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। देश की मंहगाई पर काबू करने के लिए रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति में बड़ा महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़ सकते हैं।

एचएसबीसी की रिपोर्ट और महंगे कर्ज का बढ़ता अंदेशा

विदेशी ब्रोकरेज फर्म "एचएसबीसी" ने कहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है तो महंगाई छह प्रतिशत के स्तर को पार कर जाएगी। ऐसे में महंगाई को रोकने के लिए आरबीआई ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने आरबीआई को दो प्रतिशत की घट-बढ़ के साथ खुदरा मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य सौंपा है।

RBI की MPC बैठक से पहले रेपो रेट बढ़ने की संभावना

एचएसबीसी के अर्थशास्त्री ने कहा, 'हम "चौराहे" पर हैं क्योंकि मार्च में ब्रेंट का औसत मूल्य 100 डालर प्रति बैरल रहा है।' आगामी बुधवार को शुरू होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से पहले इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि आरबीआई रुपये को बचाने के लिए रेपो रेट को बढ़ा सकता है।

मौद्रिक और वित्तीय मोर्चे पर तटस्थ रुख अपनाने की सलाह

"इकोनामिस्ट" ने अभी के लिए मौद्रिक और वित्तीय दोनों मोर्चों पर तटस्थ रुख अपनाने की सलाह दी है, क्योंकि आपूर्ति की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है और मांग बढ़ाने से महंगाई बढ़ सकती है। तटस्थ रुख अपनाने के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका मतलब यह होगा कि राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2025-26 के स्तर के करीब रखा जाए और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में मदद के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई जाएं।

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