प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत को हाइपरसोनिक और अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व करना होगा।
नई दिल्ली (भारत)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए रक्षा शक्ति को अपने 'शक्ति की सप्तधारा' दृष्टिकोण की पांचवीं 'शक्ति' बताया और रक्षा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भरता का आह्वान किया। उन्होंने भारत से सैन्य उपकरणों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता और हाइपरसोनिक प्रणालियों सहित अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बनने का आग्रह किया।
रक्षा क्षेत्र के लिए सरकार के प्रयासों को दोहराया
आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के लिए सरकार के प्रयासों को दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अन्य देशों के लिए केवल एक बाजार बनकर नहीं रह सकता और उसे विश्व को उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों की आपूर्ति करने की क्षमता विकसित करनी होगी। पीएम मोदी ने कहा, "सप्तधारा की पांचवीं शक्ति रक्षा शक्ति है। हमारे लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना महत्वपूर्ण है। जब दुनिया अपने बारे में सोच रही है, तब भारत केवल दुनिया के लिए एक बाजार बनकर नहीं रह सकता। हमें वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनना होगा। हमें हाइपरसोनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व करना होगा।"
वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये
भारत अपने स्वदेशी हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ा रहा है, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहा है। देश लंबी दूरी की मारक क्षमता और उन्नत प्रणोदन प्रणालियों के लिए भी स्वदेशी प्रौद्योगिकियों पर काम कर रहा है। भारत के रक्षा विनिर्माण आधार के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ गया है।"
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात में काफी वृद्धि हुई है, क्योंकि सरकार स्वदेशी विनिर्माण को मजबूत करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने का प्रयास कर रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि 2014 में यह 46,000 करोड़ रुपये था।
भारत का रक्षा उत्पादन हर साल नई ऊंचाइयों को छू रहा
सिंह ने इस वृद्धि का श्रेय सरकार की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहलों को दिया और कहा कि भारत रक्षा विनिर्माण केंद्र और निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को तेजी से पूरा कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणादायक नेतृत्व में भारत का रक्षा उत्पादन हर साल नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन में 15.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2020-21 के 84,643 करोड़ रुपये से 110 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। स्वदेशी रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2013-14 से लगभग चार गुना बढ़ गया है। रक्षा निर्यात भी वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है।
सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का योगदान लगभग 76 प्रतिशत
निजी क्षेत्र भी भारत के रक्षा औद्योगिक आधार में तेजी से महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा उत्पादन में इसका योगदान 24 प्रतिशत रहा, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का योगदान लगभग 76 प्रतिशत रहा। सिंह ने कहा कि सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण एक प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है, जिसके लिए उन्होंने रक्षा खर्च, पूंजीगत व्यय और अनुसंधान एवं विकास के लिए धन में वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने हाल ही में किए गए परीक्षणों और उन्नत प्रणालियों की सफलता पर भी प्रकाश डाला, जिनमें लंबी दूरी की भूमि आक्रमण क्रूज मिसाइल, रुद्रएम-II वायु-से-सतह मिसाइल, नौसेना रोधी मिसाइल-एसआर और पिनाका लंबी दूरी की निर्देशित रॉकेट शामिल हैं।
'शक्ति की सप्तधारा' के सात क्षेत्रों की रूपरेखा तैयार
हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी पर सिंह ने कहा कि 1,200 सेकंड से अधिक समय तक सक्रिय-शीतित पूर्ण-पैमाने के स्क्रैमजेट कंबस्टर के सफल परीक्षण ने भारत को हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी विकसित करने में सक्षम चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है। रक्षा शक्ति पर ज़ोर देना प्रधानमंत्री मोदी के व्यापक 'शक्ति की सप्तधारा' दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत उन्होंने सात क्षेत्रों की रूपरेखा तैयार की है, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे भारत की वृद्धि और वैश्विक स्थिति को गति प्रदान करेंगे। पहली शक्ति विनिर्माण शक्ति है, जिसके लिए प्रधानमंत्री ने डिज़ाइन और विनिर्माण को शामिल करते हुए एक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला के निर्माण का आह्वान किया।
संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का निर्माण करना होगा
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें एक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का निर्माण करना होगा। डिज़ाइन से लेकर विनिर्माण तक, भारत को विश्व के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भागीदार के रूप में स्थापित करना होगा। हमें लागत, गुणवत्ता और पैमाने के वैश्विक मानकों को पूरा करना होगा।" दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य उत्पादन है, जबकि तीसरी प्रौद्योगिकी और नवाचार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा केंद्रों पर प्रकाश डाला और भारत को नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा, "हमने यूपीआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में अपनी क्षमता साबित कर दी है।
अब भारत को डिजिटल सार्वजनिक प्रौद्योगिकियों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना होगा। भारत को अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करना होगा। मेड इन इंडिया 6जी हर कोने तक पहुंचना चाहिए - यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।"
चौथी ताकत गति शक्ति है, जिस पर प्रधानमंत्री उच्च गति कनेक्टिविटी, उच्च गति रेल और बंदरगाह आधारित विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। छठी ताकत हरित और नीली अर्थव्यवस्था है, जिसमें हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री प्रौद्योगिकी शामिल हैं। सातवीं ताकत भारत की सॉफ्ट पावर है, जिस पर पीएम मोदी योग की वैश्विक पहुंच को उजागर कर रहे हैं। (इनपुट: ANI)
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