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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

NEET 2026 Protest: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की FIR, दिल्ली में 2,873 लोगों पर नई FIR की अनुमति

NEET 2026 Protest: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़ी FIR रद्द कीं, दिल्ली में 2,873 लोगों पर नई FIR की अनुमति दी। सरकार 90 दिनों में प्रभावित परिवारों को मुआवजा देगी। पढ़ें पूरी खबर।

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Cockroach Janta Party (CJP) Chief Spokesperson Saurav Das |

नई दिल्ली। NEET 2026 परीक्षा को लेकर 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन से संबंधित FIR को रद्द कर दिया, लेकिन दिल्ली में 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी है, जिनके कथित आपराधिक रिकॉर्ड सामने आए हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को कहा कि इन लोगों की पहचान कथित तौर पर फेसियल रिकग्निशन तकनीक के जरिए हुई थी और उन्हें जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर मौजूद बताया गया था। वहीं, सरकार ने प्रभावित परिवारों को 90 दिनों के भीतर मुआवजा देने का आश्वासन सुप्रीम कोर्ट के सामने दिया है।

2,800 से ज्यादा लोगों पर अलग FIR का रास्ता

सौरव दास ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,800 कथित कुख्यात अपराधियों की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई गई थी। यह मुद्दा सरकार के साथ हुई बातचीत में भी उठा था। दास ने कहा, "दिल्ली पुलिस की आशंका के संबंध में, जो फेसियल रिकग्निशन तकनीक पर आधारित थी और जिसके मुताबिक करीब 2,800 कथित कुख्यात अपराधी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे, हमने सरकार के साथ बातचीत के दौरान तर्क दिया कि अगर ये 2,800 कुख्यात अपराधी वास्तव में वहां मौजूद थे, तो पहला सवाल यह है कि वे समाज में खुलेआम घूम ही क्यों रहे थे।"

उन्होंने कहा कि यदि पहचान किए गए लोगों में से किसी ने प्रदर्शन स्थल पर गंभीर अपराध किया है, तो उसके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। दास ने कहा, "दूसरी बात, अगर उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर बलात्कार, हत्या या अन्य गंभीर अपराध जैसे जघन्य अपराध किए हैं, तो उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए, जांच होनी चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।"

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से विवादित मुद्दे का समाधान

CJP प्रवक्ता के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अब दिल्ली में इन करीब 2,800 पहचान किए गए कथित कुख्यात अपराधियों की जांच के लिए अलग और नई FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। दास ने कहा, "नतीजतन, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन करीब 2,800 पहचान किए गए कुख्यात अपराधियों की जांच के लिए दिल्ली में अलग और नई FIR दर्ज की जाए। अब यह मुद्दा सुलझ गया है।" हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दिल्ली पुलिस ने 2,873 लोगों को लेकर विशेष अपवाद की मांग की थी। पुलिस ने राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज कथित आपराधिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी थी।

प्रभावित परिवारों को 90 दिन में मिलेगा मुआवजा

मुआवजे के मुद्दे पर भी CJP ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के सामने स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की थी। पार्टी ने कहा था कि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक राशि 90 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए। सौरव दास ने कहा, "हमने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के सामने यह कहने का आग्रह किया था कि सम्मानजनक राशि के रूप में मुआवजा 90 दिनों के भीतर दिया जाएगा। धनराशि सीधे परिवारों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।" उन्होंने कहा कि सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में यह आश्वासन दिया और कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया। दास के मुताबिक, कोर्ट ने अपने आदेश में इसे शामिल करके आश्वासन को न्यायिक मान्यता भी दे दी।

अनुच्छेद 142 के तहत SC ने रद्द की FIR

यह घटनाक्रम मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद सामने आया, जिसमें कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने NEET 2026 परीक्षा को लेकर 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में हुए प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIRs को रद्द कर दिया। यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ओर से CJP की मांगों पर सुप्रीम कोर्ट के सामने दिए गए आश्वासनों के बाद हुई। कोर्ट के निर्देश और केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना प्रदर्शन भी वापस ले लिया।

दिल्ली समेत पांच राज्यों की याचिकाओं पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस के साथ महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों की ओर से भी आवेदन दाखिल किए गए थे। इन आवेदनों में उन प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIRs को लेकर अदालत से दिशा-निर्देश मांगे गए थे। इन प्रदर्शनों में हजारों छात्रों और युवाओं ने हिस्सा लिया था। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि प्रदर्शन देशभर में हुए थे और अलग-अलग राज्यों में पुलिस कार्रवाई तथा FIRs दर्ज की गई थीं।

2,873 लोगों पर पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 2,873 लोगों के मामले में अलग रुख अपनाया। पुलिस ने अदालत के समक्ष कहा कि इन लोगों के कथित आपराधिक पूर्ववृत्त राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, इन व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में शारीरिक नुकसान पहुंचाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को इन 2,873 लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक FIR दर्ज करने की अनुमति दे दी। यानी व्यापक प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य FIRs पर राहत के बावजूद, कथित आपराधिक पृष्ठभूमि वाले इन लोगों के मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।

क्या है पूरे मामले का बड़ा संकेत?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का व्यापक असर यह है कि एक तरफ NEET 2026 प्रदर्शनों से जुड़ी FIRs को रद्द कर प्रदर्शनकारियों को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ कथित गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बरकरार रखी गई है। इसके साथ ही, प्रभावित परिवारों को 90 दिनों में सीधे बैंक खातों में मुआवजा देने का सरकार का आश्वासन अदालत के आदेश का हिस्सा बन गया है। CJP के लिए यही दो मुद्दे कथित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और मुआवजे की समयसीमा सरकार के साथ बातचीत में अहम बताए गए थे।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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