लाल किले से पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सली' वाले बयान पर कांग्रेस ने किया पलटवार। 'वंदे मातरम' और राजनीतिक बयानों पर छिड़ी सियासी जंग की पूरी खबर पढ़ें।
नई दिल्ली। लाल किले से शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की। पार्टी ने 'दिमागी नक्सलियों' (नक्सली विचारधारा वाले) के खिलाफ उनकी चेतावनियों को खोखली राजनीतिक बयानबाजी करार दिया। साथ ही पार्टी ने भारत के राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' से जुड़ी अपनी ऐतिहासिक विरासत का पुरजोर बचाव किया।
जयराम रमेश का पीएम मोदी के बयान पर तीखा प्रहार
देश की प्रगति के लिए खतरा बने 'दिमागी नक्सलियों' की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने के पीएम मोदी के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए, वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि इस शब्द का कोई वास्तविक आधार नहीं है। उन्होंने इसकी तुलना पहले 'अर्बन नक्सल' (शहरी नक्सली) शब्द को लेकर हुई बहस से की। रमेश ने याद दिलाया कि जब सरकार ने पहले राजनीतिक विरोधियों को 'अर्बन नक्सल' करार दिया था, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संसद में स्पष्ट करना पड़ा था कि ऐसी कोई आधिकारिक कानूनी परिभाषा मौजूद नहीं है।
'अर्बन नक्सल' और 'मेंटल नक्सल' की तुलना पर सियासत
जयराम रमेश ने कहा, "दो-तीन साल पहले, उन्होंने (पीएम मोदी) अपने राजनीतिक विरोधियों को 'अर्बन नक्सल' कहा था। उस समय संसद में यह सवाल उठा था कि 'अर्बन नक्सल' की परिभाषा क्या है। गृह मंत्री ने जवाब दिया था कि 'अर्बन नक्सल' जैसी कोई चीज नहीं है और न ही इसकी कोई परिभाषा है। आज, प्रधानमंत्री लाल किले से अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए 'मेंटल नक्सल' (नक्सली विचारधारा वाले) शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं।" रमेश ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार अक्सर अपने आलोचकों को बदनाम करती है और बाद में उन्हीं नीतियों को अपना लेती है जिनकी वे वकालत करते हैं।
कांग्रेस का तंज- विरोधियों की मांगें मान लेती है सरकार
कांग्रेस नेता ने कहा, "असलियत यह है कि जिन लोगों को वे 'अर्बन नक्सल' कहते हैं, उन्हीं के उठाए मुद्दों और मांगों को वे आखिरकार मान लेते हैं। उन्होंने जाति जनगणना के विचार को 'अर्बन नक्सल' सोच बताकर खारिज कर दिया था, फिर भी एक साल पहले उन्होंने जाति-आधारित जनगणना की घोषणा की। पहले आप अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं - उन्हें 'अर्बन नक्सल' या 'मेंटल नक्सल' कहते हैं - लेकिन बाद में, आप उन्हीं मांगों को मान लेते हैं जो आपके राजनीतिक विरोधी कर रहे थे। 12 साल बाद भी उनके राजनीतिक भाषण में कुछ भी नया नहीं था।"
लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी की माओवाद पर दो टूक
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने चेतावनी दी कि जहां सशस्त्र माओवादी हिंसा अपनी अंतिम सांसें गिन रही है, वहीं संस्थानों में अभी भी नक्सली विचारधारा वाली सोच मौजूद है। 15 अगस्त को लाल किले से बोलते हुए उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से सरकार की कार्रवाई ने जंगल में होने वाले उस उग्रवाद को काफी हद तक खत्म कर दिया है, जिसमें 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 'माओवादी सोच' वाले लोग सरकारी कमेटियों में पदों पर थे और नीतियों को प्रभावित करते थे।
'वंदे मातरम' के ऐतिहासिक सफर पर कांग्रेस का पक्ष
पीएम मोदी ने लोगों और अधिकारियों से इन 'दिमागी नक्सलियों' (Dimagi Naxals) की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने का आग्रह किया, जो उनके अनुसार युवाओं को अराजकता की ओर धकेलना चाहते हैं। उन्होंने इस बात को 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य से जोड़ा और कहा कि युवाओं को राष्ट्र-निर्माण से जोड़े रखने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रीय गीत को लेकर दिए गए बयानों का जवाब देते हुए कांग्रेस नेताओं ने 'वंदे मातरम' के साथ पार्टी के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। इस साल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस गीत का विशेष महत्व था क्योंकि देश ने राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाया और पहली बार इसे लाल किले के आधिकारिक समारोह के दौरान गाया गया।
कांग्रेस ने 1937 के ऐतिहासिक फैसले को याद किया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कलकत्ता में हुई कांग्रेस कार्य समिति की उस ऐतिहासिक बैठक को याद किया, जिसमें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सलाह दी थी कि 'वंदे मातरम' की शुरुआती पंक्तियों को अपनाया जाए और सार्वजनिक सभाओं में गाया जाए। उन्होंने कहा, "28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में 'वंदे मातरम' को लेकर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक हुई थी। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सलाह दी थी कि बैठकों में 'वंदे मातरम' की केवल शुरुआती पंक्तियाँ ही गाई जानी चाहिए।"
इस रुख को दोहराते हुए, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जोर दिया कि पार्टी के सभी कार्यक्रमों में यह गीत गाने का फैसला बहुत पहले ही संस्थागत रूप से ले लिया गया था। उन्होंने कहा, "अक्टूबर 1937 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में, गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेताओं ने यह तय किया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाया जाएगा। यह हमारा राष्ट्रीय गीत है।"
लाल किले पर पहली बार गूंजा 'वंदे मातरम'
इस साल के समारोहों में इस गीत का विशेष महत्व था क्योंकि देश ने राष्ट्रीय गीत के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाया। पहली बार, लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के तौर पर राष्ट्रीय गीत गाया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह मौका ऐतिहासिक है और उन्होंने 'वंदे मातरम' की भावना को 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने के सफर से जोड़ा। पीएम मोदी ने कहा, "आज इस समारोह में मौजूद सभी लोगों के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है। आजादी के बाद पहली बार, 15 अगस्त को लाल किले पर 'वंदे मातरम' गूंज रहा है।"
(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
यह भी पढ़ें: 'स्वतंत्रता केवल उपहार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है': राहुल गांधी