बीस साल पहले नोएडा में सामने आए निठारी हत्याकांड में मारे गए बच्चों के परिवारों ने पूछा है कि अगर उनके बच्चों को सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर ने नहीं मारा था, तो क्या उन्हें किसी भूत ने मारा।
निठारी कांड का एकमात्र दोषी सुरेंद्र कोली भी बरी
सवाल: सुरेंद्र कोली-पंढेर ने बच्चों को नहीं मारा था, तो क्या 'भूत' ने मारा
नई दिल्ली। करीब 20 साल पहले नोएडा में सामने आए निठारी हत्याकांड में मारे गए बच्चों के परिवारों ने पूछा है कि अगर उनके बच्चों को सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर ने नहीं मारा था, तो क्या उन्हें किसी 'भूत' ने मारा था।
उन्होंने यह सवाल मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले के एकमात्र दोषी सुरेंद्र कोली को आरोपों से बरी किए जाने के बाद पूछा और उसकी रिहाई पर सवाल उठाए। कोली को एक ऐसे मामले में बरी किया गया, जिसमें वह उम्रकैद की सजा काट रहा था। उस पर आरोप था कि उसने इन बच्चों की हत्या उस वक्त की थी, जब वह निठारी में रहने वाले व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर में घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। इस मामले में मंगलवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक मृत बच्चे के पिता ने कहा, 'हमें बहुत दुख हुआ था जब पंढेर (मोनिंदर सिंह पंढेर) को बरी कर दिया गया था, जबकि उसने तो पुलिस के सामने अपना अपराध भी कबूल कर लिया था।
अगर पंढेर भी इसके लिए जिम्मेदार नहीं है, अगर कोली (सुरेंद्र कोली) इसके लिए जिम्मेदार नहीं है, तो उन्हें इतने सालों तक जेल में क्यों रखा गया? ऐसे में, उन्हें जेल में डालने वालों को फांसी होनी चाहिए। अगर वे अपराधी नहीं हैं, तो कौन है?'
एक अन्य पीड़ित परिवार ने पूछा कि अगर मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली ने उनके बच्चों की हत्या नहीं की है, तो दोषी कौन है। कोली को बरी किए जाने के फैसले पर गुस्सा जताते हुए एक पीड़ित बच्चे की मां ने कहा, 'मोनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली) ने इतने सारे बच्चों की हत्या की। लेकिन इस मामले में कुछ नहीं किया जा रहा है। अब दोषी कौन है? क्या उस घर में कोई भूत था जिसने सभी बच्चों को मार डाला? वे बच्चों को मारते थे और अंगों की तस्करी करते थे। अब वे कहते हैं कि वे निर्दोष हैं। भले ही कानून उन्हें छोड़ रहा है, लेकिन भगवान नहीं छोड़ेगा।'
2006 में प्रकाश में आया मामला
यह मामला साल 2006 में नोएडा के निठारी गांव के पास सेक्टर-31 में हुई बच्चों और महिलाओं की सिलसिलेवार हत्याओं से जुड़ा है। इस हत्याकांड का खुलासा व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने के साथ हुआ था। उस समय सुरेंद्र कोली, पंढेर के घर में घरेलू सहायक था।
कोली को 15 साल की एक लड़की के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे शीर्ष न्यायालय ने 2011 में बरकरार रखा था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अक्टूबर 2023 में निठारी से जुड़े 12 अन्य मामलों में निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को पलटते हुए उसे बरी करने के बाद कोली ने फिर से अदालत का रुख किया। उच्च न्यायालय ने सह-आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को भी दो मामलों में बरी कर दिया था।
कोली की रिहाई का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि कोली की दोषसिद्धि को केवल एक मामले में बरकरार रखना, जबकि शीर्ष अदालत ने समान तथ्यों के आधार पर अन्य सभी मामलों में उसकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था, असंगत और अन्यायपूर्ण होगा।
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