प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने मंगलवार को रेल मंत्रालय के तीन बड़ी परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने मंगलवार को रेल मंत्रालय के तीन बड़ी परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत करीब ₹23,437 करोड़ है। इन प्रोजेक्ट्स में नागदा - मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंटकल - वाडी तीसरी और चौथी लाइन और बुढ़वाल - सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं।
ट्रेन संचालन होगा तेज और आसान
CCEA द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, "लाइन कैपेसिटी बढ़ने से ट्रेनों के कार्यक्षमता में बड़ा बदलाव होगा। इस मल्टी-ट्रैकिंग प्रपोज़ल ऑपरेशन को आसान बनाने और कंजेशन कम करने के लिए तैयार हैं। ये प्रोजेक्ट्स PM नरेंद्र मोदीजी के नए भारत के विज़न के मुताबिक हैं, जो इलाके के लोगों को पूरे डेवलपमेंट के ज़रिए 'आत्मनिर्भर' बनाएगा, जिससे उनके रोज़गार/सेल्फ़-एम्प्लॉयमेंट के मौके बढ़ेंगे।"
यात्रियों और माल ढुलाई को मिलेगा बड़ा लाभ
CCEA द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, मल्टी-ट्रैकिंग सिस्टम से ट्रेनों की परिचालन क्षमता काफी बढ़ जाएगी। ट्रेनों को कंजेशन का सामना नहीं करना पड़ेगा और ट्रेनें समय से अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगी। इससे रेलवे की परिचालन क्षमता और सेवा की विश्वनीयता बेहतर होगी। यह परियोजना क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के जरिए आत्मनिर्भर बनाएगी और उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करेगी। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही और अधिक सुगम होगी।
6 राज्यों के 19 जिलों में बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी
ये तीन परियोजनाएं मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के 19 जिलों को कवर करेंगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। इस प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 4,161 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा जिनकी आबादी करीब 83 लाख है।
पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी और बेहतर
प्रस्तावित क्षमता बढ़ाने से देश भर के कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इनमें महाकालेश्वर, रणथंभौर नेशनल पार्क, कुनो नेशनल पार्क, केवलादेव नेशनल पार्क, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम (श्री राघवेंद्र स्वामी मठ), श्री नेट्टिकंती अंजनेया स्वामी वारी मंदिर (कासपुरम), श्यामनाथ मंदिर, नैमिषारण्य (नीमसार) आदी शामिल हैं।
माल ढुलाई, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स कोयला, अनाज, सीमेंट, POL, आयरन और स्टील, आयरन ओर, कंटेनर, फर्टिलाइज़र जैसी चीज़ों के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। क्षमता बढ़ जाने से 60 MTPA (मिलियन टन प्रति साल) एक्स्ट्रा माल ढुलाई हो सकेगा। रेलवे परिवहन का एक पर्यावरण-अनुकूल माध्यम है, जो देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को कम करने और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा। इससे तेल के आयात में 37 करोड़ लीटर की बचत होगी और 185 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी, जो 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
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