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निप्पॉन डेनरो कोल ब्लॉक आवंटन मामला

निप्पॉन डेनरो कोल ब्लॉक आवंटन मामले में CBI क्लोजर रिपोर्ट पर आदेश सुरक्षित, 10 सितंबर को फैसला

राउज एवेन्यू कोर्ट ने निप्पॉन डेनरो कोल ब्लॉक मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली संदीप दीक्षित और मणिक्कम टैगोर की प्रोटेस्ट याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रखा।

निप्पॉन डेनरो कोल ब्लॉक आवंटन मामले में cbi क्लोजर रिपोर्ट पर आदेश सुरक्षित 10 सितंबर को फैसला

Nippon Denro Coal Block Case: Court Reserves Order on CBI Closure Report |

नई दिल्ली (भारत)। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेताओं संदीप दीक्षित और मणिक्कम टैगोर द्वारा दायर प्रोटेस्ट याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इन याचिकाओं में M/s निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड (Nippon Denro Ispat Limited) से जुड़े कथित कोल ब्लॉक आवंटन मामले में CBI द्वारा सौंपी गई क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला 1993 से 2004 के बीच हुए कोल ब्लॉक आवंटन (Coal Block Allocation Case) से जुड़ा है, जिसमें M/s निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड (अब JSW स्टील) नाम की कंपनी भी शामिल थी। कांग्रेस नेताओं (संदीप दीक्षित और मणिक्कम टैगोर) सहित 7 सांसदों ने 2012 में शिकायत की थी कि इस आवंटन में गड़बड़ी हुई है।

10 सितंबर को फैसला सुनाएगी कोर्ट

स्पेशल CBI जज (कोल ब्लॉक मामले) वीरेंद्र कुमार खार्ता ने दीक्षित और टैगोर के वकीलों और CBI की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट 10 सितंबर को अपना आदेश सुनाएगी। पूर्व सांसद संदीप दीक्षित की ओर से वकील सारिम नावेद पेश हुए, जबकि वकील सूर्य किरण ने टैगोर का प्रतिनिधित्व किया।

आरोपियों को समन करने तक सीमित मांग

इससे पहले 5 जून को, शिकायतकर्ताओं के वकीलों ने कहा था कि वे प्रोटेस्ट याचिका और CrPC की धारा 156(3) के तहत आवेदन में अपनी मांग को केवल रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री और चार्जशीट के आधार पर आरोपियों को समन करने तक ही सीमित रख रहे हैं, और बाकी सभी राहतों को छोड़ रहे हैं।

सात नेताओं को CBI रिपोर्ट पर नोटिस

10 जुलाई, 2024 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने सात राजनीतिक नेताओं - जिनमें केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह, मणिक्कम टैगोर, संदीप दीक्षित, हरीश चौधरी, चौधरी लाल सिंह, रघुवीर सिंह मीणा और इज्यराज सिंह शामिल हैं - को नोटिस जारी कर CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर उनका जवाब मांगा था।

CBI को नहीं मिले आपराधिक साजिश के सबूत

यह मामला 5 सितंबर, 2012 को सात सांसदों द्वारा दी गई शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें 1993 और 2004 के बीच कोल ब्लॉक आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। अपनी क्लोजर रिपोर्ट में, CBI ने निष्कर्ष निकाला कि जांच में किसी भी सरकारी कर्मचारी या निजी संस्था - जिसमें नामित फर्म निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड (जो अब बंद हो चुकी है और JSW स्टील लिमिटेड में विलय हो गई है) शामिल है - द्वारा आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी या आधिकारिक पद के दुरुपयोग का कोई सबूत नहीं मिला। 

24 कोयला ब्लॉकों की जांच की मांग

कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में कहा था कि 14 सितंबर, 2012 को दीक्षित ने एक अतिरिक्त शिकायत दी थी, जिसमें 24 खास कोयला ब्लॉकों का जिक्र था। इन ब्लॉकों के आवंटन की प्रक्रिया की गहराई से जांच की जरूरत थी। हालांकि, खिलौनी कोयला ब्लॉक—जो इस मामले का मुख्य विषय है—का नाम दीक्षित के 14 सितंबर के पत्र में साफ तौर पर नहीं था, फिर भी उन्होंने जोर देकर कहा कि 1993 की नीति लागू होने के बाद से हुए सभी कोयला ब्लॉक आवंटनों की व्यापक जांच होनी चाहिए।

CBI ने PE से शुरू कर RC में बदली जांच

कोर्ट ने यह भी गौर किया था कि जहां 5 सितंबर की शुरुआती शिकायत पर सात सांसदों के हस्ताक्षर थे, वहीं 14 सितंबर के पत्र पर सिर्फ दीक्षित के हस्ताक्षर थे। उन्होंने बताया था कि वे अपने साथियों की ओर से यह दस्तावेज जमा कर रहे हैं क्योंकि उस समय वे दिल्ली से बाहर थे। सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) के रेफरेंस के बाद, CBI ने शुरू में एक शुरुआती जांच (PE) दर्ज की, जिसे बाद में एक रेगुलर केस (RC) में बदल दिया गया।

मूल शिकायतकर्ताओं को सुनना जरूरी: कोर्ट

हालांकि CBI ने पहले यह तर्क दिया था कि शिकायतकर्ताओं ने एक सामान्य शिकायत दर्ज कराई थी और वे खास तौर पर उस संस्था को निशाना नहीं बना रहे थे, लेकिन कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला लेने से पहले मूल शिकायतकर्ताओं की बात सुनना जरूरी समझा। (Source: ANI)

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