भारत में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र ने लेखक-राजनयिक अभय के. की पुस्तक नालंदा: हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया।
नई दिल्ली [भारत]: भारत में यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र ने लेखक-राजनयिक अभय के. की पुस्तक नालंदा: हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया। इसमें प्राचीन शिक्षा केंद्र और उसकी वैश्विक विरासत पर चर्चा के लिए राजनयिकों, विद्वानों, विशेषज्ञों और छात्रों को एक साथ लाया गया।
'नालंदा बोलोग्ना से 600 साल पुराना'
इस अवसर पर भारत में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर स्टीफन प्रीस्नर ने कहा, "नालंदा एक ऐसा विषय है जो संयुक्त राष्ट्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है - समाज के विकास को आकार देने के लिए सीमाओं के पार स्वतंत्र रूप से ज्ञान, संवाद और विचारों के आदान-प्रदान की शक्ति। भारत आने से पहले, मुझे यूरोप के सबसे पुराने विश्वविद्यालय, 1088 ईस्वी में स्थापित बोलोग्ना शहर में अध्ययन करने पर गर्व था, जहां से 'यूनिवर्सिटास' शब्द आया है, लेकिन नालंदा उससे 600 साल पुराना है।" उन्होंने कहा कि नालंदा की स्थापना 5वीं शताब्दी में हुई थी और यह कई मायनों में दुनिया का पहला महान आवासीय आधुनिक विश्वविद्यालय बन गया था। इसने चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, मंगोलिया, श्रीलंका और मध्य एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के दूर-दराज के क्षेत्रों से विद्वानों को आकर्षित किया।
'ज्ञान और बौद्धिक आदान-प्रदान का केंद्र रहा भारत'
प्रीस्नर ने कहा कि नालंदा दर्शनशास्त्र, विज्ञान, गणित, चिकित्सा और कला के अध्ययन का केंद्र बन गया था। यहां विचारों का परीक्षण, वाद-विवाद और आदान-प्रदान बड़े पैमाने पर खुले तौर पर किया जाता था। उन्होंने कहा कि नालंदा से लेकर आज के फलते-फूलते संस्थानों तक, भारत लंबे समय से ज्ञान और बौद्धिक आदान-प्रदान का केंद्र रहा है। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों और विकसित भारत की परिकल्पना का भी उल्लेख किया।
बिहार की विकास क्षमता की सराहना
प्रीस्नर ने बिहार की विकास क्षमता की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि उन्हें एक सप्ताह पहले पटना जाने और वहां के संग्रहालयों को देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पटना संग्रहालय और बिहार संग्रहालय में नालंदा की मुहर की प्रतिकृति सहित कई प्रभावशाली प्रदर्शनियां देखीं। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता में बिहार का योगदान कई सदियों, बल्कि हजारों साल पुराना है और इस क्षेत्र से विचार, कला और ज्ञान का प्रवाह हुआ है।
यूनेस्को ने नालंदा को विश्व धरोहर स्थल बताया
दक्षिण एशिया में यूनेस्को के प्रमुख टिम कर्टिस ने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहरों से भी संबंधित है और नालंदा एक विश्व धरोहर स्थल है। उन्होंने बताया कि भारत की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध है और यहां 45 विश्व धरोहर स्थल हैं। उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर नालंदा महाविहार कहलाने वाले पुरातात्विक स्थल को 2016 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।
'नालंदा ने स्थापत्य और संस्थान निर्माण को प्रभावित किया'
कर्टिस ने कहा कि नालंदा को उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य के आधार पर विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि नालंदा ने संस्था निर्माण, स्थल योजना, वास्तुकला और कलात्मक परंपराओं के सिद्धांतों को मजबूती से स्थापित किया। उन्होंने बताया कि चतुर्भुजाकार विहार स्वरूप, पंचकोणीय चैत्य स्वरूप, प्लास्टर और धातु कला जैसी परंपराओं को दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के समान संस्थानों में अपनाया गया।
'मठ से विश्वविद्यालय के विकास का शिखर था नालंदा'
कर्टिस ने कहा कि नालंदा महाविहार एक मठ से विश्वविद्यालय के विकास के शिखर का प्रतीक है। इसने बौद्ध धर्म, दर्शन, तर्क और प्रवचन की प्रणालियों तथा वाद-विवाद और गुरु-शिष्य परंपरा सहित विशिष्ट शिक्षण विधियों के विकास में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इसकी निरंतरता आज भी दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के मठों में देखी जा सकती है। नालंदा आधुनिक विश्वविद्यालयों और इस क्षेत्र के संस्थानों, जिनमें स्वयं नालंदा विश्वविद्यालय भी शामिल है, को प्रेरित करता रहता है। कर्टिस ने कहा कि संरक्षण, पुरातात्विक खुदाई का दस्तावेजीकरण, आगंतुक प्रबंधन और बफर जोन के आसपास आगंतुकों के दबाव को नियंत्रित करना लगातार बनी हुई चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि नालंदा को भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवित रखने की प्रतिबद्धता जारी रहनी चाहिए।
नालंदा की ऐतिहासिक भूमिका पर हुई चर्चा
सत्र में अभय के. और नालंदा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डी. वेंकट राव के साथ राधिका कौल बत्रा ने संवाद का संचालन किया। इसमें नालंदा महाविहार की ज्ञान और बौद्धिक आदान-प्रदान के वैश्विक केंद्र के रूप में ऐतिहासिक भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया। चर्चा के दौरान अभय के. ने नालंदा की खगोल विज्ञान, गणित, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र और कविता जैसी विविध शैक्षणिक परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान के अंतःविषयक दृष्टिकोण, विविध संकाय और योग्यता-आधारित छात्रवृत्तियों को भी रेखांकित किया और इन्हें समकालीन शिक्षा प्रणालियों के लिए संभावित आदर्श बताया।
2024 में हुआ नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन
चर्चा में नालंदा विश्वविद्यालय के आधुनिक पुनरुद्धार और भारत के शैक्षिक परिदृश्य में इसकी नई भूमिका पर भी ध्यान आकर्षित किया गया। राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में किया था। इसे इस प्राचीन संस्थान की विरासत के पुनरुद्धार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना गया।
(एएनआई)
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