प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय न्यूजीलैंड यात्रा से पहले वहां की सांसद परमजीत परमार ने खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनों को लेकर उठ रही चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी।
वेलिंगटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय न्यूजीलैंड यात्रा से पहले वहां की सांसद परमजीत परमार ने खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनों को लेकर उठ रही चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग "बहुत कम संख्या" में हैं और वे न्यूजीलैंड के व्यापक सिख समुदाय के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। नेशनल पार्टी से न्यूजीलैंड की संसद के लिए चुनी गई भारतीय मूल की पहली महिला सांसद परमजीत परमार ने कहा कि न्यूजीलैंड अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन यह स्वतंत्रता धमकी, हिंसा या आतंकवाद के समर्थन तक नहीं जाती।
'उंगलियों पर गिने जा सकते हैं ऐसे लोग'
एएनआई से बातचीत में परमजीत परमार ने कहा, "इन लोगों की संख्या बहुत कम है। आप उन्हें उंगलियों पर गिन सकते हैं। वे व्यापक समुदाय के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते, जिसमें न्यूजीलैंड का सिख समुदाय भी शामिल है।" उन्होंने कहा, "हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान करते हैं, लेकिन इसका मतलब किसी भी तरह की धमकी, हिंसा या आतंकवाद का समर्थन नहीं है। यदि हिंसक आतंकवाद का कोई संकेत मिलता है तो कानून को अपना काम करना चाहिए। समुदाय में किसी भी व्यक्ति को अपनी पहचान के कारण असुरक्षित महसूस नहीं होना चाहिए।"
भारत पहले भी जता चुका है चिंता
परमार की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। भारत पहले भी न्यूजीलैंड के समक्ष खालिस्तान समर्थक तत्वों और कथित भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंता जता चुका है। परमजीत परमार ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, "इस सप्ताहांत जब मोदी जी यहां होंगे, तब सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी होगी और मुझे इसे लेकर कोई चिंता नहीं है।"
भारतीयों की सुरक्षा पर भी दिया बयान
न्यूजीलैंड में भारतीयों पर बढ़ते हमलों के सवाल पर परमार ने कहा कि देश का कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और किसी भी आपराधिक गतिविधि पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा, "समुदाय में हर व्यक्ति को सुरक्षित महसूस करना चाहिए, चाहे उसकी जाति या मूल देश कुछ भी हो। यदि कोई कानूनी सीमा का उल्लंघन करता है तो कानून अपना काम करेगा, क्योंकि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "न्यूजीलैंड में नस्लवाद या धमकी के लिए कोई जगह नहीं है। लोगों का मूल्यांकन उनके चरित्र और समाज में उनके योगदान के आधार पर होना चाहिए, न कि उनके वंश के आधार पर।"
ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड जाएंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पूरी करने के बाद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर वहां पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वह मार्च 2025 में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा से मिले सकारात्मक परिणामों को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों के आर्थिक, व्यापारिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह न्यूजीलैंड में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करने के लिए उत्साहित हैं, जिसने वहां विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
(एएनआई)
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